राजेरजवाड़ों और राजसी वैभव के तमाम किस्से समेटे सांस्कृतिक और आधुनिकता का संगम बन चुका राजस्थान अपने अद्भुत वास्तुशिल्प, मधुर लोकसंगीत और रंगबिरंगे पहनावे के लिए मशहूर है. यही वजह है कि विदेशी पर्यटक यहां बरबस ही खिंचे चले आते हैं.

राजाओं की धरती राजस्थान देशी और विदेशी घुमक्कड़ों के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थल माना जाता है. यह राज्य अपनी संस्कृति, रंगबिरंगे पहनावे और खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है.
यहां की पुरानी हवेलियां जो कभी राजेमहाराजों और राजकुमारियों का निवास हुआ करती थीं, उन्हें पर्यटकों के लिए लग्जरी होटलों में तबदील कर दिया गया है. इन में रह कर पर्यटक कुछ समय के लिए खुद को इस राजसी राज्य का राजा महसूस करने लगते हैं.

जैसलमेर

राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में थार के रेगिस्तान के हृदयस्थल पर स्थित जैसलमेर देश के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है. अनुपम वास्तुशिल्प, मधुर लोकसंगीत, विपुल सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत को अपने में समाए जैसलमेर पर्यटकों के स्वागत के लिए सदैव तत्पर रहता है. यह ?ालसाने वाली गरमी और जमा देने वाली ठंडी रेगिस्तानी जमीन के लिए जाना जाता है.

दर्शनीय स्थल

डेजर्ट कल्चर सैंटर व म्यूजियम : डैजर्ट कल्चर सैंटर व म्यूजियम राजस्थान की संपन्न संस्कृति को दर्शाता है. इस संग्रहालय में कई तरह के पारंपरिक  यंत्र, प्राचीन व मध्ययुग के सिक्के, खूबसूरत पारंपरिक टैक्सटाइल व बेशकीमती चीजों को संगृहीत किया गया है.

सलीम सिंह की हवेली : बेहतरीन शिल्पकला का नमूना दर्शाती यह हवेली जैसलमेर किले के निकट पहाडि़यों के पास स्थित है. इस की छत को मोर के डिजाइन में तैयार किया गया है जबकि हवेली के मुख्यद्वार पर एक  विशालकाय हाथी किसी द्वारपाल की भांति खड़ा है. हवेली के भीतर 38 बालकनी हैं. हवेली को सामने से देखने पर यह एक जहाज की तरह प्रतीत होती है, इसी कारण कई लोग इसे जहाजमहल भी कहते हैं.

पटवा हवेली : पटवा हवेली जैसलमेर में स्थित हवेलियों में अपना अलग ही स्थान रखती है. पत्थर से बनी इस हवेली की किनारियों को सुनहरे रंग से रंगा गया है. इस हवेली को पटवा भाइयों द्वारा 1800 व 1860 के मध्य बनवाया गया था, जो गहनों के व्यापारी थे. वर्तमान में इसे पटवा स्टाइल के फर्नीचर व साजसजावट से सजाया गया है जो पर्यटकों को पटवाओं के रहनसहन की ?ालक दिखाता है.

कैमल सफारी : जैसलमेर का यह वह स्थान है जहां पर देशीविदेशी पर्यटकों को राजस्थान की शाही सवारी यानी ऊंट पर सवारी करने का रोमांचकारी अनुभव होता है. ऊंट पर्यटकों को अपनी पीठ पर बिठा कर पास ही स्थित छोटेछोटे गांवों तक सैर के लिए ले जाता है, जहां पर्यटकों को राजस्थानी जीवनशैली के दर्शन होते हैं. वहीं ऊंट पर बैठ कर आप हवेलियों, मंदिरों व अन्य स्थानों तक भी जा सकते हैं, रास्ते में आप को लोकनृत्य व लोकसंगीत की ?ालकियां देखने को मिलेंगी.

कैसे जाएं

रेल मार्ग : जैसलमेर रेलमार्ग से देश के अधिकतर शहरों से जुड़ा हुआ है.

सड़क मार्ग : सड़क  मार्ग द्वारा जैसलमेर जाने के लिए निजी औपरेटर्स के वाहन और राजस्थान सरकार की डीलक्स बसें हर समय उपलब्ध रहती हैं. 

हवाई मार्ग : जोधपुर, जयपुर, मुंबई और दिल्ली से जैसलमेर के लिए इंडियन एअरलाइंस की सीधी फ्लाइट मिलती हैं.

कब जाएं : अक्तूबर से फरवरी तक आप यहां ठंड और बारिश के मिलेजुले मौसम का आनंद उठा सकते हैं.

उदयपुर

अरावली पहाड़ी के निकट स्थित राजस्थान के सब से खूबसूरत शहर उदयपुर को ?ालों का शहर भी कहा जाता है. यह अपनी प्रकृति और मानवीय रचनाओं से समृद्घ अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां की हवेलियों, महलों, ?ालों और हरियाली को देख कर सैलानी उमंग से भर जाते हैं. मनमोहक और हरेभरे बगीचे, ?ालें, नहरें, दूध की तरह सफेद संगमरमर के महल इस शहर को रोमांटिक बनाते हैं.

दर्शनीय स्थल

सिटी पैलेस : इस महल की स्थापना 16वीं सदी की शुरुआत में की गई थी. इसे बनाने में 22 राजाओं का योगदान रहा. शीशे और कांच के कार्य से निर्मित यह भव्य महल यूरोपीय व चीनी वास्तुकला का उम्दा नमूना पेश करता है. किले के भीतर गलियारों, मंडपों, प्रांगणों व बगीचों के समूह हैं. इस में कई बालकनियां और टावर भी हैं. पैलेस के मुख्य हिस्से को संग्रहालय का रूप दिया गया है जिस में पुरानी वस्तुओं को संरक्षित रखा गया है.

पिछौला ?ाल : इस ?ाल के बीच में जलमहल, जग मंदिर, जगनिवास क ा निर्माण हुआ है. इस खूबसूरत ?ाल के सफेद पानी में पर्यटक नौका विहार का आनंद लेते हैं.

सहेलियों की बाड़ी : यह उदयपुर की रानियों व राजकुमारियों के आराम करने के लिए बनवाई गई थीं. इस विश्राम स्थल में कई सुंदर फौआरे लगे हुए हैं. यह चारों ओर से हरियाली से घिरी है.

फतेहसागर : यह ?ाल एक नहर द्वारा पिछौला ?ाल से जुड़ी हुई है. यह 3 तरफ से पहाडि़यों से घिरी है इस के बीच में नेहरू पार्क है. इस में एक खूबसूरत रेस्तरां बनाया गया है जहां पहुंचने के लिए ?ाल के बीच में एक पुल का निर्माण किया गया है. इस रेस्तरां में आराम से बैठ कर पर्यटक विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लेते हैं.

भारतीय लोककला मंडल : जिन लोगों को राजस्थान की पारंपरिक व ऐतिहासिक वस्तुएं देखने में रुचि है उन के लिए यह स्थान सब से उपयुक्त है. यहां राजस्थानी पहनावे, गहने, वाद्ययंत्र, कठपुतलियां, मुखौटे और उस समय की सुंदर चित्रकारी का दुर्लभ संग्रह है. विशेष रूप से बच्चे यहां हर रोज दिखाए जाने वाले कठपुतली नृत्य का जम कर आनंद लेते हैं.

कैसे जाएं

रेल मार्ग :  उदयपुर, दिल्ली, जयपुर, अजमेर व अहमदाबाद से रेलमार्ग से सीधे जुड़ा हुआ है.

सड़क मार्ग : उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित है. दिल्ली, आगरा, जयपुर, अजमेर, माउंट आबू, अहमदाबाद से उदयपुर के लिए सीधी बस सेवाएं हैं.

हवाई मार्ग : सब से नजदीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप है. यह डबौक में है. जयपुर, जोधपुर, औरंगाबाद, दिल्ली तथा मुंबई से नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं.

कब जाएं :  यदि आप उदयपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यहां जाने का सब से अच्छा मौसम वर्षा ऋतु के बाद है, क्योंकि बारिश के बाद यहां की सुंदरता असाधारण हो जाती है. वैसे यहां घूमने का उपयुक्त समय सितंबर से अप्रैल तक है.

माउंट आबू

माउंट आबू ‘डेजर्ट स्टेट’ कहे जाने वाले राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है जो गुजरात वालों के लिए वहां की हिल स्टेशन की कमी को भी पूरा करता है. दक्षिणी राजस्थान के सिरोही जिले में गुजरात की सीमा से सटा यह हिल स्टेशन 4 हजार फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है. इस की सुंदरता कश्मीर से कम नहीं आंकी जाती.

दर्शनीय स्थल

नक्की ?ाल : राजस्थान के माउंट आबू में 3,937 फुट की ऊंचाई पर स्थित नक्की ?ाल लगभग ढाई किलोमीटर के दायरे में फैली हुई कृत्रिम ?ाल है. ?ाल के आसपास हरीभरी वादियां, खजूर के वृक्षों की कतारें, पहाडि़यों से घिरी ?ाल और ?ाल के बीच आईलैंड किसी को भी मंत्रमुग्ध करने के लिए काफी है. ?ाल में बोटिंग करने का मजा भी लिया जा सकता है, जिस में पैडल बोट, शिकारा व फैमिली बोट का मजा उठा सकते हैं.

सनसैट पौइंट : शाम के समय सनसैट पौइंट से सूरज के ढलने का नजारा देखने के लिए सैकड़ों सैलानी यहां उमड़ पड़ते हैं. पर्यटक इस नजारे को अपने कैमरों में कैद कर के ले जाते हैं. इस पौइंट तक पैदल चल कर तो जाया ही जा सकता है. यदि आप पैदल नहीं चलना चाहते तो यहां पहुंचने के लिए ऊंट अथवा घोड़े की सवारी कर के पहुंच सकते हैं.

हनीमून पौइंट :  सनसैट पौइंट से 2 किलोमीटर दूर नवविवाहित जोड़ों के लिए हनीमून पौइंट है. यह ‘आंद्रा पौइंट’ के नाम से भी जाना जाता है. शाम के समय यहां नवविवाहित जोड़े होटलों के कमरों से निकल कर प्रकृति का आनंद उठाते हैं.

टौड रौक : यह मेढक के आकार की बनी एक चट्टान है जो नक्की ?ाल से कुछ ही दूरी पर स्थित है. यह चट्टान सैलानियों, विशेष रूप से बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती है. चट्टान इस तरह अपने स्थान पर टिकी है मानो यह अभी ?ाल में कूद पड़ेगी, इसलिए यह पर्यटकों के लिए कुतूहल का केंद्र है.

म्यूजियम और आर्ट गैलरी : राजभवन परिसर में 1962 में गवर्नमैंट म्यूजियम स्थापित किया गया है ताकि इस क्षेत्र की पुरातात्विक संपदा को संरक्षित रखा जा सके.

गुरुशिखर : गुरुशिखर समुद्रतल से करीब 1,722 मीटर ऊंचा है. यह अरावली पर्वत की सब से ऊंची चोटी है. इस शिखर से नीचे और आसपास का नजारा देखना सैलानियों को अलग ही अनुभव देता है.

वन्यजीव अभयारण्य : राज्य सरकार द्वारा 228 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को 1960 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था. पशुपक्षियों को नजदीक से देखने की चाह रखने वाले लोगों के लिए यह जगह उत्तम है. यहां वानस्पतिक विविधता, वन्यजीव व स्थानीय प्रवासी पक्षी आदि देखे जा सकते हैं. पक्षियों की लगभग 250 और पौधों की 110 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं. साथ ही तेंदुए, वाइल्ड बोर, सांभर, चिंकारा और लंगूर आप को उछलकूद करते दिख जाएंगे.

कैसे जाएं

हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर है, जो यहां से 185 किलोमीटर दूर है.

रेल मार्ग : नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड, 28 किलोमीटर की दूरी पर है जो अहमदाबाद, दिल्ली, जयपुर और जोधपुर से जुड़ा हुआ है.

सड़क मार्ग : माउंट आबू देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है.

कब जाएं : यहां फरवरी से जून व सितंबर से दिसंबर तक घूमना सब से उपयुक्त रहता है.

जयपुर

‘पिंक सिटी’ के नाम से मशहूर जयपुर राजस्थान की राजधानी है. जयपुर अपनी वास्तुकला के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. यहां कला, संस्कृति और सभ्यता का अनोखा संगम देखने क ो मिलता है.

दर्शनीय स्थल

हवामहल : यह शिल्पकला का उम्दा नमूना माना जाता है. यह जयपुर का सब से अनोखा स्मारक है.  इस में 152 खिड़कियां व जालीदार छज्जे हैं. अपनी कलात्मकता के लिए विख्यात हवामहल का निर्माण 18वीं सदी में राजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया था. शहर के केंद्र में बना यह पांचमंजिला महल लाल और गुलाबी रंग, सैंड स्टोन से मिलजुल कर बना है. यहां से शहर का आकर्षक नजारा देखा जा सकता है.

सिटी पैलेस : शहर में स्थित सिटी पैलेस मुगल और राजस्थानी स्थापत्य कला का एक बेहतरीन नमूना है. पुराने शहर के दिल में स्थित सिटी पैलेस वृहद क्षेत्र में फैला हुआ  है. सिटी पैलेस के एक हिस्से में अब भी जयपुर का शाही परिवार रहता है. कई इमारतें, सुंदर बगीचे और गलियारे इस महल का हिस्सा हैं. 

जलमहल : यह सवाई प्रताप सिंह द्वारा 1799 में बनवाया गया था. यह महल मान सागर ?ाल के  बीचोंबीच स्थित है.

कैसे जाएं

वायु मार्ग  : जयपुर के दक्षिण में स्थित सांगनेर एअरपोर्ट नजदीकी एअरपोर्ट है.

रेल मार्ग : जयपुर रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से विभिन्न रेलगाडि़यों के माध्यम से जुड़ा हुआ है.

सड़क मार्ग : दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 से जयपुर पहुंचा जा सकता है जो 256 किलोमीटर की दूरी पर है. राजस्थान परिवहन निगम की बसें अनेक शहरों से जयपुर जाती हैं. दिल्ली से भी जयपुर के लिए सीधी बस सेवा है.

कब जाएं : जयपुर में मार्च से जून तक काफी गरमी रहती है. यहां घूमने का सब से उपयुक्त समय सितंबर से फरवरी है.