Love Problems : मैं 22 वर्ष की कॉलेज छात्रा हूं. मेरा एक बॉयफ्रेंड है जिस से मेरा रिश्ता 2 वर्षों से चल रहा है. शुरू में वह बहुत केयरिंग और समझदार था लेकिन कुछ महीनों से उस का बरताव बदल गया है. वह अब बहुत ज्यादा पजेसिव हो जाता है. मैं किसी दोस्त से बात कर लूं तो उसे बुरा लग जाता है, मेरे कपड़ों पर टिप्पणी करता है और हर वक्त जानना चाहता है कि मैं कहां हूं. जब मैं उसे समझाने की कोशिश करती हूं तो कहता है, ‘मैं, बस, तुम्हारी फिक्र करता हूं.’

मुझे उस से प्यार तो है लेकिन लगातार कंट्रोल करने वाला उस का व्यवहार मुझे परेशान करने लगा है. मैं नहीं चाहती कि यह रिश्ता टूटे लेकिन मैं अपनी आजादी भी नहीं खोना चाहती. कृपया बताइए कि मुझे क्या करना चाहिए?

आप की समस्या आज की कई युवतियों के दिल की बात है. प्यार में अपनापन ज़रूरी है लेकिन कंट्रोल कभी भी सच्चे प्यार की निशानी नहीं होता. यह व्यवहार आप के बॉयफ्रेंड की असुरक्षा और असंतुलित आत्मविश्वास को दर्शाता है.

सबसे पहले आप उन से शांत मन से बात करें. उन्हें समझाएं कि प्यार भरोसे पर टिका होता है, निगरानी पर नहीं. यह भी स्पष्ट करें कि आप को अपनी पहचान और स्वतंत्रता की आवश्यकता है जो किसी भी स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद होती है.

अगर वे आप की भावनाओं को समझने और सुधारने की कोशिश करते हैं, तो रिश्ता संभालने लायक है. लेकिन अगर बातचीत के बाद भी उन का व्यवहार नहीं बदलता, तो यह सोचें कि क्या आप ऐसे रिश्ते में रह कर वास्तव में खुश रह पाएंगी.

कभी-कभी ‘छोड़ देना’ भी अपने आत्मसम्मान और मानसिक शांति को बचाने का सबसे सही तरीका होता है.

मैं 24 वर्ष की हूं, पिछले 3 वर्षों से एक रिश्ते में थी. हमारा ब्रेकअप 6 महीने पहले हुआ था क्योंकि वह मुझे समय नहीं दे पा रहा था और अक्सर झगड़ा हो जाता था. ब्रेकअप के बाद मैं ने खुद को संभाल लिया, नौकरी में ध्यान दिया और धीरे-धीरे सब ठीक होने लगा.

अब अचानक कुछ हफ़्तों से मेरा एक्स बौयफ्रैंड दोबारा संपर्क करने की कोशिश कर रहा है. वह कहता है कि उस ने अपनी गलती समझ ली है और दोबारा रिश्ता शुरू करना चाहता है. मेरे दिल में अभी भी कहीं न कहीं उस के लिए भावनाएं हैं, लेकिन मैं डरती हूं कि फिर से वही दर्द न झेलना पड़े.

क्या मुझे उसे एक और मौका देना चाहिए या अपने रास्ते पर आगे बढ़ जाना चाहिए?

आप की स्थिति बहुत स्वाभाविक है— जब कोई पुराना रिश्ता लौटता है, तो दिल और दिमाग दोनों अलग दिशा में खींचते हैं. सब से पहले, दिल के बजाय विवेक से सोचें. यह जांचें कि उस ने केवल भावनाओं के बहाव में बात की है या सच में वह अपने व्यवहार में बदलाव लाया है. क्या वह अब वही गलतियां नहीं दोहराएगा जिन से रिश्ता टूटा था?

अगर संभव हो तो पहले दोबारा डेटिंग के बजाय बातचीत से शुरुआत करें पुराने दोस्त की तरह. उस के इरादे, व्यवहार और संवेदनशीलता को परखें. अगर आप को लगे कि वह अब परिपक्व है और रिश्ता निभाने को तैयार है, तभी दूसरा मौका देने पर विचार करें. लेकिन अगर उस की वापसी सिर्फ आप की भावनात्मक कमजोरी को भुनाने की कोशिश लगती है, तो पीछे हट जाएं. याद रखें, ‘पुराने रिश्ते को ज़िंदा करना’ तभी सार्थक है जब दोनों लोग सच में बदले हों, सिर्फ हालात नहीं. कभी-कभी ‘नए सिरे से खुद को अपनाना’ पुराने प्यार को अपनाने से कहीं ज्यादा सुकून देता है. Love Problems :

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