Youth Trend : लड़कियां कैरियर बनाने के चक्कर में देरी से शादी कर रही हैं. इस वजह से 35-40 वर्ष की कुंआरी लड़कियों की तादाद बढ़ी है. वहीं, युवाओं का उम्र में बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षण एक ट्रैंड बनता जा रहा है. यह ट्रैंड सिर्फ बौलीवुड या हौलीवुड की फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि आम जीवन में भी देखा जा रहा है. सवाल यह है कि आखिर क्यों युवाओं को अपने से उम्र में बड़ी महिलाएं भा रही हैं?

पुराने समय में उम्र के फासले मायने नहीं रखते थे. 10-12 साल की लड़की अपने से काफी बड़े उम्र के मर्द से ब्याह दी जाती थी. यह परंपरा सभी धर्मों में मौजूद थी. लड़का किसी भी उम्र का हो, लड़की उम्र में उस से छोटी होनी चाहिए. समाज की इस मानसिकता के कारण लड़कियां समझदार होने से पहले ही पत्नी, मां, भाभी, बहू, ननद या सौतन बन जाती थीं. हिंदू विवाह अधिनियम 1955 लागू होने के बाद मर्दों के लिए एक से ज्यादा शादी और लड़कियों की कम उम्र में शादी यानी बाल विवाह पर रोक लगी. हालांकि, आज भी भारत के ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा और बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं मौजूद हैं जिन का खमियाजा लड़कियों को ही भुगतना पड़ता है.

शहरों और कसबों में हालात कुछ हद तक बदल चुके हैं. लड़कियां पढ़ रही हैं, जौब कर रही हैं और सब से बड़ी बात यह कि वे अपनी मरजी से शादी कर रही हैं. वो जमाना बीत गया जब 15 साल में लड़की के हाथ पीले करने का रिवाज था. आज शहरों में 25 से 30 साल तक की लड़कियां कुआंरी हैं वह भी अपनी मरजी से.
गीता और निखिल दोनों भारतीय इंफ्लुएंसर हैं. यह कपल 2025 में इंस्टाग्राम रील्स पर वायरल हुआ. गीता अपने प्रेमी निखिल से उम्र में काफी बड़ी है. मर्द बड़ा हो तो ठीक, औरत बड़ी हो तो प्रौब्लम क्यों? दोनों ने सोसाइटी के इसी डबल स्टैंडडर्स को चुनौती दी है. गीता और निखिल की ये बातें टिकटौक और इंस्टाग्राम पर ट्रैंड हुईं. वे ‘एज गैप कपल औफ इंडिया’ के नाम से फेमस हैं और गूगल पर मोस्ट सर्च्ड हैं.

निक जोन्स और प्रियंका चोपड़ा की उम्र का अंतर कुछ भी नहीं है. हाल में 25 से 30 साल के युवा और बड़ी उम्र की महिलाओं के बीच अफेयर या शादियों की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं. इन में चेर और अलेक्जेंडर ऐसी वाइरल जोड़ी बन गई जिस में उम्र का फर्क 40 साल का है. चेर 79 साल की हैं तो अलेक्जेंडर 39 साल के हैं.
कृति सेनन और कबीर बहिया में उम्र का फर्क 9 साल है. कृति 35 साल की हैं तो कबीर 26 साल के. बौलीवुड ऐक्ट्रैस कृति सेनन की 2025 में यूके बेस्ड बिजनैसमैन कबीर बहिया के साथ डेटिंग की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं. यह बौलीवुड में ओल्डर वुमन यंगर मैन का ताजा केस है.
वर्ष 2024 में ट्विटर पर एक स्टोरी वायरल हुई जिस में 66 साल की एक महिला ने 40 साल के अपने पति को छोड़ कर 27 साल के युवक से रिलेशनशिप शुरू की. इस पोस्ट को हजारों लाइक्स और कमैंट्स मिले और यह सोशल मीडिया पर ‘एज गैप लव’ का खूबसूरत उदाहरण बन गया. यह आम लोगों का केस है जो ग्लोबल ट्रैंड बन गया.

भारत में भी बदल रहा नजरिया
भारत में मर्द हमेशा ही औरतों से धन, रुतबा और उम्र में बड़ा होता है, यह पुरुषवादी समाज की सांस्कृतिक विरासत है ताकि औरतें हमेशा दब कर रहें. अब जबकि औरतों को आजादी मिलनी शुरू हुई है, पितृसत्ता की परंपराएं टूट रही हैं. बड़ी उम्र की औरतों से इश्क या शादी का ट्रैंड नया है, जो बढ़ रहा है. शहर के मिलेनियल्स और जेनजी वाली दोनों पीढ़ियां पिछली टिपिकल पीढ़ियों से काफी अलग हैं. ये पीढ़ियां परंपराओं की परवा नहीं करतीं.
ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में सोशल मीडिया ने दुनियाभर के युवाओं को नया कल्चर दिया है. इस नए कल्चर में पुरानी तहजीबें दम तोड़ रही हैं. बड़ी उम्र की महिलाएं इकोनौमिकली ज्यादा स्वतंत्र होती हैं, इस से नौजवान लड़कों को बराबरी का एहसास मिलता है. बड़ी उम्र की औरतें अब सिर्फ घरेलू नहीं बल्कि कैरियरओरिएंटेड हैं, यह बात युवाओं को प्रेरित करती है.
नौजवान लड़के कैरियर की शुरुआत में होते हैं जहां वे कई तरह की इनसिक्योरिटी से जूझते हैं. बड़ी उम्र की औरतें कैरियर के मामले में सैटल्ड होती हैं. इस से युवाओं को कान्फिडैंस मिलता है. एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसी जोड़ियां ज्यादा सफल होती हैं क्योंकि 10- 15 साल बड़ी होने के कारण औरतें रिश्तों को ले कर ज्यादा ईमानदार और गंभीर होती हैं. ऐसे रिश्तों की सफलता में आर्थिक स्वतंत्रता भी एक बड़ा फैक्टर है. बड़ी उम्र की औरतें अपने से कम उम्र के साथी को बिना दबाव के बढ़ने का मौका देती हैं. ऐसे रिश्तों में दोनों के बीच बेहतर संवाद होता है. जलन या मनमुटाव की नौबत नहीं आती और एकदूजे के प्रति सम्मान बना रहता है.

‘एज गैप रिलेशनशिप’ के पीछे का मनोविज्ञान
मनोविज्ञान के अनुसार नौजवान लड़कों का उम्र में बड़ी औरतों की ओर झुकाव होने के कई कारण हैं. जवान होती लड़कियों की तुलना में बड़ी उम्र की औरतें जीवन के उतारचढ़ावों से गुजर चुकी होती हैं. नौजवन लड़के ऐसी औरतों को पसंद करते हैं जो कम ड्रामा वाली होती हैं और रिश्तों में समझदारी से काम लेती हैं.
फ्रायड के ओडिपस कौम्पलैक्स थ्योरी के अनुसार, कुछ नौजवानों को मां जैसी सिक्योरिटी और ममता की फीलिंग्स आकर्षित करती है जो उन्हें बड़ी उम्र की औरतों में नजर आती है. इस के अलावा, बड़ी उम्र की औरतें सैक्स के मामले में ज्यादा अनुभवी होती हैं, यह बात भी युवाओं के अट्रैक्शन की बड़ी वजह है. यह आकर्षण सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि बौद्धिक स्तर पर भी होता है. बड़ी उम्र की औरतें समस्याओं को बेहतर तरीके से सुलझा सकती हैं.
न्यूयौर्क प्रैस्बिटेरियन हौस्पिटल में एसोसिएट प्रोफैसर डा. गेल साल्ट्ज ऐसे रिश्तों की साइकोलौजी के बारे में सोशल मीडिया के जरिए लोगों से खुल कर बात करती हैं. उम्र के फासले वाले रिश्तों पर वो कहती हैं, “उम्र के अंतर से प्यार में कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कई बार बच्चों की चाहत के मामले में ऐसे रिश्ते मुश्किल का सामना करते हैं. नौजवान लड़कों को बड़ी उम्र की औरतों के साथ इमोशनल बौन्डिंग तो मजबूत होती है लेकिन दोनों को कई बार व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.”
डा. रामानी दूर्वासूला, जिन के यूट्यूब पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं, रिलेशनशिप डायनैमिक्स पर अकसर बातें करती हैं. एज गैप अट्रैक्शन पर वे कहती हैं कि रिलेशनशिप्स में एज गैप्स अकसर इमोशनल मैच्योरिटी के साथ चलते हैं.
आकाश हैल्थकेयर की एसोसिएट कंसल्टैंट, साइकियाट्री, डा. पवित्रा शंकर कहती हैं, “यह कोई हैरानी की बात नहीं बल्कि एक बेहद सामान्य मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है. इस अट्रैक्शन का सब से बड़ा कारण महिलाओं की इमोशनल मैच्योरिटी और उन के जीवन का गहरा अनुभव होता है. बड़ी उम्र की महिलाएं अकसर कौन्फिडैंस से भरी होती हैं और जीवन को ले कर उन की सोच बेहद साफ होती है. वे रिश्तों को बहुत ही प्रैक्टिकल नजरिए से संभालती हैं. महिलाओं की यही समझदारी युवा पुरुषों को रिश्ते में स्थिरता और एक बेहतर समझ का एहसास दिलाती है.”

ऐसे रिश्तों का भविष्य क्या
भारत में शादी के मामले में लड़की से लड़का औसतन 5 साल बड़ा होता है लेकिन जहां लड़की लड़के से 5-10 साल ज्यादा बड़ी होती है, वैसे रिश्ते परिवार और समाज एक्सैप्ट नहीं कर पाते. फिर भी, हालिया ट्रैंड्स को देखें तो जेनब्लैंड रिलेशनशिप्स यानी जिन में एज गैप ज्यादा होता है, ऐसे रिश्तों को 80 प्रतिशत से ज्यादा युवा अब पुरानी सोच मानते हैं. कई केसेज में ये रिश्ते लंबे चलते हैं खासकर अगर दोनों पार्टनर मैच्योर हों.
एक अध्ययन के अनुसार, 10 साल से ज्यादा एज गैप वाली महिलाएं अपने रिश्तों में ज्यादा सैटिसफाई और कमिटैड महसूस करती हैं क्योंकि वहां पावर बैलेंस बराबर होता है. 33 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि फैमिली और फ्रैंड्स के जजमैंट ऐसे रिश्तों को मुश्किल बना देते हैं. अगर बच्चे चाहिए तो फर्टिलिटी इश्यू भी एक बड़ी समस्या होती है क्योंकि बड़ी उम्र की महिलाओं में प्रैग्नैंसी रिस्क ज्यादा होता है. अगर एज गैप बहुत बड़ा हो तो हैल्थ इश्यू या लाइफस्टेज डिफरैंस से ब्रेकअप का रिस्क बढ़ जाता है. भारत में जहां मैरिज कल्चर आज भी स्ट्रौंग है, ये रिश्ते 74 फीसदी मामलों में समय के साथ कमजोर पड़ने लगते हैं.

मेनोपौज के बाद भी क्या ये रिश्ते कायम रहते हैं
आमतौर पर 45 से 55 साल के बीच औरतों का मेनोपौज हो जाता है. इस से रिश्तों में फिजिकल और इमोशनल बदलाव आना स्वाभाविक होता है. 50 साल की किसी महिला का पार्टनर अगर उस से 5 साल छोटा यानी 45 वर्ष का है तो वह औरत के मेनोपौज के बाद अकेलापन महसूस करने लगता है.
50 वर्ष की उम्र में औरतों की सैक्स डिजायर कम होने लगती है तो 45 की उम्र के मर्दों में सैक्स की चाहत प्रबल ही रहती है. दोनों के बीच कितनी भी अंडरस्टैंडिंग क्यों न हो, बात जब फिजिकल रिश्तों में कमजोरी की हो तो दोनों के बीच के रिश्तों में दरारें पड़नी आम बात होती है. मेनोपौज के साथ ही मूड स्विंग्स, हौट फ्लशेस और सैक्शुअल डिजायर में कमी आनी शुरू हो जाती है और इस का असर रिश्तों पर पड़ता है.
हालांकि, एक हालिया स्टडी में पाया गया कि अगर पार्टनर 7 से 10 साल छोटा हो तो औरत के मेनोपौज सिम्पटम्स 54 प्रतिशत तक कम होते हैं और सैक्शुअल फंक्शनिंग अराउजल और डिजायर 84 प्रतिशत तक बेहतर रहते हैं. कई मामलों में जवान पार्टनर की एनर्जी और इमोशनल सपोर्ट से औरत ज्यादा ऐक्टिव और संतुष्ट रहती है लेकिन यह संतुष्टि और डिजायर उम्र के साथ कमजोर पड़ने लगता है.
मेनोपौज से इंटिमेसी फीकी पड़ जाती है. वैजाइनल ड्राइनैस और लो लिबीडो की समस्या बढ़ने लगती है. कुल मिला कर बात यह है कि मेनोपौज के बाद दोनों के बीच कितना भी अच्छा कम्युनिकेशन, इमोशनल इक्विटी और म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग हो, रिश्ते पहले जैसे नहीं रह पाते. सो, ऐसे रिश्ते शुरुआत में तो काफी खूबसूरत लगते हैं लेकिन ये ताउम्र की बौन्डिंग बन जाएं, जरूरी नहीं.

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