Mental Health: मैं 28 वर्ष का हूं और दिल्ली में रहता हूं. मैं एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटैंट की नौकरी करता हूं. औफिस में काम का दबाव बहुत ज्यादा है, समय पर काम खत्म नहीं हो पाता और बौस की अपेक्षाएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं. इस के कारण मैं मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करता हूं और घर पर भी चिड़चिड़ापन बना रहता है.
इस के अलावा, मुझे यह भी चिंता रहती है कि क्या मैं अपने कैरियर में सही दिशा में जा रहा हूं या नहीं. कई बार नौकरी छोड़ने का मन करता है, लेकिन आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण ऐसा कर नहीं पाता. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस स्थिति से कैसे बाहर निकलूं?
आप की स्थिति आज के समय में बहुत सामान्य होते हुए भी गंभीर है, क्योंकि लगातार काम का दबाव और बढ़ती अपेक्षाएं धीरेधीरे मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन पैदा कर देती हैं. यह सब आप की कमजोरी नहीं, बल्कि आप की परिस्थितियों का परिणाम है.
जब काम समय पर पूरा नहीं होता और ऊपर से बौस का प्रैशर बढ़ता है तो दिमाग हमेशा तनाव में रहता है और उस का असर घर के व्यवहार पर भी दिखने लगता है. इसलिए सब से जरूरी है कि आप अपने काम करने के तरीके में थोड़ा बदलाव लाएं. काम को छोटे हिस्सों में बांट कर करें, एकसाथ सबकुछ खत्म करने की कोशिश न करें और बीचबीच में छोटे ब्रेक जरूर लें, इस से दिमाग को आराम मिलेगा और काम की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.
इस के साथ ही, बौस से शांत तरीके से बातचीत करना भी जरूरी है ताकि आप को यह स्पष्ट हो सके कि कौन सा काम ज्यादा जरूरी है और किसे थोड़ा समय दिया जा सकता है.
जहां तक कैरियर की चिंता का सवाल है, अभी आप तनाव की स्थिति में हैं इसलिए हर चीज गलत लग रही है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप का कैरियर गलत दिशा में जा रहा हो. पहले यह सम?िए कि समस्या आप की नौकरी में है या आप के काम के माहौल में. अगर आप को अकाउंटिंग फील्ड पसंद है तो अपनी स्किल्स को बेहतर बना कर आप बेहतर अवसर पा सकते हैं और धीरेधीरे नई नौकरी के विकल्प भी तलाश सकते हैं, लेकिन बिना योजना के नौकरी छोड़ना सही कदम नहीं होगा, खासकर जब आर्थिक जिम्मेदारियां हों.
रिश्तेदारी और समाज में महत्त्व न मिलने से परेशान हूं.
मेरा बड़ा भाई कानपुर शहर में रहता है. वह मुझ से काफी ज्यादा संपन्न है. मैं 35 वर्ष का हूं और मैं भी कानपुर में अपने परिवार के साथ रहता हूं. मैं एक छोटा सा बिजनैस करता हूं जिस से घर का खर्च अच्छे से चल जाता है. भाई की अच्छी बड़ी कोठी है, महंगी गाड़ी है और समाज में उस की काफी पहचान भी है. जब भी हम किसी पारिवारिक समारोह या रिश्तेदारी में जाते हैं तो लोग मेरे बड़े भाई को ज्यादा महत्त्व देते हैं. उन की बातें ध्यान से सुनी जाती हैं, उन का सम्मान अलग स्तर पर होता है.
वहीं मुझे ऐसा महसूस होता है कि लोग मुझे उतनी अहमियत नहीं देते, भले ही मैं अपनी क्षमता के अनुसार ठीकठाक जीवन जी रहा हूं. मुझे यह बात अंदर ही अंदर परेशान करती है. मैं चाहता हूं कि रिश्तेदारी और समाज में मेरी भी एक अलग पहचान बने, लोग मुझे भी सम्मान दें और मेरी बातों को महत्त्व दें. कृपया बताइए कि मैं ऐसा क्या करूं जिस से मुझे भी समाज में उचित सम्मान और पहचान मिल सके?
जो आप महसूस कर रहे हैं वह बहुत स्वाभाविक है, खासकर तब जब तुलना अपने ही भाई से हो और सामने फर्क साफ दिखता हो लेकिन यहां एक जरूरी बात सम?ानी होगी- समाज में मिलने वाला सम्मान केवल पैसे या बड़ी कोठी से नहीं आता, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, सोच, आत्मविश्वास और लोगों के साथ उस के संबंधों से बनता है. आप के भाई की आर्थिक स्थिति बेहतर है, इसलिए लोगों का ध्यान स्वाभाविक रूप से उन की ओर जाता है, लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि आप के पास अपनी अलग पहचान बनाने का मौका नहीं है.
सब से पहले आप को अपने अंदर यह भावना मजबूत करनी होगी कि आप जो कर रहे हैं, वह भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है. अगर आप खुद को कम आंकेंगे तो लोग भी आप को उसी नजर से देखेंगे. जब आप किसी समारोह में जाएं तो अपनी बात आत्मविश्वास के साथ रखें, बातचीत में भाग लें और अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करें.
कई बार लोग उसी व्यक्ति को ज्यादा महत्त्व देते हैं जो खुद को आत्मविश्वास से प्रस्तुत करता है, चाहे उस की आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. इस के साथ ही, अपने व्यवहार पर भी ध्यान दें- मृदुभाषी होना, दूसरों की मदद करना और रिश्तों को निभाना ऐसी बातें हैं जो धीरेधीरे लोगों के दिल में आप की जगह बनाती हैं.
आप अपने क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर सकते हैं. अपने बिजनैस को थोड़ा और बेहतर बनाने, नई चीजें सीखने या समाज में किसी सकारात्मक काम (जैसे सामाजिक सेवा, किसी आयोजन में सक्रिय भूमिका) से जुड़ने से आप की अलग छवि बनती है. जब लोग आप को एक जिम्मेदार, समझदार और सहयोगी व्यक्ति के रूप में देखने लगेंगे तो सम्मान अपनेआप मिलने लगेगा.
सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सम्मान मांगने से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व और काम से कमाया जाता
है. शुरुआत खुद से करें- अपने आत्मविश्वास को बढ़ाएं, अपनी पहचान को मजबूत करें और लोगों के साथ सकारात्मक तरीके से जुड़ें. Mental Health
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