SIR Process: संविधान ने वोटर को वोट देने का कानूनी हक दे रखा  है. एसआईआर प्रक्रिया के जरिए उन को वोट देने से रोक दिया गया. एसआईआर बिहार से ले कर पश्चिम बंगाल तक विवादों के घेरे में रही है. ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष कैसे मानी जा सकती है? अदालत तक चुनाव आयोग की इस मनमानी पर मूकदर्शक बनी रही और नतीजा, चुनाव आयोग के धुएं में बंगाल हार गया.

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने चुनाव प्रक्रिया की खामियों को उजागर कर दिया है. संविधान बनाने वालों ने कभी सोचा नहीं होगा कि सत्ता के प्रभाव में चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं सरकार के इशारे पर इस तरह की मनमानी करेंगी. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर जब भी बात होगी, वोटर लिस्ट की एसआईआर यानी विशेष गहन समीक्षा में मनमानी और केंद्र सरकार द्वारा 2 लाख, 50 हजार अर्धसैनिक बलों की तैनाती का औचित्य जैसे सवाल सामने खड़े होंगे. चुनाव परिणामों पर इन के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता. संविधान निर्माताओं ने भय के वातावरण में नहीं बल्कि खुले आसमान व निडर माहौल में चुनाव कराए जाने की कल्पना की थी.

चुनाव पार्टियों के कैडर द्वारा लड़े जाते हैं पर बंगाल में चुनाव तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने नहीं, चुनाव आयोग ने लड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने कोई दखल नहीं दिया कि चुनाव आयोग के मतदाता सूची तैयार करने की आड़ में असल में बाहरी कार्यकर्ता या चुने हुए अफसर घरघर जा कर वोटरों से मिल रहे थे. इस के पीछे एक छिपा डर स्पष्ट था कि जो केंद्र सरकार चाहती है वह करोगे तो ठीक, वरना न जाने क्या होगा. सरकारी खर्च और सरकारी बंदूक के साए में मतदाता सूची तैयार करने में ही बता दिया गया कि अब तृणमूल कांग्रेस का पत्ता साफ करना है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...