Action Drama Movie: यह एक सैनिक के जीवन पर आधारित ऐक्शन ड्रामा फिल्म है. वर्ष 2023 में मराठी फिल्म ‘सुभेदार’ आई थी. यह ऐतिहासिक फिल्म तानाजी मालसारे के जीवन पर आधारित थी. 2018 में 962वें भारत-चीन युद्ध के नायक पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘सूबेदार जोगिंदर सिंह 2018 में रिलीज हो चुकी है.’

फौज से सेवानिवृत्त फौजियों को अकसर तेजी से बदलती दुनिया में नागरिक जीवन में ढलने के लिए संघर्ष करना पड़ता है. अकसर वे स्थानीय भ्रष्टाचार और सिस्टम का शिकार बनते हैं. मजबूर हो कर उन्हें अपने परिवार की रक्षा के लिए सेना के अनुशासन और युद्ध कौशल पर भरोसा करना पड़ता है.

इस विषय पर 80-90 के दशक में कई फिल्में आ चुकी हैं. उस समय गरीबों के हकों के लिए लड़ने वाले और एक ही समय में 10-20 गुंडों को ढेर करने वाले हीरोज का बोलबाला था. दर्शकों को उस समय ऐसे एंग्रीयंगमैन वाले नायक खूब पसंद आए. अनिल कपूर इस तरह की भूमिकाएं 80 के दशक में निभाया करता था, इस फिल्म में रिटायर्ड फौजी के रोल में वह दोबारा से लौटा है और समाज में फैली बुराइयों से उसे लड़ता हुआ देखा जा सकता है.

कहानी रिटायर्ड आर्मी अफसर सूबेदार अर्जुन सिंह (अनिल कपूर) के इर्दगिर्द बुनी गई है, जो बरसों बाद मध्य प्रदेश के एक कसबे में अपनी बिखरी जिंदगी समेटने को लौटा है. श्यामा (राधिका मदान) कालेज गर्ल है और अपनी मां (खुशबू) की ऐक्सिडैंट में हुई मौत से सदमे में है. अर्जुन का दोस्त प्रभाकर (सौरव शुल्ला) उसे इलाके के दबंग सौफ्टी (फैसल मलिक) और प्रिंस (आदित्य रावल) के पास ले जाता है. ये दोनों रेत माफिया से जुड़े हैं. इस नैटवर्क की असली सरगना दीदी (मोना सिंह) जेल में बंद है और वहीं से अवैध कारोबार चलाती है.

अर्जुन इस अराजकता और सिस्टम की बदहाली से वाकिफ है. उधर श्यामा को भी कालेज में गुंडागर्दी का सामना करना पड़ता है. एक दिन बिगड़ैल प्रिंस अर्जुन की जिप्सी को नुकसान पहुंचाता है. यह अपमान अर्जुन को झकझोर देता है. वह रेत माफिया के इन दरिंदों के खिलाफ जंग छेड़ देता है. रेत माफिया श्यामा का अपहरण कर लेते हैं और अर्जुन के दोस्त प्रभाकर की हत्या कर देते हैं. मगर अर्जुन प्रिंस का खात्मा कर देता है. प्रिंस के मरने के बाद ही नकली दीदी का वर्चस्व भी खत्म हो जाता है. अर्जुन और उस की बेटी श्यामा के बीच का रिश्ता सुधर जाता है.

क्लाइमैक्स में नाना पाटेकर का एक सरप्राइज कैमियो है जो पूर्व सैनिकों की एक टीम के नेता के रूप में अर्जुन की मदद करता है.

अंत में फिल्म के सीक्वल बनने का इशारा कर दिया गया है. निर्देशक ने फिल्म में जम कर मसाले डाले हैं. फिल्म का मध्यांतर से पहले का भाग तेजतर्रार है, मध्यांतर के बाद कहानी निखर जाती है. छोटे कसबे की धूलधक्कड़ और बेतरतीब लाइफ को विश्वसनीय तरीके से दिखाया गया है.

सिनेमेटोग्राफी अच्छी है. ‘लल्ला…’ और ‘बलम सूबेदार…’ गाने अच्छे बन पड़े हैं. अनिल कपूर का काम बढ़िया है. खौफनाक प्रिंस की भूमिका में आदित्य रावल जंचा है. राधिका मदान का काम भी ठीकठाक है. मोना सिंह ने अपने किरदार के साथ न्याय नहीं किया है. Action Drama Movie

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