Saffronisation of Hockey: भगवा गैंग का बस चले तो वह नीले आसमान को भी भगवा केसरिया रंग से पुतवा दे. कल को वह कृषि वैज्ञानिकों को यह हुक्म भी दे सकती है कि गेंहू की ऐसी प्रजातियां विकसित की जाए जिनमे बालियाँ बजाय हरे के केसरिया रंग की लगें. हालिया जंतर मंतर प्रोटेस्ट का हल्ला इसी बात को लेकर भड़ास की शक्ल में ज्यादा था कि भाजपा सरकार शिक्षा सहित हर चीज का भगवाकरण करने पर मनमानी की हद तक उतारू हो आई है. टेक्नालाजी को खिलौना बनाकर खेलती जेन जी को यह गंवारा नहीं हुआ तो उसने एक महीने में ही जिद्दी सरकार को घुटनों पर लाकर भगवा गुब्बारा पिचका दिया.
इधर हाकी भी इससे अछूती नहीं रह गई है. हाकी इंडिया ने बिना किसी मांग के या सलाह मशवरे के हुक्म सुना दिया कि नीदरलेंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से होने जा रहे विश्व कप में पुरुष व महिला हाकी खिलाडियों की जर्सियां भगवा रंग की होंगी. बस यह फरमान आने की देर थी कि हाकी के कई दिग्गज मसलन धनराज पिल्लै भडक उठे. लेकिन सलीके से भडके डिफेंडर सरदार परगट सिंह जो भारत के लिए 339 मेच खेल चुके हैं. उनके नाम चार ओलंपिक सहित विश्व कप और चैम्पियंस टूर्नामेंट्स खेलने का रिकार्ड दर्ज है.
बकौल परगट सिंह हमारे देश में हर चीज में भगवा ब्रांडिंग हो रही है. चाहे वह शिक्षा हो इतिहास हो और अब खेल भी. खेल ऐसा क्षेत्र है जो हमारे देश का गर्व है और धर्म जाति व वर्ग सभी से परे है. अगर खेल में भी यही सोच डालनी है तो यह शर्मनाक है.
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