Hindi Kahani: क्या आत्मसम्मान सिर्फ लड़कियों का होता है, लड़कों का नहीं. उन तीनों लड़कों पर जो घिनौना आरोप लगाया जा रहा था, इस से वे शर्मसार हुए जा रहे थे. आखिर कौन उन्हें फंसा रहा था?
शहर का नामी स्कूल. विशाल भव्य इमारत. शहर के जानेमाने बिजनैसमैन, डाक्टर्स परिवार के बच्चों का स्कूल. सुबह 7 बजे का समय. कारों की कतारें. कई पेरैंट्स आए थे बच्चों को छोड़ने तो वहीं कई ड्राइवर्स भी. स्कूल असैंबली में पहुंचते ही सभी बच्चे अनुशासित कतारों में खड़े थे.
स्कूल प्रेयर व राष्ट्रगान समाप्त होते ही बच्चे अपनीअपनी क्लास में जाने की जल्दी करने लगे. तभी माइक पर टीचर की आवाज गूंजी, ‘‘अपनी क्लास में नहीं जाएं, रुकिए.’’ सभी बच्चे अपनीअपनी जगह खड़े हो गए. वे जानते थे कि कुछ नई घोषणाएं, नई सूचनाएं इसी समय दी जाती हैं, यह नई बात नहीं थी.
तभी प्रिंसिपल ने माइक से तेज आवाज में कहा, ‘‘मानस क्लास इलेवन, अमन व रणवीर क्लास टैंथ तीनों स्टेज पर आएं.’’ अपने नाम की घोषणा होते ही तीनों सम झ नहीं पाए, हुआ क्या है? वे घबराए. लेकिन जाना तो था ही स्टेज पर. तीनों गए.
स्टेज पर पहुंचते ही प्रिंसिपल की गुस्सेभरी आवाज, ‘‘तुम तीनों आजकल क्या कर रहे हो? पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय लड़कियों को अश्लील, न्यूड वीडियो और मैसेज करते हो? यही संस्कार दिए हैं घरवालों ने?’’ कहते हुए उन्होंने अमन को जोरदार थप्पड़ मारा.
‘‘नहीं सर, हम ने ऐसा कुछ नहीं किया,’’ मानस बोला, ‘‘आप से किसी ने झूठ बोला है, झूठी शिकायत की है.’’
वह घबरा गया था. रणवीर भी घबरा गया था, वह हाथ जोड़ कर, कान पकड़ कर बोला, ‘‘नहीं मैडम, हम ने ऐसा कुछ नहीं किया.’’
‘‘तुम्हारी शिकायत आई है. शिकायत क्यों झूठी होगी?’’ प्रिंसिपल चिल्लाते हुए बोलीं, ‘‘तुम तीनों को हफ्तेभर के लिए रैस्टिकेट किया जाता है. पेरैंट्स मीटिंग के बाद तुम तीनों स्कूल आ सकोगे. जाओ अब,’’ प्रिंसिपल ने कहा, ‘अपने मोबाइल यहीं रखो.’
तीनों बेहद अपमानित महसूस कर रहे थे खुद को. तीनों ही अच्छे परिवार से थे. मानस के पिता डाक्टर थे. अमन और रणबीर के पिता के बिजनैस में थे. तीनों स्कूल से निकल कर शहर के एक गार्डन में जा कर बैठ गए. लेकिन स्कूली यूनिफौर्म पहनी हुई थी, इसलिए मन में यह डर भी था कि कहीं लोग यह न सम झें कि स्कूल से बंक मार कर गार्डन में बैठे हैं. कहीं कोई जानपहचान वाला मिल गया तो? मानस के डैड के कई पेशेंट्स आतेजाते टकरा जाते थे. वे मानस को भी जानते थे. अमन, रणवीर सोच रहे थे घरवालों को क्या बताएंगे? आखिर तीनों ने तय किया कि घर जा कर सब सचसच बताएंगे.
अमन ने कहा, ‘‘इतनी इन्सल्ट होने के बाद जीवन को खत्म कर लेना चाहिए. पूरे स्कूल के सामने जलील किया गया. सुसाइड कर लेना चाहिए. सुसाइड नहीं कर सकते तो प्रिंसिपल की जम कर पिटाई करनी चाहिए.’’
‘‘नहींनहीं, ऐसा कुछ नहीं करेंगे. घर जा कर सोचते हैं. कल शाम को इसी गार्डन में मिलते हैं.’
तीनों अपनेअपने घर चले गए.
तीनों के पिता अपनेअपने काम में बिजी थे. सोचने का समय तीनों को मिल गया. मानस, रणवीर, अमन ने अपनीअपनी मां को डिटेल बता दी थी. ये सब सुन कर घरों का माहौल तनावपूर्ण तो हो गया था, डांट भी अच्छीखासी पड़ी थी तीनों को. इंतजार था तो डैड के घर आने का.

रात लगभग 10 बजे मानस के पिता डा. विशाल अपने घर पहुंचे तो देखा, घर में आज खामोशी कुछ ज्यादा है. उन्होंने सोचा, शायद वे ज्यादा लेट हैं तो मानस सो गया होगा. कभीकभी इमरजैंसी केसों में उल झ जाते हैं, डाक्टरी का पेशा ही ऐसा होता है. सो, उन्होंने ध्यान नहीं दिया. कपड़े चेंज कर डाइनिंग टेबल पर आ गए. मानस की मौम विनीता ने गरम चपाती ला कर रखी क्योंकि नौकर आदि सब शाम 7 बजे ही चले जाते हैं.
‘‘मानस क्या जल्दी सो गया था?’’ डा. विशाल ने दाल कटोरी में डालतेडालते पूछा.
‘‘जी, वह जल्दी सो गया था.’’ विनीता सम झदार महिला थी. वह पति को डिनर के बीच में डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी. वह जानती थी, बात सुनने के बाद वे डिनर छोड़ देंगे.
डिनर के बाद वे वाशबेसिन में हाथ धो कर जैसे ही वापस आए, विनीता ने उन को सारी बात बता दी.
डा. विशाल का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा, वे बोले, ‘‘पहले क्यों नहीं बताया, मानस अब इस स्तर पर उतर आया है?’’ फिर वे जोर से चिल्लाए, ‘‘मानस, मानस.’’
विनीता ने तुरंत कहा, ‘‘वह सही है, उस ने ऐसा कुछ नहीं किया होगा. सोचो,
95 फीसदी नंबर लाने वाला बैडमिंटन का अच्छा खिलाड़ी है, उस के तो दोस्त गिनेचुने ही हैं. वह ऐसा क्यों करेगा, क्या आप की पोजीशन नहीं जानता वह?’’
‘‘अरे हां, यह तो सोचा ही नहीं मैं ने,’’ डा. विशाल बोले, ‘‘हर जगह अव्वल आने वाला मानस ऐसा क्यों करेगा? हम ने तो कभी उस पर कोई पाबंदी लगाई नहीं. उस की तो कई लड़कियां फ्रैंड्स हैं, वह ऐसा क्यों करेगा?’’ और तब तक डा. विशाल मानस के कमरे का दरवाजा खोल चुके थे.
पलंग पर मानस औंधा लेटा हुआ फूटफूट कर रो रहा था. डा. विशाल ने पहली बार अपने किशोर बेटे को रोते देखा था. वे तुरंत मानस के पास गए. उसे गले लगा लिया. मानस डैड का सहारा पा कर जोरजोर से रो पड़ा. तभी विनीता पानी का गिलास ले आई. उस ने पानी पिया, फिर सारी बातें बता दीं.
डा. विशाल सब सुनते रहे, फिर बोले, ‘‘वह लड़की कौन है कि जिस को तुम ने वीडियोज, मैसेज किए?’’
‘‘वह नहीं बताया प्रिंसिपल ने,’’ मानस बोला.
‘‘तुम्हारा मोबाइल?’’ डा. विशाल ने सवाल किया.
‘‘प्रिंसिपल ने उसे जब्त कर अपने पास रख लिया,’’ मानस बोला, ‘‘अमन, रणवीर के मोबाइल भी उन्होंने रख लिए थे.’’
‘‘अमन, रणवीर के डैड के मोबाइल नंबर याद हैं?’’
‘‘जी,’’ मानस बोला.

डा. विशाल ने रणवीर और अमन के डैड को कौल कर उसी समय घर पर बुलाया. कुछ ही देर में अमन, रणवीर अपनेअपने डैड के साथ मानस के घर पहुंच गए. दोनों के चेहरे उतरे हुए थे. तनाव चेहरों पर साफ झलक रहा था. लगता था, परिवार में बहुत डांटा गया है, शायद पिटाई भी की गई हो.
डा. विशाल ने सब को देखा, फिर कुछ सोचते हुए बोले, ‘‘पहले तो तुम तीनों यह सोच कर बताओ कि असल बात क्या है?’’
‘‘अंकलजी, हमें फंसाया जा रहा है,’’ अमन, रणवीर दोनों एकसाथ बोले.
रणवीर के पापा ने भी डा. विशाल से कहा, ‘‘रणवीर की तो मैं पिटाई भी कर चुका, लेकिन रणवीर बोल रहा है, झूठी रिपोर्ट की है किसी ने प्रिंसिपल से.’’
‘‘वह लड़की कौन है?’’ डा. विशाल ने पूछा.
‘‘यह प्रिंसिपल ने नहीं बताया.’’
‘‘अच्छा’’ कहते हुए डा. विशाल सोचने लगे, फिर कुछ देर बाद बोले, ‘‘सब से पहले तो तुम तीनों मजबूत रहो कि कोई भी गलत कदम नहीं उठाना है. सुसाइड जैसी बातें नहीं सोचनी हैं क्योंकि हो सकता है कल किसी पेपर में भी यह खबर आ जाए या सोशल मीडिया पर. सोशल मीडिया पर यह खबर फिलहाल नहीं आई है. प्रिंसिपल को स्कूल की रैपुटेशन की भी चिंता होगी, ठीक है?’’
‘‘आप सही बोल रहे हैं,’’ अमन के पापा बोले, ‘‘हम पेरैंट्स मीटिंग का इंतजार क्यों करें, कल ही सुबह, दोपहर या शाम, जब प्रिंसिपल समय देते हैं, मिल लेते हैं.’’
‘‘जी, बिलकुल सही है,’’ रणवीर के पापा बोले.
‘‘लड़कियों के नाम भी पूछ लेते हैं, लड़कियां कौन हैं?’’ डा. विशाल बोले, क्योंकि यह तीनों लड़कों के भविष्य का प्रश्न है. पढ़ाई खराब होगी हफ्तेभर.’’ और उन्होंने प्रिंसिपल को फोन लगा दिया.

डा. विशाल का फोन प्रिंसिपल ने तुरंत उठा लिया, ‘‘हम लोग कल आप से मिलना चाहते हैं मानस को रैस्टिकेट किए जाने वाले मामले के सिलसिले में,’’ डा. विशाल बोले.
‘‘क्यों नहीं, जरूर, कल दोपहर बाद. मु झे भी दुख है कि मानस इतनी गंदी हरकत कर सकता है,’’ प्रिंसिपल बोली.
‘‘मैडम, मु झे लगता है कि ऐसा नहीं हुआ है. मानस ऐसा नहीं कर सकता. मु झे अपने बेटे पर भरोसा है.’’
‘‘कल हम दोपहर बाद मिलते हैं,’’ प्रिंसिपल से बात खत्म करने के बाद डा. विशाल ने कहा, ‘‘प्रिंसिपल से हम सब कल दोपहर बाद मिलेंगे. उन्होंने समय दे दिया है.
कल मिलने के लिए सब तैयार हो गए थे. उन्होंने देखा, अमन का चेहरा उतरा हुआ था.
‘‘अमन, क्या हुआ? हम मिल रहे हैं प्रिंसिपल से, सारी बातें क्लियर हो जाएंगी.’’
‘‘वो, अंकलजी, मैं सोच रहा था,’’ अमन मुश्किल से बोला.
‘‘क्या सोच रहे हो, बोलो,’’ अब अमन के पापा ने सवाल किया.
‘‘वो, पूरी असैंबली के सामने जो इन्सल्ट हुई है वह वापस नहीं आएगी.’’
‘‘पापा, पापा,’’ अब मानस बोला.
‘‘बोलो,’’ डा. विशाल बोले.
‘‘पापा, अमन सुसाइड करने की बात बोल रहा था,’’ मानस ने बताया.
‘‘बेटा, ऐसी बात कभी सपने में भी मत सोचना. तुम अपने परिवार की शान हो. तुम तीनों बैंडमिंटन के अच्छे खिलाड़ी हो. तुम्हारे सुसाइड करने से यह बात साबित हो जाएगी कि आरोप सही है. हमें यह साबित करना है, तुम लोग सही हो, आरोप झूठा है.
‘‘हमें जीवन की मुसीबतों से घबराना नहीं है, डट कर उन का सामना करना है, सम झे,’’ कहते हुए डा. विशाल ने अमन का गाल प्यार से थपथपा दिया.
‘‘अब कभी नहीं सोचोगे सुसाइड का, ठीक है?’’ डा. विशाल आगे बोले.
‘‘ठीक है, हम कल दोपहर में लंच के बाद स्कूल में मिलते हैं,’’ डा. विशाल ने कहा.
सभी अपने घर चले गए. उस समय रात के लगभग एक बज रहे थे.
दूसरे दिन दोपहर में सब स्कूल में उपस्थित थे. मानस, रणवीर, अमन प्रिंसिपल के केबिन के बाहर थे. कुछ बच्चों का स्पौर्ट्स पीरियड था, वे आजा रहे थे. कुछ बच्चों की नजरें जैसे ही तीनों पर पड़ीं, मुसकरा दिए, कटाक्षभरी मुसकान. लेकिन उन तीनों ुके साथ उन के पिता थे तो उन को हिम्मत थी कि पापा साथ में हैं.
कुछ ही देर में प्रिंसिपल के केबिन से एकदो टीचर निकलते दिखीं. एक टीचर अमन के नजदीक आए.
अमन ने कहा, ‘‘गुड आफ्टरनून मैडम.’’
टीचर ने जवाब नहीं दिया, आगे बढ़ गई.

प्रिंसिपल के केबिन में मानस के पेरैंट्स और रणवीर व अमन के पेरैंट्स के अलावा शहर के फेमस ज्वैलरी शौप के मालिक मि. दुग्गल और उन की पत्नी भी थे.
डा. विशाल और अमन व रणवीर के पेरैंट्स उन्हें तुरंत पहचान गए क्योंकि सब गोल्ड, डायमंड के गहने उन्हीं के यहां से खरीदते थे.
सब ने एकदूसरे से नमस्ते की, मुसकराए, फिर प्रिंसिपल को देखने लगे.
मानस, रणवीर, अमन प्रिंसिपल के सामने गरदन झुकाए अपराधी के समान खड़े थे.
एक क्षण उन्होंने डा. विशाल को देखा, फिर रणवीर, मानस और अमन के मोबाइल सामने रख दिए.
बारीबारी से मोबाइल वाले वीडियो डा. विशाल को दिखाए, साथ ही, किसी शिवानी नाम की लड़की के साथ अश्लील सैक्सी मैसेज भी दिखाए.
इसी प्रकार की चैट और वीडियो अमन और रणवीर के मोबाइल से भी भेजी
गई थीं.
‘‘यह शिवानी कौन है?’’ डा. विशाल ने सवाल किया मानस से.
‘‘मेरी बेटी है,’’ मि. दुग्गल ने जवाब दिया.
‘‘अच्छा,’’ कह कर डा. विशाल चुप हो गए.
‘‘अब बताएं क्या कहेंगे आप?’’ प्रिंसिपल बोली.
कुछ सोचते हुए डा. विशाल ने कहा, ‘‘जब तीनों लड़कों को आप ने यहां अपने केबिन में खड़ा कर रखा है तो शिवानी को क्यों नहीं बुलाया? वह क्लास में होगी, उसे भी बुलाइए.’’
‘‘उस की क्या जरूरत है, उस का मोबाइल है मेरे पास,’’ प्रिंसिपल बोली.
‘‘इस की जरूरत है, मैडम. मेरा कहना है इन लड़कों ने वीडियो नहीं भेजे,’’ डा. विशाल बोले.
‘‘शिवानी झूठी है, झूठ बोल रही है वह,’’ अमन के पापा बोले.
‘‘मेरी लड़की झूठे आरोप क्यों लगाएगी?’’ मि. दुग्गल बोले.
‘‘यह तो वही बताएगी, बुलाएं उसे,’’ आखिर प्रिंसिपल ने शिवानी को बुलवाया.
शिवानी केबिन में आते ही रोने लगी.
‘‘देखो, मेरी लड़की के आंसू बोल रहे हैं, वह सही है.’’
प्रिंसिपल ने कहा, ‘‘शिवानी, रोना बंद करो, यह क्लियर करो कि ये वीडियोज इन लड़कों ने भेजे हैं?’’
‘‘जी मैडम, इन्होंने ही भेजे हैं. इन के मोबाइल से आए हैं,’’ शिवानी ने आंसू पोंछते हुए कहा.
‘‘तुम इतने विश्वास से कैसे बोल रही हो, इन के मोबाइल से किसी और ने भेजे हों तो?’’ अब रणवीर के पापा बोले.
‘‘देखो शिवानी, तुम सच बोलो, तुम झूठ बोल रही हो,’’ डा. विशाल बोले.
‘‘अंकलजी, मैं झूठ क्यों बोलूंगी,’’ शिवानी बोली.

‘‘मुझे भी विश्वास है, मानस ऐसा नहीं करेगा. ठीक है मैडम, आप ने समय
दिया, मैं पुलिस की मदद से अपने बेटे पर लगाए आरोप को झूठा सिद्ध
करूंगा. पुलिस की जांच में सच झूठ का पता चलेगा. दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.’’ ऐसा कहते हुए डा. विशाल ने अमन व रणवीर के पापा से कहा, ‘‘आइए, बच्चों के साथ पुलिस स्टेशन चलते हैं.’’
तभी प्रिंसिपल ने देखा, शिवानी घबरा गई है. उस का चेहरा डर के मारे पीला पड़ गया.
‘‘शिवानी बेटा, क्या हुआ, क्यों घबरा रही हो?’’
शिवानी अपने पिता मि. दुग्गल से लिपट गई, रोतेरोते बोली, ‘‘पापा, सौरी, मैं ने झूठ बोला था.’’
दुग्गल को काटो तो खून नहीं. शर्म और गुस्से से उन का गोरा चेहरा लाल हो गया. उन्होंने एक थप्पड़ शिवानी को मारा. शिवानी का रोना तेज हो गया.
प्रिंसिपल को देख कर डा. विशाल मुसकरा दिए, बोले, ‘‘देख लिया, आरोप झूठे थे.’’
‘‘लेकिन क्यों किया तुम ने, किस प्रकार किया?’’ प्रिंसिपल गुस्से से बोली.
‘‘वो, मधुकर अंकल,’’ शिवानी बोली.
‘‘मधुकर अंकल, ये कौन हैं?’’ प्रिंसिपल बोली.
‘‘मैं बताता हूं मधुकर के बारे में,’’ मि. दुग्गल बोले, ‘‘मधुकर मेरा ड्राइवर है, जो रोज शिवानी को स्कूल छोड़ने आता है. लेकिन उस का इस सब से क्या मतलब?’’ दुग्गल को गुस्सा आने लगा था.
‘‘पूरी बात सचसच बताओ क्या माजरा है?’’ प्रिंसिपल बोली.
‘‘दरअसल, ये तीनों बैडमिंटन के अच्छे प्लेयर हैं, स्कूल की एक्टिविटीज में भी आगे रहते हैं. हमारे ग्रुप को हमेशा हार देखनी पड़ती है, इसलिए इन को परेशान करने के लिए मैं ने यह किया,’’ शिवानी ने बताया.
‘‘वीडियो इन के मोबाइल से कैसे गए, यह भी बताओ?’’
‘‘स्पौर्ट्स पीरियड में जब ये तीनों खेल रहे थे तब इन के मोबाइल औन थे, जिस से वीडियो भी बन रहे थे. मैं ने मधुकर अंकल को सब बता दिया था. गार्ड मधुकर अंकल को जानता था, इसलिए रोका नहीं.

‘‘मधुकर अंकल ने इन तीनों के मोबाइल से सैक्सी वीडियो और चैट मेरे मोबाइल पर पोस्ट कर दिए थे. ये खेलने में बिजी थे. इस तरह ऐसा हो पाया,’’ यह कह कर शिवानी ने सौरी बोला और फिर रोने लगी.
अब प्रिंसिपल की बारी थी सौरी बोलने की. लेकिन डा. विशाल ने कहा, ‘‘यहां नहीं असैंबली में सौरी बोलेगी शिवानी.
‘‘डा. साहब, लड़की है, बदनामी होगी,’’ प्रिंसिपल मैडम बोली.
‘‘बदनामी क्या लड़कों की नहीं होती?’’ मि. दुग्गल बोले.
‘‘ठीक है,’’ प्रिंसिपल बोली.
दूसरे दिन सुबह ही पूरी असैंबली, स्कूल स्टाफ और डा. विशाल और रणवीर व अमन के डैड उपस्थित थे. प्रिंसिपल ने माइक पर कहा, ‘‘उस दिन जो आरोप लगा था अमन, रणवीर, मानस पर उन आरोपों की जांच हुई, आरोप झूठे और निराधार थे. यह गलती शिवानी की थी. हफ्तेभर के लिए शिवानी को रैस्टिकेट किया जाता है.
शिवानी ने माइक पर रोतेरोते सौरी बोला.
तीनों लड़के खुश थे, गर्व से सिर ऊंचा था. उन का आत्मसम्मान
उन को वापस मिल गया था. Hindi Kahani.

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