Nepal Politics Reform: बालेंद्र शाह उर्फ बालेन का उदय नेपाल की पारंपरिक राजनीति के विरुद्ध जनाक्रोश का परिणाम है. एक स्वतंत्र छवि वाले नेता के रूप में बालेन ने जिस तेजी से पूर्व प्रधानमंत्रियों और उद्योगपतियों के भ्रष्ट कारनामों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारियां शुरू करवाई हैं, यह संकेत है कि वे सिस्टम को झकझोरने की मंशा रखते हैं.

सत्ता संभालते ही बालेन ने नेपाल के चार पूर्व प्रधानमंत्रियों – केपी शर्मा ओली, पुष्पकमल दहल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और माधव कुमार नेपाल की संपत्तियों की जांच का आदेश जारी कर दिया है. चार पूर्व प्रधानमंत्रियों को एक साथ जांच के दायरे में लाना एक असाधारण साहसिक, किंतु जोखिमपूर्ण दांव है. इन के साथ ही उद्योगपति दीपक खडका की गिरफ्तारी ने बालेन के अभियान को और गंभीर और व्यापक बना दिया है.

नेपाल में लंबे समय से यह चर्चा है कि सत्ता में बैठे नेता अपने पद का उपयोग सिर्फ निजी संपत्ति अर्जित करने के लिए करते रहे हैं. जबकि नेपाल की आम जनता भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता से परेशान है. 70 फीसदी नेपाली युवा दो वक्त की रोटी के लिए पड़ोसी देशों में वैध और अवैध तरीकों से पलायन करते हैं. पूर्व की सरकारों ने न तो बच्चों की शिक्षा और न ही युवाओं को रोजगार के क्षेत्र में कोई ठोस कार्य किया. अब बालेन शाह ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलावों की घोषणा की है. उन्होंने कालेज व यूनिवर्सिटियों में छात्र राजनीति को खत्म करने के साथ पांचवीं कक्षा तक कोई परीक्षा न करवाने का ऐलान किया है. शिक्षा को ज्यादा समावेशी बनाना, कालेज कैम्पस को राजनीति की गंदगी से मुक्त करना और पढाई की गुणवत्ता को बढ़ाने की दिशा में कार्य शुरू हो गए हैं. भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने के लिए बालेन ने सीधे ऊपर पायदान से सफाई शुरू की है.

देश के भ्र्ष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई से एक उम्मीद जरूर जगी है कि शायद अब व्यवस्था में बदलाव आए. लेकिन जांच का कोई ठोस निष्कर्ष जल्दी नहीं निकला तो जनता की उम्मीद निराशा में बदल सकती है. जांच में देरी से राजनीतिक अस्थिरता भी बढ़ सकती है. गौरतलब है कि नेपाल पहले ही गठबंधन की जटिल राजनीति, दल-बदल और वैचारिक टकराव से जूझ रहा है. ऐसे में बालेन शाह के सामने सब से बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की है. एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और दूसरी तरफ राजनीतिक स्थिरता इन दोनों के बीच यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हो, किसी भी प्रकार का सिलेक्टिव टारगेटिंग न हो और पारदर्शिता बनी रहे ताकि जनता का विश्वास कायम रहे. Nepal Politics Reform

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