Gen Z: इजराइल के कहने पर अमेरिका को ईरान से जंग करना बड़ा महंगा पड़ रहा है. उस के कम से कम 25 बिलियन डौलर के वार इक्विपमैंट स्वाहा हो गए हैं और अमेरिकी पौपुलेशन अब पैट्रोल, ग्रोसरी के ज्यादा पैसे तो दे ही रही है, उस पर सरकार का लिया 36 ट्रिलियन डौलर का लोन और कई ट्रिलियन बढ़ गया है जिस का इंटरैस्ट अमेरिकी टैक्सपेयर दे रहे हैं.
यह कहां पढ़ा? यह पढ़ा नहीं, इंस्टाग्राम की रील में देखा. ‘ब्रीजी पौलिटिक्स’ नाम के अकाउंट में सैंफ वीगर जर्नलिस्ट जनता को इन्फौर्म करता नजर आ रहा है. 15-20 सैकंड की एक पोस्ट से क्या अमेरिकी सरकार, संसद, मीडिया हिल जाएगी? ‘ब्रीजी पौलिटिक्स’ के 4 लाख मुफ्तखोर फौलोअर्स हैं और इस इन्फ्लुएंसर ने 1,367 पोस्ट अपलोड की हैं पर फिर भी इस पोस्ट पर सिर्फ 529 कमैंट मिले, 1,766 ने इसे रीपोस्ट किया और 2,200 ने बुकमार्क लगा कर सेव किया.
यह रील डोनाल्ड ट्रंप ने देखी या संसद के कांग्रेसमैनों ने देखी, कोई पता नहीं क्योंकि वे ‘ब्रीजी पौलिटिक्स’ को फौलो नहीं करते. अमेरिका की इतनी बड़ी बात और उस का कोई असर नहीं.
असर इसलिए भी नहीं कि अगर इंस्टाग्राम पर सर्च किया जाए कि अमेरिका ने इजराइल वार पर कितना खर्च किया तो सैकड़ों ‘नौलेजेबल’ इन्फ्लुएंसर्स की पोस्टें दिख जाएंगी. जो लगभग यही बात अपनेअपने तरीके से कह रहे होंगे. इन सब की रील्स में एक बात कौमन होगी कि मानो वे अकेले हैं जिन्होंने खूब यूएस गवर्नमैंट के डौक्युमैंट्स छानबीन कर यह बात पता की.
असल में एक ने कुछ कहा, दूसरा उसी पर 2 और बातों को जोड़ देगा और बीचबीच में अपने इरिटेटिंग कमैंट्स देता रहेगा. रील देखने वाला इसे कुछ सैकंड देखने के बाद अगली पर चला जाता है जिस में जेनजी का मजाक उड़ाया जा रहा है और फिर तीसरी पर जिस में लंबे किस्म के वाटरमैलन को काट कर दिखाया जा रहा है.
ऐसा व्यूअर क्या जर्नलिस्ट सैंफ वीगर की बात को सीरियसली लेगा? क्या वह जेनजी की प्रौब्लम को भी सम?ोगा? क्या वह फार्मिंग में हो रही वाटरमैलन की रेवोल्यूशन को भी समझेगा?
सोशल मीडिया ने असल में सब को फुलिश बना डाला है क्योंकि इस से सक्सैस ईजी है. मदारी के खेल से आईपीएल गेमिंग तक आप को पहुंचने में 1 सैकंड का भी आधा टाइम लगता है और किसी सीरियस बात कहने वाली रील्स को स्विप करने के लिए जीरो सैकंड लगता है, सोशल मीडिया पर फौलोअर्स और व्यूज गिनगिन कर लोग खुश हो रहे हैं पर इन्हीं लोगों को बहका कर पौलिटिशियन, रिलीजियस गुरु और टैक बिजनैसमेन अरबों कमा रहे हैं और किसी को खबर नहीं हो रही.
सोशल मीडिया पावरफुल है पर एक क्राउड की तरह जो अपनी बात दोचार नारों और कागज पर प्रिंट किए स्लोगनों से कह सकती है, बस.
अगर अपना, घर का, देश का और वर्ल्ड का फ्यूचर बनाना है, बचाना है तो सोशल मीडिया की चालबाजी को समझें, इस की रील्स नहीं हैं क्योंकि सोशल मीडिया के शातिर ओनर इन को सप्रैस कर रहे हैं. Gen Z





