Barren Land Forest: कर्नाटक के होन्ना किरनागी गांव की कहानी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है. जहां कभी सूखी और बंजर जमीन होती थी, वहां अब हराभरा जंगल खड़ा है. इस जंगल ने गांव का मौसम ही बदल दिया है. यहां अब तापमान 3 डिग्री तक कम हो गया है. यह एक उदाहरण है की इंसान की मामूली कोशिशों से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं.
कुछ साल पहले इस गांव की 1,600 एकड़ जमीन बिलकुल बंजर हो चुकी थी. यहां एक पावर प्लांट बनाने की योजना बनी थी, लेकिन वह कभी शुरू नहीं हुई. खाली पड़ी जमीन, तेज गरमी और बेरोजगारी इस गांव की पहचान बन गई. गरमी इतनी पड़ती थी कि लोगों का बाहर निकलना मुश्किल था.
गांव के रहने वाले सदाशिव हाइड्रा नाम के एक साधारण मजदूर ने फैसला किया कि वह इस स्थिति को बदलेगा. उस ने गांव वालों को साथ लिया और लोगों के साथ मिल कर काम शुरू किया. खाली पड़ी जमीन पर 65,000 से ज्यादा पौधे लगाए गए. पूरे गांव के 1,000 से ज्यादा लोगों ने इस में भाग लिया. सालों की मेहनत के बाद पेड़ अब 40 फुट से ज्यादा ऊंचे हो चुके हैं.
एक आदमी की अलग सोच ने बड़ा बदलाव ला दिया है. गांव का तापमान 3 डिग्री सैल्सियस तक कम हो गया है. गरमी का प्रकोप घटा है. पर्यावरण सुधरा है. रोजगार के नए अवसर बने हैं और गांव वालों के जीवनस्तर में सुधार हुआ है. पेड़ न सिर्फ छांव देते हैं, बल्कि हवा को शुद्ध करते हैं, मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और पानी को भी बचाते हैं. सदाशिव हाइड्रा ने साबित कर दिया कि बड़ेबड़े प्रोजैक्ट की जरूरत नहीं, सिर्फ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास से भी पर्यावरण को बचाया जा सकता है.
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