Gaurav Gogoi: पेपर लीक मामला और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर जंतर मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया, अब बारी है सदन में जनता के नुमाइंदों द्वारा सरकार को हिलाने और उसकी जवाबदेही तय करने की. इस प्रक्रिया के तहत आज 28 जुलाई 2026, लोकसभा में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला किया है. उनका मुख्य तर्क था कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे, जब तक परीक्षा व्यवस्था के भीतर जवाबदेही तय नहीं की जाती.

गोगोई ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एनटीए में मात्र 34 पद ही स्वीकृत हैं, और उनमें से भी दस पद रिक्त पड़े हैं तो सरकार ने 47 लोगों को निष्कासित किस तरह कर दिया? 47 लोगों को हटाने का आंकड़ा आया कहां से और सरकार को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए.

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य है. 22 जुलाई को राज्यसभा में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार एनटीए में वास्तव में 39 स्वीकृत डेपुटेशन पोस्ट्स हैं, जिनमें 24 भरे और 15 खाली हैं. इसके अतिरिक्त 73 कॉन्ट्रैक्चुअल और 124 आउटसोर्स कर्मचारी हैं. इसलिए 47 लोगों को हटाना गणितीय रूप से असंभव नहीं है क्योंकि हटाए गए लोग केवल स्वीकृत डेपुटेशन पदों पर बैठे अधिकारी हों, यह जरूरी नहीं है. मगर यही बिंदु गोगोई के सवाल को और दिलचस्प बनाता है. सरकार को स्पष्ट करना होगा कि हटाए गए 47 लोग कौन थे? वे डेपुटेशन वाले थे, कॉन्ट्रैक्चुअल वाले थे या सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों को हटा कर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है. ये भी जानना दिलचस्प होगा कि किस आधार पर उन्हें हटाया गया है?

गोगोई के हमले

गोगोई ने 2024 के मूल पेपर-लीक विरोधी कानून को असफल बताते हुए कहा कि जब उसे लाया गया था तब सरकार ने उसे ऐतिहासिक बताया था, लेकिन उसके बावजूद परीक्षा विवाद और पेपर लीक होते चले गए. उन्होंने नीट-यूजी 2024 (NEET-UG 2024) मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि तब दर्जनों लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन उनमें से कईयों को जमानत मिल चुकी है. सरकार का लाया हुआ नया संशोधन भी व्यवस्था की मूल कमजोरियों को दूर किए बिना प्रभावी नहीं होगा.

गोगोई ने मंत्रिपद गवाने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रवैये पर भी हमला बोला और संसद परिसर में उनके आने पर भाजपा सदस्यों द्वारा उनका स्वागत जिस जोरशोर से किया गया, उस पर भी करारा कटाक्ष किया. गोगोई ने सवाल उठाया कि जब परीक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी गड़बड़ियां हुईं तो एनटीए के शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई? उलटे संसद परिसर में उनको फूल-माला और टोपी पहना कर स्वागत हुआ?

गोगोई ने सरकार से के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर भी जवाब मांगा. यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक रिपोर्ट के मुताबिक समिति की 101 सिफारिशों में अब तक सिर्फ 57 ही लागू हुई हैं और कई संरचनात्मक सुधार अभी भी बाकी हैं.

छात्र आंदोलन पर पुलिस बर्बरता

गौरव गोगोई ने सदन में 20 जुलाई के जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर पुलिस बर्बरता पर सरकार को बुरी तरह घेरा. गोगोई ने पूछा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश किसने दिया, आंसू गैस क्यों छोड़ी गई और पैलेट गन और एके-47 जैसे घातक हथियार का इस्तेमाल छात्रों पर करने का आदेश किसने दिया? उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर इस सवाल का जवाब दें. उन्होंने प्रदर्शन करने वाले युवाओं की प्रशंसा करते हुए इसे लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार और कर्तव्य से जोड़ा.

शिक्षा संस्थानों में आरएसएस का कब्जा

गोगोई ने सरकार पर शिक्षा संस्थानों में वैचारिक नियुक्तियों का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार में शिक्षा का उद्देश्य एक विशेष विचारधारा से लोगों को जोड़ना और अपना राजनीतिक समर्थन तैयार करना है. आरएसएस से जुड़े लोग देश भर के शिक्षा संस्थानों में नियुक्त किये जा रहे हैं.

गौरतलब है कि 27 जुलाई को विधेयक पेश होने से पहले ही गौरव गोगोई ने पत्रकार वार्ता में कहा था कि उन्हें प्रधानमंत्री की शिक्षा सुधार की गंभीरता पर कोई भरोसा नहीं है, क्योंकि आरएसएस पूरे शैक्षणिक ढांचे में अपने लोगों को वाइस चांसलर, प्रिंसिपल और शिक्षा विभाग के विभिन्न पदों पर बैठाना चाहता है. सरकार वास्तविक सुधार की बजाय अपने वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है.

कुल मिलाकर गौरव गोगोई ने सदन में अपनी बहस को सिर्फ “पेपर लीक करने वालों को कितनी सजा मिले” तक सीमित नहीं रहने दिया. उन्होंने इसे एनटीए की संरचना, कर्मचारियों की जवाबदेही, शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही , राधाकृष्णन समिति के सुधार, आरएसएस का शिक्षा संस्थानों में घुसना और छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई तक ले जाकर सरकार को हलकान किया. Gaurav Gogoi

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...