Hindi stories: इस एआई के जमाने में कल देररात तक चैट जीपीटी से बात होती रही. इस बीच में कब आंख लग गई, पता नहीं चला. नए वर्ष की पहली सुबह मेरे बिस्तर के बगल में रखे ‘सुपर इंटैलिजैंस स्मार्ट स्पीकर’ से आवाज आ रही थी- ‘गुडमौर्निंग सर, आज नववर्ष का पहला दिन है. आज का तापमान भी सामान्य है, आप को सुबह मौर्निंग वाक पर जाना है.’
मैं बिस्तर छोड़ कर उठ बैठा. कल ही रात में मैं ने सोते समय सोच लिया था कि इस नए वर्ष में अपनी सेहत के प्रति बेहद संवेदनशील रहूंगा. मैं ने मन ही मन एआई का स्मरण किया और अपने स्मार्ट स्पीकर को थैंक्स कहा. ?ाटपट तैयार हो कर मौर्निंग वाक पर निकल गया. घर छोड़ते ही मेरा स्मार्ट डोर औटोमैटिक लौक हो गया. मैं देख रहा हूं कि इस एआई के जमाने में मेरे साथ मेरा घर भी पूरी तरीके से हाईटैक है. दीवारों में संवेदनाएं हैं. दरवाजे चिंतन करते हैं. लाइट मूड सम?ाती है. इस स्मार्टनैस से मन बड़ा प्रसन्न है.
एआई अब मन को छू रहा है. अब मेरा दिल भी शायद चारदीवारी एवं डिवाइस में चहलकदमी कर रहा है. हाईटैक डिवाइस मेरी जीवनशैली को एडजस्ट कर रहा है. सुविधा मिलती है, समय की बचत होती है. इस तरीके से मेरे भीतर ऊर्जा भी सेफ हो रही है. मैं देख रहा हूं, धीरेधीरे मेरा सोना, खाना व डेली रूटीन का डाटा अब माइक्रोसौफ्ट तैयार कर रहा है. स्मार्ट स्पीकर वायस कमांड करता है और मैं सक्रिय हो जाता हूं.
अपने निजी जीवन में एआई के दखल से मन प्रफुल्लित होता जा रहा है. लगातार आत्मविश्वास बढ़ रहा है. मेरे हाथ में स्मार्टवाच थी, उस ने संकेत देना शुरू किया, ‘सर, यहां से नवासी कदम दूर गांधी पार्क है, उस की तीसरी बैंच अभी खाली है. वहां आप खुली हवा में.
मेरे कदम तेज हो गए. संवादों की यह टैक्नोलौजी मु?ा को निरंतर स्मार्ट बनाते जा रही थी. मैं इस स्मार्ट कम्युनिकेशन के निर्देश पर अब गांधी पार्क पहुंच चुका था. मेरे सोचने का काम और निर्देश देने का काम एआई ने संभाल लिया है, इसलिए मैं ने अब सोचना बंद ही कर दिया है. मेरे पहुंचने के पहले पार्क की तीसरी बैंच पर 2 बुजुर्ग बैठे हुए थे.
मेरी स्मार्टवाच का सैंसर फिर जाग उठा. उस ने कहा- पार्क के छोटे गेट के बाहर एक बैंच खाली है. मैं ने ज्यादा दिमाग नहीं लगाया. दिमाग लगाने का काम स्मार्टवाच कर रही थी. उस खाली बैंच में मैं जैसे ही बैठा, स्मार्टवाच ने कहा, ‘सर, आप के मूड को फ्रैश करने के लिए कोई गाना लगाऊं क्या?’ मैं ने बिना सोचेसम?ो कह दिया, ‘लगाओ.’ वह रोबोटिक अंदाज में कुछ गुनगुना रहा था.
बाहर शोर बहुत अधिक था मु?ा को सुनने में असुविधा हो रही थी. मैं ने वह बैंच भी छोड़ दी, उठ खड़ा हुआ. उस ने फिर कमांड किया, ‘सर, पार्क के मेन गेट के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे एक चबूतरा है, वहां बैठ सकते हैं. उस के कमांड को फौलो करते हुए मैं पार्क से बाहर आने लगा तो देखा, पार्क के दाईं ओर की 2 बैंच तो खाली थीं पर मेरी स्मार्टवाच ने पीपल के पेड़ के चबूतरे में बैठने का सु?ाव दिया था. तो, मैं उस खाली बैंच को छोड़ कर इसी चबूतरे पर आ गया.
योग करने के लिए जैसे ही मैं चबूतरे पर पालथी मार कर बैठने वाला था कि उस ने कहा, ‘सर, योग के पहले कहिए तो आप का ब्लडशुगर रिपोर्ट और बीपी शो कर दूं?’
मैं ने कहा, ‘शो कर दो.’
उस ने कहा, ‘सर, रात में आप ने चावल, आलू और मैदा की चीजें खाई थीं. रिपोर्ट में डाउट है.
कहिए तो शुगर लैवल शो कर दूं?’
‘कर दो, मेरे हमसफर,’ मैं ने मुसकराते हुए कहा.
तभी मेरी स्मार्टवाच से बीप बीप की आवाज आने लगी. वह मेरा शुगर लैवल नाप रहा था.
‘सर, आप डायबिटिक हैं. अचार, चटनी, पापड़ के साथ नमक से भी परहेज करें.’
‘यह कैसे हो सकता है पिछले महीने ही मैं ने फुल बौडी चैकअप कराया, सबकुछ नौर्मल था,’ मैं बुदबुदाया.
यह स्मार्टवाच का कथन था. यह क्या गलत बोलेगी, मैं ने सोचा, फिर चिंतित हो ऊठा, ‘एक साथ दोदो रोग उभर गए. अब क्या होगा. मैं घबरा उठा. इसी घबराहट में मेरी नींद खुल गई. मैं तो अभी बिस्तर पर था. बड़ा गजब का हाईटैक स्वप्न देख रहा था. एक गहरी ठंडी संतोष की सांस ली. अच्छा हुआ, यह सपना ही था.
नए वर्ष में मौर्निंग वाक का संकल्प था ही मेरा. फटाफट तैयार हो कर, मैं ने अपनी जबलपुर शादी वाली घड़ी निकाली. वह इतने वर्षों बाद भी दुरुस्त है. एकदम परफैक्ट टाइम दे रही है. उस घड़ी के पहनते ही परिवार के सारे आत्मिक रिश्ते याद आने लगे. मैं तेज कदमों से पार्क की ओर चला जा रहा था. पार्क की बैंच पर बैठ कर मैं ने एक बार उसी घड़ी को आत्मिक दृष्टिकोण से निहारा. मेरे हाथ में जो घड़ी थी, वह अब किसी ‘सुपर इंटैलिजैंस स्मार्टवाच’ से कम नहीं लग रही थी. Hindi Stories





