Astrology Scam: एस्ट्रोलौजी कमाई का धंधा है. एस्ट्रोलौजर बाकायदा विज्ञापन देते हैं, बड़े बोर्ड लगाते हैं, भरपूर पैसे लेते हैं ताकि लोगों का भविष्य सही करने के नाम पर वे ठगी कर सकें. धंधा लूट का है लेकिन धड़ल्ले से चल रहा है. सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे एस्ट्रोलौजर सक्रिय हैं जिन के लाखों फौलोअर्स हैं. भाग्य बदलने का यह बिजनैस ऊंचाइयों पर है. लूटने वाले बेशर्म हैं तो लुटने वाले लुटा कर खुश हैं. सवाल यह है कि क्या एस्ट्रोलौजी पूरी तरह झूठ और लूट का धंधा है या इस में कुछ सच्चाई भी है?

भारत में एस्ट्रोलौजी हमेशा से बड़ा धंधा रहा है लेकिन इंटरनैट के सहारे आज यह एक बड़ा कमर्शियल धंधा बन चुका है. भाग्य बदलने के नाम पर लाखोंकरोड़ों का कारोबार हो रहा है. धंधा कोई भी तब तक बुरा नहीं होता जब तक वह अपने ग्राहकों को फायदा पहुचाएं लेकिन इस धंधे में फायदा एकतरफा होता है. ग्राहकों को सिर्फ झूठ परोसा जाता है. इस के बावजूद भारत का एस्ट्रोलौजी मार्केट

60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो चुका है. डिजिटल प्लेटफौर्म्स, ऐप्स, सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने इसे और तेजी से बढ़ाया है.

धर्म ने इस धंधे पर शुरू से ही अपनी मोहर लगाई है क्योंकि धर्म खुद भविष्य बता कर भक्तों को फंसाता है. ज्योतिषी धर्म के मजबूत दलाल हैं.

कई एस्ट्रोलौजर बड़ेबड़े बोर्ड लगाते हैं, टीवी पर आते हैं सोशल मीडिया पर लाखों फौलोअर्स इन के हैं. कुछ सैलिब्रिटी एस्ट्रोलौजर के तो इंस्टाग्राम पर 1-2 मिलियन से ज्यादा फौलोअर्स हैं. यह लोग कंसल्टेशन, पूजापाठ, रत्न या यंत्र के नाम पर अच्छे पैसे वसूलते हैं. यह पूरी तरह से भाग्य बदलने का बिजनैस है, जहां लोग डर और उम्मीद के कारण लूटे जाते हैं. इन्हें इन के धर्मों ने भी बनाया है कि जो कुछ होना है उन के धर्म के ईश्वर की मरजी से होता है और कुछ लोग ही उस मरजी को पहले से जान सकते हैं. धर्मों ने ज्योतिषियों को खूब बढ़ावा दिया है क्योंकि इस से उन की काल्पनिक कहानियों को बल मिलता है.

इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर कई एस्ट्रोलौजर फ्री कंसल्टेशन दे कर ट्रस्ट बनाते हैं, फिर कुंडली में दोष, काला जादू और पूजापाठ के नाम पर हजारोंलाखों रुपए मांगते हैं. कई केस सामने आए हैं जिन में लोगों से 565 लाख रुपए तक ठगे गए हैं.

ज्योतिष कोई विज्ञान नहीं है. यह फार्च्यूनटैलिंग और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर ज्यादा टिका है. लोग अच्छी बातें सुन कर खुश होते हैं, बुरी सुन कर डरते हैं और उपाय के लिए पैसे देने को तैयार हो जाते हैं. उम्मीदों का खेल चलता है. लूटने वाले तो बेशर्म हैं ही, लुटने वाले भी कम बेशर्म नहीं क्योंकि ये लोग जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए शौर्टकट की तलाश में लगे रहते हैं.

मेहनत, शिक्षा या स्किल के जरिए बुरे वक्त को अच्छे में बदला जा सकता है, इस में किसी ज्योतिषी की जरूरत नहीं. राशिफल के नाम पर मूर्ख बनते लोग

सब से पहले आप यह जान लीजिए कि आज तक दुनिया का कोई भी ज्योतिष या एस्ट्रोलौजिस्ट तर्क और विज्ञान की कसौटी पर खुद को साबित नहीं कर पाया है, इसलिए एस्ट्रोलौजी या ज्योतिष एक अंधविश्वास के सिवा कुछ नहीं है. प्रतिदिन अखबारों में आप के व्यक्तिगत जीवन में कल क्या होगा, यह बताने वाला ज्योतिष उसी अखबार में कल देश में क्या होगा, क्यों नहीं बता देता? राशिफल की धूर्तता को सम?ाने के लिए हम एक दिन के राशिफल लेते हैं, अब उस में से 3 राशियों के बारे में ज्योतिषों ने क्या भविष्यवाणियां की हैं उन्हें देखते हैं.

1 मई, 2026 को दैनिक जागरण की वैबसाइट पर राशिफल आनंद सागर पाठक एस्ट्रोपत्री द्वारा दिए गए हैं. इन के अनुसार, 3 राशियों का ब्योरा कुछ इस तरह है.

मेष राशि

आज आप की राशि में सूर्यदेव की उपस्थिति से आत्मविश्वास सातवें आसमान पर रहेगा. ऊर्जा और साहस से कठिन कार्य सहजता से पूरे होंगे. निर्णय भावनाओं से प्रभावित हो सकते हैं. बुधदेव के अस्त होने से मानसिक भ्रम की स्थिति बन सकती है, इसलिए महत्त्वपूर्ण फैसलों में जल्दबाजी न करें.

कुंभ राशि 

तुला राशि के चंद्रमा भाग्य और उच्च शिक्षा के भाव को सक्रिय करेंगे. बड़ा विजन तैयार होगा और सोच आप को अलग पहचान दिलाएगी. भाईबहनों के साथ संवाद में कड़वाहट. यात्रा में सामान और दस्तावेजों का खयाल रखें.

तुला राशि

चंद्रदेव आप की राशि में गोचर कर रहे हैं. संवेदनशीलता और व्यक्तित्व निखरेगा. उपस्थिति से माहौल शांत और सुखद बनेगा. पार्टनर के साथ बातचीत में चुनौतियां. दूसरों को खुश करने में अपनी सेहत की अनदेखी न करें. व्यक्तिगत ब्रैंडिंग और विस्तार के लिए अच्छा दिन. मध्यस्थ की भूमिका निभा कर सहयोग बढ़ाएंगे. शुक्रदेव गहरे रिश्तों में स्थिरता लाएंगे. पार्टनर की जिद को धैर्य से संभालें. जौइंट ऐसेट्स या बीमा में प्रगति. मध्यम फलदायी दिन, निवेश में सतर्क रहें. पर्याप्त नींद लें. किडनी का खयाल रखें और तरल पदार्थ ज्यादा लें.

इन तीनों राशियों को आपस में बदल कर देख लीजिए, ये बातें ऐसी हैं कि किसी भी व्यक्ति को लगता है कि ये उसी के बारे में हैं. इस से यह साबित होता है कि राशि का गणित केवल लोगों को मूढ़ बनाने के लिए ही रचा गया है.

एक शोध में 10 लोगों को चुना गया, फिर उन सभी को अकेले एक कमरे में एक एस्ट्रोनौमर से मिलवाया गया. उस ज्योतिष ने सब को अलगअलग एकएक परचा थमा दिया. जब उन 10 लोगों ने अपनेअपने परचे को पढ़ा तो वे हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि परचे में जो भी बातें लिखी हैं वे बिलकुल जैसे उन के जीवन की कहानी हों लेकिन जब उस परचे का रहस्य खोला गया तब वे हक्केबक्के रह गए. असल में उन सभी के अलगअलग परचों में जो 10-10 बातें लिखी थीं वे सभी के परचे में एकसमान थीं जो उन्हें पता नहीं था. सब को यही लगता था कि उन के परचे में लिखी बातें सिर्फ उन्हीं के बारे में हैं.

इस के पीछे का मनोविज्ञान यह होता है कि सभी मनुष्य अंदर से लगभग एकजैसे ही होते हैं. समस्याएं सब के पास होती हैं, मजबूरियां होती हैं, जिम्मेदारियां होती हैं, उम्मीदें और कोई न कोई महत्त्वाकांक्षा भी सभी के पास होती ही है. इंसान इन सभी बातों से उम्रभर जूझता है, इसलिए बहुत से मामलों में इंसान की परिस्थितियां एकजैसी होती हैं. इंसान के इसी मनोविज्ञान का फायदा एस्ट्रोलौजर उठाते हैं.

अगर ज्योतिषी आप से कहता है कि आप दिल के बहुत साफ इंसान हैं लेकिन कोई आप को समझता नहीं तो आप को यह बात अपने ऊपर 100 प्रतिशत फिट लगेगी लेकिन दुनिया में शायद ही ऐसा कोई इंसान हो जिस पर यह बात फिट न बैठे. ज्योतिषियों की सभी बातें ऐसी ही होती हैं. यही है ज्योतिष या एस्ट्रोलौजी की हकीकत. भविष्यवक्ता लोगों के भविष्य को बताने का पाखंड रचने के लिए ऐसी ही गोलमोल बातों का इस्तेमाल करते हैं और सदियों से करते रहे हैं.

नास्त्रेदमस की झूठी भविष्यवाणियों का सच

इंसान के इसी मनोविज्ञान का फायदा नास्त्रेदमस ने भी उठाया. वर्ष 1503 में फ्रांस के एक यहूदी परिवार में जन्मे माइकल डी नारदम जो बाद में नास्त्रेदमस के नाम से प्रसिद्ध हुए. नास्त्रेदमस जिस काल में पैदा हुए वह सामाजिक क्रांति का दौर था. रूढि़यां टूट रही थीं. धर्म की संस्थापनाओं पर सवाल खड़े किए जा रहे थे. चर्च की सत्ता को चुनौती मिल रही थी. इतिहास में 16वीं सदी का यह दौर बहुत ही क्रांतिकारी और परिवर्तनशील साबित हुआ क्योंकि इस दौर में कई महान लोग पैदा हो चुके थे. यह पुनर्जागरण का काल था. कोलंबस, लियोनार्डो, दा विंची जैसे लोग दुनिया की नई व्याख्याएं लिख रहे थे.

ऐसे ही दौर में एक धनी परिवार में नास्त्रेदमस पैदा हुए थे. 14 वर्ष की उम्र में उन्हें मैडिसिन की पढ़ाई के लिए भेजा गया और 21 वर्ष की आयु में वे एक अच्छे फिजिशियन बन कर लौटे. जिस समय वे डाक्टर बने उस समय फ्रांस में प्लेग की महामारी फैली थी. नास्त्रेदमस ने अपनी मैडिकल योग्यता से अनेक लोगों को ठीक किया. दूरदूर से लोग उन के पास आने लगे. उसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें मसीहा कहना शुरू कर दिया.

धीरेधीरे प्लेग का असर कम हुआ लेकिन लोगों ने मसीहा बता कर एक अच्छेखासे डाक्टर को मसीहा बनने पर मजबूर कर दिया और मसीहा बनने के चक्कर में नास्त्रेदमस ने अपनी उसी मैडिकल की कला को ही दांव पर लगा दिया जिस की वजह से लोगों ने उन्हें मसीहा साबित किया था.

नास्त्रेदमस काला जादू और ज्योतिष जैसी फुजूल बातों के चक्कर में पड़ गए और लोगों के भविष्य बांचने लगे. उन्होंने अपना वार्षिक पंचांग चालू किया. रात में अकेले बैठ कर बाबागीरी वाली नौटंकी करते और दिन में बताते कि उन के ऊपर रात में ईश्वर की कृपा होती है और ईश्वर उन के माध्यम से भविष्य की बातें बताता है. नास्त्रेदमस की इस तरह की नौटंकी पर कई लोगों ने यकीन भी कर लिया और उन्हें प्रोफेट यानी भविष्यवक्ता भी मानने लगे. प्लेग वापस लौटा और नास्त्रेदमस की बीवी और बच्चे इस महामारी का शिकार हो कर मर गए. इस से नास्त्रेदमस को प्रोफेट मानने वाले बहुत से लोगों का भ्रम भी टूट गया. कहने लगे यह कैसा रसूल है जो अपने बीवीबच्चों को ही नहीं बचा पाया.

इस हादसे के कई वर्षों बाद तक नास्त्रेदमस शांत रहे, दोबारा डाक्टरी का पेशा अपना लिया और एक अमीर लड़की से दूसरी शादी कर ली. बच्चे भी हुए. बुढ़ापे में उन में एक बार फिर से ज्योतिष की सनक जाग गई. इसी सनक में उन्होंने एक किताब लिखी ‘द प्रोमिसेस’. इस किताब में उन्होंने कोई बात स्पष्ट नहीं लिखी बल्कि ज्योतिष की बड़ीबड़ी डींगें मारने के लिए उन्होंने बेसिरपैर के दोहे गढ़ दिए. अपनी बातों को रहस्यपूर्ण बनाने के लिए उन्होंने अजीबोगरीब छंदों का सहारा लिया.

इस किताब में नास्त्रेदमस की कोई भी बात समय और तारीख के साथ नहीं है, इसलिए नास्त्रेदमस की एक ही बात को कई अलगअलग घटनाओं से जोड़ दिया जाता है. साथ ही, किसी भी घटना को नास्त्रेदमस की भविष्वाणी में साबित करने वाले लोग उन की बातों में फेरबदल करने से भी नहीं चूकते.

दुबई में खुली बड़ेबड़े एस्ट्रोलौजरों की पोल

दुबई की चमकतीदमकती दुनिया में जहां ऊंची इमारतें आकाश को छूती हैं और लग्जरी कारें सड़कों पर दौड़ती हैं, 28 फरवरी, 2026 को एक अनोखा समारोह हुआ. भारत के दिग्गज ज्योतिषी ‘इंटरनैशनल एस्ट्रोलौजी फैस्टिवल’ में दुबई पहुंचे थे. ये वे तथाकथित प्लैनेट्स के एक्सपर्ट थे जो मार्स, जुपिटर और सैटर्न की चाल देख कर राजनेताओं से ले कर बौलीवुड सितारों तक का भविष्य बता देते हैं लेकिन यही महान लोग खुद अपना भविष्य नहीं जान पाए और ऐसे संकट में फंसे कि कई दिनों तक भारत वापस आने के लिए बेचैन रहे.

दुबई में आयोजित ‘इंटरनैशनल एस्ट्रोलौजी फैस्टिवल’ में भारत के डीग जिले से ले कर दिल्लीमुंबई तक के नामी ज्योतिषी इकट्ठा हुए थे. मंच सजा हुआ था. ग्रहों की चाल पर व्याख्यान दिए जा रहे थे. शनि की साढ़ेसाती पर बहसें जारी थीं और राहुकेतु के प्रभाव से बच निकलने के टोटके बताए जा रहे थे.

कुछ ज्योतिषी ने ग्लोबल वार्मिंग को मर्करी यानी बुध ग्रह से जोड़ा तो कुछ ने विश्व शांति के लिए ग्रहों को कंट्रोल करने के उपाय सुझाए लेकिन भविष्य को देखने वाले इन एस्ट्रोलौजर्स को यह नजर ही नहीं आया कि अगले ही दिन उन का अपना भविष्य प्लैनेट्स नहीं ईरान की मिसाइलें तय करेंगी. एक ज्योतिषी तो इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने कहा विश्व में शांति आएगी क्योंकि ग्रह कभी झूठ नहीं बोलते लेकिन ग्रहों ने उन से ही नाराजगी जता ली.

उसी शाम इजराइल और अमेरिका ने ‘रोरिंग लायन’ के तहत ईरान पर हमला बोल दिया. ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की खबर फैली और जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों व ड्रोन हमलों का सैलाब छोड़ दिया जो इस लेख के प्रकाशित होने तक चल रहा है और अमेरिका और इजराइल के साथ दुबई के पसीने भी छूटे हुए हैं.

29 फरवरी की सुबह दुनिया का सब से व्यस्त हवाईअड्डा दुबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट पूरी तरह बंद कर दिया गया. मिसाइलों की दहशत के कारण सारे एयरपोर्ट बंद कर दिए गए. पूरा खाड़ी इलाका ‘नो फ्लाई जोन’ में बदल गया. हजारों यात्री फंस गए. इन में वे तमाम ज्योतिषी शामिल थे जो कल तक दूसरों का भाग्य सुधारने का दावा कर रहे थे. भारत के महान ज्योतिषी अब दुबई के होटलों में कैद हो गए. इन ज्योतिषियों की कुंडली होटलों के कमरों में कुंडली मार कर बैठ गई. ग्रहों ने तो भविष्य बता दिया था लेकिन इन के अपने चश्मे में धुंध थी.

यह घटना ज्योतिष की दुनिया में एक मजाक बन गई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक ‘ट्रैवल एस्ट्रोलौजर’ ईरानी हमलों से ठीक पहले मिडिल ईस्ट को ‘हौटबेड औफ कौन्फ्लिक्ट’ बता रही थी लेकिन अब यह ‘हौटबेड’ इन्हें खुद ही भुगतना पड़ा. बाद में एयरपोर्ट धीरेधीरे खुले और ये ज्योतिषी वापस लौटे पर फिर ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर पर हमले शुरू कर दिए कि वहां अमेरिकी सेना के अड्डे हैं. सवाल यह है, क्या इस घटना से ये लोग सुधर जाएंगे? जनता की आंखें खुलेंगी?

ज्योतिष के नाम पर औरतों का शोषण

ज्योतिष पर अंधविश्वास करने वाले लोग कहते हैं कि ग्रहनक्षत्र सबकुछ तय करते हैं लेकिन जब ज्योतिषी खुद फंसते हैं या उन के असली चेहरे सामने आ जाते हैं तो उन की इस फर्जी विद्या की पोल अपनेआप खुल जाती है. इस से साफ पता चलता है कि यह सब अंधविश्वास और धोखे का खेल है.

मार्च 2026 में महाराष्ट्र के नासिक में एक मशहूर ज्योतिषी अशोक खरात को पुलिस ने गिरफ्तार किया. यह शख्स महिलाओं को समस्या हल करने के नाम पर बुलाता था, उन के साथ शारीरिक संबंध बनाता था. उस के औफिस और फार्महाऊस में छिपे कैमरे लगे थे. पुलिस को पेनड्राइव मिली जिस में 60 से ज्यादा औरतों के साथ अशोक खरात के अश्लील वीडियो थे. उस ने कई महिलाओं को ड्रग्स दे कर या डरा कर बारबार शोषण किया.

अशोक खरात के राजनीतिक लोगों और सैलिब्रिटीज से भी अच्छे संबंध थे. ज्योतिष के नाम पर लोगों का विश्वास जीत कर वह औरतों का शोषण करता था और मर्दों से धन ऐंठता था. जब एक महिला ने पुलिस से शिकायत की तो पूरा खेल खुल गया. यहां सवाल यह है कि यह इतना ही बड़ा ज्योतिषी था तो गिरफ्तार क्यों हुआ? कोई औरत उस की पोल खोल देगी, यह बात उसे पता क्यों नहीं चली? उसे पता होता कि उस के अश्लील वीडियोज पुलिस के हत्थे चढ़ सकते हैं तो वह ऐसे वीडियोज बनाता ही क्यों?

मार्च में पाकिस्तान पर हमले की भविष्यवाणी

मार्च 2026 में एक फेमस महिला ज्योतिषी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया कि 21 मार्च, 2026 को भारत पाकिस्तान पर हमला करेगा. उन्होंने इस वीडियो में कहा कि पूरा योग है, इसलिए हमला तय है. उन्होंने लोगों को कैश, दवा, राशन स्टौक करने की सलाह दी. उन्होंने वीडियो में ईरान के बाद पाकिस्तान की बारी जैसी बातें कहीं. 21 मार्च आया और गया. कोई हमला नहीं हुआ. उस तारीख पर न कोई युद्ध और न ही कोई बड़ा टकराव हुआ. तारीख निकल जाने के बाद मैडम ने वीडियो डिलीट भी कर दिया.

मार्च से मई के बीच देश में कितनी ही बड़ी दुर्घटनाएं हुईं. कहीं नाव डूबी, कहीं भयंकर ऐक्सिडैंट हुए तो कहीं भयंकर आग में कई लोगों की जानें गईं लेकिन इन दुर्घटनाओं के बारे में किसी भी ज्योतिषी ने कोई भविष्यवाणी नहीं की. अगर ज्योतिष सच्चे होते तो उन्हें हर बड़ी दुर्घटना से पहले सटीक तारीख और घटना बतानी चाहिए लेकिन ऐसा कभी नहीं होता. पहले ये जमींदारों और अमीरों को लूटने का हथकंडा था, अब एस्ट्रोलौजी, बस, डर फैलाने और वायरल होने का जरिया बन गया है.

मार्च और अप्रैल में आर्थिक संकट व युद्ध के नाम पर कई ज्योतिषियों ने बड़ेबड़े दावे किए थे लेकिन सारे दाव टायंटायं फिस्स हो गए. राशिफल के नाम पर भी खूब मूर्ख बनाया जाता है. लाखोंकरोड़ों लोगों पर एकजैसी अटकलें लगाई जाती हैं जिन में कुछ तो मैच हो ही जाती हैं. यह संयोग है, सिद्धि नहीं.

एस्ट्रोलौजी और एस्ट्रोनौमी का फर्क

यूनिवर्स को समझने का बस एक ही मौडर्न तरीका है वह है एस्ट्रोनौमी. यह तथ्यों, प्रमाणों और साइंटिफिक रिसर्च पर टिका हुआ है लेकिन इतिहास में बंद कमरे में बैठे कुछ धूर्तों ने एस्ट्रोलौजी की ईजाद की जो ग्रहों की स्थिति से डरा कर लूटने का जरिया बन गई. एस्ट्रोनौमी वह है जिस के विकास के लिए गैलीलियो और कौपरनिकस जैसे लोगों ने यातनाएं सही और जियोर्दानो ब्रूनो जैसे लोगों को जिंदा जला दिया गया.

एस्ट्रोनौमी वह विज्ञान है जिस के तहत इंसान चांद पर पहुंचा और सौरमंडल से आगे निकला. स्पेस में तैनात हब्बल टैलीस्कोप हो या जेम्स वैब टैलीस्कोप, सभी एस्ट्रोनौमी की तरक्की की मिसाल हैं. धरती, उपग्रह, ग्रह, सुदूर के सौरमंडल, गैलेक्सी और यूनिवर्स की तमाम जानकारियां एस्ट्रोनौमी ने दी हैं लेकिन यूनिवर्स की इस खोज में एस्ट्रोलौजर का योगदान क्या है? एस्ट्रोलौजी का आप के भूत, वर्तमान, भविष्य आदि से कुछ लेनादेना नहीं है.

एस्ट्रोलौजी धूर्तों के दिमाग की उपज है. यह लोगों की कमजोरियों का फायदा उठा कर धन कमाने का धंधा है. जहां एस्ट्रोनौमी हमें आकाशगंगाओं की गहराई, ब्लैक होल्स और जीवन की उत्पत्ति के कारणों से रूबरू कराती है वहीं, एस्ट्रोलौजी ग्रहों की स्थिति से भविष्य बताने का जुमला मात्र है. ज्योतिष को किसी वैज्ञानिक परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ती. जितने ज्योतिष उतने सिद्धांत. सब की अलग ढपली और अलग राग हैं. जो जितना बड़ा झूठ बोल सकता है वह उतना ही बड़ा एस्ट्रोलौजर है. असल में एस्ट्रोलौजी कोई प्राचीन ज्ञान नहीं बल्कि मानव मन की भ्रमपूर्ण कमजोरी के शोषण का जरिया है.

एस्ट्रोनौमी आधुनिक विज्ञान का एक मजबूत स्तंभ है. यह टैलीस्कोप, स्पैक्ट्रोस्कोपी और मैथमैटिकल मौडलों से यूनिवर्स को सम?ाने का तरीका है. 2023 में जेम्स वैब स्पेस टैलीस्कोप ने यूनिवर्स के शुरुआती मूवमैंट के नए डेटा भेजना शुरू किए जिस से बिगबैंग थ्योरी और ज्यादा मजबूत हुई. एस्ट्रोनौमी हमें बताती है कि ब्रह्मांड कोई जादुई रचना नहीं बल्कि प्राकृतिक नियमों का परिणाम है.

कार्ल सागन ने कहा था, ‘एस्ट्रोनौमी हमें ब्रह्मांड की सच्ची तसवीर देता है न कि कल्पनाओं की. यह हमें सशक्त बनाता है क्योंकि यह भविष्यवाणी नहीं देता बल्कि यूनिवर्स की समझ प्रदान करता है.’

एस्ट्रोलौजी प्राचीन बेबीलोनियन और यूनानी काल की उपज है जो जबरदस्ती ग्रहों को मानव जीवन से जोड़ती है. एस्ट्रोलौजी कोई विज्ञान नहीं बल्कि तब से चले आ रहे धूर्त ज्योतिषियों का धंधा है. वे कुंडली या राशिफल के नाम पर लोगों की आशाओं, अज्ञानता और उन के डर को कैश करवाते हैं.

रिचर्ड डाकिंस ने कहा था कि एस्ट्रोलौजी पोस्ट होक पर टिकी है. किसी भी घटना के बाद इसे फिट किया जा सकता है. आज तक यह किसी डबलब्लाइंड परीक्षण में सफल नहीं हुई. यह धूर्तों की उपज, इसलिए है क्योंकि यह बिना प्रमाण के पैसे वसूलती है. कुंडली या ग्रहों से बचाव के नाम पर लाखों लोग ज्योतिष के जाल में फंसते हैं.

धोखा है एस्ट्रोलौजी

2024 में कई तथाकथित महान ज्योतिषियों ने ग्लोबल घटनाओं के बारे में भविष्यवाणियां की थीं लेकिन सभी फेल हुए. अमेरिकी चुनावों के दौरान कई एस्ट्रोलौजर्स ने ‘ग्रहों की स्थिति’ के आधार पर डोनाल्ड ट्रंप की हार की भविष्यवाणी की लेकिन परिणाम उलटे आए. 2024 में कई ज्योतिषियों ने कहा था कि 2025 तक एलियन से संपर्क होगा. कुछ ने एआई तख्तापलट की बात की थी तो कुछ ने किसी बड़ी सुनामी की बात की थी. रूसयूक्रेन युद्ध हो या भारतपाकिस्तान के बीच का तनाव, ज्योतिष भविष्यवाणियां हर मामले में गलत ही रहीं.

एस्ट्रोलौजी न केवल धोखा है बल्कि मानव की तरक्की का दुश्मन भी है. यह जिम्मेदारी से दूर भागने का उपाय है. मंगल दोष के नाम पर न जाने कितनी शादियां टूट जाती हैं तो शनि साढ़ेसाती के चक्कर में लोग बरबाद होते हैं. कार्ल सेगन कहते हैं कि, ‘असाधारण दावों के लिए असाधारण प्रमाण चाहिए’ लेकिन एस्ट्रोलौजी के पास कोई प्रमाण नहीं. बिना किसी सुबूत के ज्योतिषी ग्रहों की चालढाल तय करते हैं और अमीरों से ले कर आम आदमी तक को लूटते हैं.

ज्योतिषियों की भरमार होते हुए भी देश पर आपदाएं आती हैं. आतंकी हमले होते हैं. तब कोई ज्योतिषाचार्य देश के काम नहीं आता. ऐसी किसी भी आपदा में सारे ज्योतिषी बिलों में छिप जाते हैं.

ज्योतिष से कोई देश आगे नहीं बढ़ता. देश आगे बढ़ता है स्वस्थ विचारों से और स्वस्थ विचारों का मतलब यह है कि समाज कितना वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता है. जिस समाज में जिस अनुपात में साइंटिफिक टैंपरामैंट होता है वह समाज वैचारिक रूप से उतना ही स्वस्थ होता है लेकिन एक बीमार ?समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता. सब से ज्यादा ज्योतिष भारत में हैं, फिर भी गरीबी, भुखमरी और खुशहाली के पैमाने पर हम सब से फिसड्डी हैं.

एस्ट्रोलौजर गिरोह बना कर काम करते हैं. कुछ किसी घटना के होने की भविष्यवाणी करते हैं, कुछ उस की उलटी भविष्यवाणी करते हैं. उन में से एक को तो सही होना ही है. दोनों में जो सही निकला, उस की बात दोहरा कर वे अपना धंधा चलाते हैं. सभी धर्मों में भविष्य की डींगें हांकी गई हैं लेकिन धर्मप्रचारक और ज्योतिषी उन बातों को छिपा जाते हैं. वे जानते हैं कि मूर्ख भक्त कहां इन ग्रंथों को पढ़ने वाले हैं. Astrology Scam

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