Education Minister: कई दिन से अटकलें लग रही थीं कि राम के बनवास पर न भेजने पर अड़े दशरथ की तरह मोदी सरकार अपने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ ले पाएगी या नहीं . जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी प्रधान के इस्तीफे पर कोई आश्वासन नहीं दे पाए थे. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात के दौरान भी उन्होंने सोच विचार के लिए शुक्रवार 24 जुलाई को 24 घंटे का समय माँगा था. यही टालमटोल हमारी संस्कृति का हिस्सा है.
मोदी सरकार सोच रही थी कि फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करने के बाद कुछ बात बन जाएगी और शायद सीजेपी का आंदोलन नरम पड़ जाएगा, मगर जब कॉकरोचों ने कह दिया कि ये सारी बातें तो हमारी मांगों में थी ही नहीं, हमें तो बस धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए, तब सरकार घुटनों पर आ गई. धर्म की हांडी में चंदा पकता है युवा भविष्य नहीं. धर्म और धर्मेंद्र ने रेशनल एजुकेटेड युवाओं के आगे घुटने टेक दिए.
देश भर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर युवा पीढ़ी जब सबको लेकर सड़कों पर आ गई मोदी सरकार को अपना सिंहासन डोलता नजर आने लगा और अंततः कॉकरोचों ने विजय पताका लहराई. 25 जुलाई की दोपहर देश ने वो देख जो अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया. Education Minister, Resignation





