इंटरमीडिएट करने के बाद सोमबीर ने आगे की पढ़ाई का इरादा त्याग दिया था. अब वह कोई कामधंधा करना चाहता था. रोहतक के पास स्थित सोमबीर के गांव सिंहपुरा में कई ऐसे युवक थे, जो ऊंची डिग्रियां ले कर नौकरी की तलाश में भटकने के बाद भी बेरोजगार थे. इसी के मद्देनजर सोमबीर ने पहले ही सोच लिया था कि वह नौकरी के चक्कर में न पड़ कर अपना खुद का कोई काम शुरू करेगा, जिस में सीधा कमाई का जरिया बन जाए.

सोचविचार कर उस ने प्रौपर्टी डीलिंग का काम करने का फैसला किया. इस काम में न तो ज्यादा मेहनतमशक्कत की जरूरत थी और न ही ज्यादा भागदौड़ की. हां, एक अदद पूंजी की जरूरत जरूर थी, जो उस ने अपने पिता जयराज की मदद से थोड़े ही दिनों में एकत्र कर ली थी. उस ने प्रौपर्टी डीलिंग के काम के लिए पास के गांव गद्दीखेड़ा को चुना.

सोमबीर ने गद्दीखेड़ा के जाट रामकेश के मकान में किराए का कमरा ले कर अपना औफिस खोल लिया. धीरेधीरे उस का काम चल निकला तो वह उसी मकान में एक दूसरा कमरा ले कर रात में भी वहीं रहने लगा. कुछ ही दिनों में वह मकान मालिक रामकेश के पूरे परिवार के साथ काफी घुलमिल गया.
रामकेश के परिवार में पत्नी सरिता के अलावा 3 बेटियां थीं, जिन में सब से बड़ी ममता थी. ममता जब ढाई साल की थी, तभी उसे रोहतक की श्याम कालोनी में रहने वाली उस की बुआ कृष्णा ने गोद ले लिया था. वह रोहतक में बारहवीं में पढ़ रही थी.

पिछले साल ममता रोहतक से अपने जैविक मातापिता के घर गद्दीखेड़ा गई थी. ममता 17 साल की जवान हो चुकी थी. मां सरिता ने बेटी को देखा तो देखती रह गई.

ममता ने आगे बढ़ कर मां के पैर छुए तो सरिता निहाल हो गई. ममता अपनी दोनों छोटी बहनों से गले मिली, कुशलक्षेम पूछा. ममता के आने से पूरे घर का माहौल खुशनुमा हो गया. सरिता ने फोन कर के अपनी ननद कृष्णा से कह दिया कि ममता कुछ दिनों यहां रहने के बाद रोहतक लौटेगी, इसलिए वह उसे जल्दी बुलाने के लिए फोन न करे.

एक दिन ममता का सामना सोमबीर से हुआ तो वह उसे अपलक देखता रह गया. गोरीचिट्टी, बला की खूबसूरत ममता किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. दरअसल, सोमबीर को यह मालूम नहीं था कि रामकेश अंकल की एक और बड़ी लड़की भी है, जिसे बचपन में ही उस के फूफा ने गोद ले लिया था. ममता ने उसे अपनी ओर टकटकी लगाए देखा और पलभर के लिए उसे तिरछी नजरों से देखते हुए मुसकरा कर घर के अंदर चली गई.

ममता और सोमबीर की यह पहली मुलाकात थी, जो कुछ न कह कर भी बहुत कुछ कह गई थी. इस के कुछ दिनों बाद जब सोमबीर को ममता से बात करने का मौका मिला तो वह उस की खूबसूरती की तारीफ करने लगा. ममता को न जाने क्यों उस की बातें अच्छी लगीं.

इसे उम्र का तकाजा कह सकते हैं और पहली नजर का प्यार भी, जिस में आकर्षण की भूमिका बड़ी होती है. बहरहाल, इसी के चलते सोमबीर और ममता ने भी प्यार का इजहार भी किया. प्यार जैसेजैसे दिन गुजरते गए, सोमबीर और ममता एकदूसरे के प्यार में डूबते चले गए.

शुरू में तो सरिता और रामकेश ने ममता और सोमबीर के मिलनेजुलने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब वे हद से आगे बढ़ने लगे तो उन का माथा ठनका.

सरिता ने ममता को समझाया कि सोमबीर अनुसूचित जाति का लड़का है, इसलिए उस से ज्यादा घुलनामिलना ठीक नहीं है. ममता ने मां की बातें एक कान से सुन कर दूसरे से बाहर निकाल दीं.
इस के बाद सरिता बेटी पर नजरें रखने लगी. हालांकि ममता और सोमबीर रामकेश और सरिता की नजरों से बच कर मिलते थे, पर उन की अनुभवी आंखों को धोखा देना आसान नहीं था. कई बार किसी न किसी ने दोनों को मिलते हुए देख लिया और इस की खबर रामकेश तक पहुंचा दी.

पानी सिर से ऊपर जाते देख रामकेश ने सोमबीर को ममता से दूर रहने के लिए कहा. इतना ही नहीं, उसे छोटी जाति का हवाला दे कर खतरनाक परिणाम भुगतने की भी चेतावनी दी. रामकेश की धमकी से परेशान सोमबीर ने ममता से कहा कि दोनों के परिवार वाले उन्हें किसी भी हाल में मिलने नहीं देंगे, इसलिए जल्दी ही कोई उपाय नहीं किया गया तो उन का एक होना मुश्किल हो जाएगा.

सोमबीर की बातें सुन कर ममता उसे विश्वास दिलाते हुए बोली कि वह उस के बिना नहीं जी सकती. इस के बाद दोनों ने एक साथ जीने और मरने की कसमें खाईं. सोमबीर जानता था कि ममता के घर वाले एक तो जाट हैं और दूसरे रसूख वाले दबंग भी, इसलिए उस ने कानून का सहारा ले कर कोर्ट में शादी करने की योजना बनाई.

24 अगस्त, 2017 को ममता मौका पा कर घर से निकली और सोमबीर के पास पहुंच गई. सोमबीर उसे साथ ले कर चंडीगढ़ पहुंचा. वहां दोनों ने पहले आर्यसमाज मंदिर में और फिर कोर्ट में शादी कर ली.
ममता के गायब होने की बात जब उस की मां सरिता को पता चली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. सरिता और रामकेश ने यह बात रमेश को बताई तो उन्हें ममता की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया. मां कृष्णा भी ममता की इस हरकत से सन्न रह गई. वे लोग रामकेश के घर आ गए.

सोमबीर के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट

सब ने विचारविमर्श कर के रोहतक के थाना आर्यनगर में ममता के नाबालिग होने और सोमबीर व उस के पिता जयराज के खिलाफ अपनी बेटी को बहलाफुसला कर भगा ले जाने का मुकदमा दर्ज करवा दिया.
गांवों और ग्रामीण समाज में ऐसी बातें देरसबेर किसी न किसी तरह पहुंच ही जाती हैं. जिस ने भी इस बारे में सुना वह इस बात को और भी बढ़ाचढ़ा कर बखान करने लगा. जितने मुंह उतनी ही बातें होने लगीं.
मामला केवल प्रेम विवाह का नहीं था, बल्कि इस बात का था कि जाट बिरादरी की एक लड़की ने अपने से छोटी जाति के लड़के के साथ शादी रचा ली है. रामकेश और रमेश के परिवार की बिरादरी में थूथू होने लगी. इस सब से गुस्साए रमेश ने ममता की हत्या करने का फैसला कर लिया.

रमेश के इस फैसले से ममता को जन्म देने वाली मां सरिता और पिता रामकेश भी सहमत थे. सब से पहले उन्होंने कोर्ट में ममता का स्कूल सर्टिफिकेट दे कर बताया कि ममता अभी नाबालिग है, 17 साल की. इसलिए कोर्ट उस की शादी को रद्द घोषित करे.

जब कोर्ट ने इस मामले की छानबीन की तो पता चला ममता की उम्र सचमुच 17 साल ही है. हकीकत जानने के बाद कोर्ट ने सोमबीर और ममता को कोर्ट में पेश होने का सम्मन जारी कर दिया. यह बात जनवरी, 2018 की है. जब दोनों कोर्ट में पेश हुए तो पता चला कि सोमबीर ने फरजी तरीके से ममता की उम्र 18 साल बता कर उस से शादी की थी.

कोर्ट को धोखे में रखने के जुर्म में सोमबीर और उस के पिता को जेल और ममता को बालिग होने तक नारी निकेतन भेज दिया गया. ममता के बालिग होने में अभी 17 महीने बाकी थे.

ममता के बालिग हो जाने के बाद 8 अगस्त, 2018 को रोहतक कोर्ट में पेश किया जाना था. उधर करनाल स्थित नारी निकेतन में रह रही ममता की खुशी देखते ही बन रही थी. लोगों ने ममता को इतना खुश पहले कभी नहीं देखा था. वह सब से कह रही थी ‘आज मैं अपने घर चली जाऊंगी.’

सबइंसपेक्टर नरेंद्र और लेडी हैडकांस्टेबल सुशीला ममता को नारी निकेतन से ले कर रोहतक कोर्ट पहुंचे. चूंकि ममता का पति सोमबीर और ससुर जेल में थे, इसलिए सोमबीर की मां सरोज तथा छोटा भाई देवेंद्र कोर्ट पहुंचे थे. सरोज और देवेंद्र काफी डरे हुए थे, जिस की वजह ममता के पिता की ओर से समयसमय पर दी गई जान से मार देने की धमकियां थीं.

यहां तक कि ममता ने यह कह कर कई बार अपने दत्तक पिता रमेश से माफ कर देने की गुहार भी लगाई थी कि वह अपनी इस नई जिंदगी से काफी खुश है. लेकिन ममता द्वारा अपने से छोटी जाति के युवक से शादी कर लेने से बुरी तरह आहत रमेश का एक ही रटारटाया जवाब था, ‘ममता को मरना होगा, क्योंकि उस ने सोमबीर से शादी कर के हमें समाज और बिरादरी के आगे हमेशा के लिए नीचे झुका दिया है.’
ममता को जन्म देने वाली मां सरिता और पिता रामकेश भी उस की जान बख्शने को तैयार नहीं थे. रमेश तथा रामकेश भी कोर्ट में मौजूद थे.

ढाई बजे कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराने के बाद ममता अपनी सास सरोज, देवर देवेंद्र के साथ लघु सचिवालय के गेट नंबर-2 से बाहर निकल रही थी. साथ में सबइंसपेक्टर नरेंद्र और लेडी हैडकांस्टेबल सुशीला भी थे. पांचों लोगों ने सड़क के पार पहुंच कर एक दुकान पर जूस पीया. वहां से निकल कर वे आटो पकड़ने के लिए आगे बढ़ ही रहे थे कि तभी पीछे से आए 2 मोटरसाइकिल सवारों ने ममता को 3 गोलियां मारीं.

एसआई नरेंद्र ने हमलावरों को मारने के लिए अपना रिवौल्वर निकालने की कोशिश की, लेकिन वे ऐसा कर पाते इस से पहले ही हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी. वह सड़क पर ही ढेर हो गए. हेडकांस्टेबल सुशीला ने सरोज को बदमाशों की गोलियों से देवेंद्र सड़क से पत्थर उठाने के लिए नीचे झुका तो गोलियां उस के सिर के ऊपर से गुजर गईं. हमलावर उन पर और भी गोलियां चलाना चाहते थे, लेकिन गोलियां खत्म होने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए.

योजना बना कर किया हमला

हमलावरों के भाग जाने के बाद हैडकांस्टेबल सुशीला जैसेतैसे घायल ममता और सबइंसपेक्टर नरेंद्र को उठा कर पीजीआई रोहतक ले गई. लेकिन दोनों को बचाया नहीं जा सका. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हडंकंप मच गया. हमलावरों को पकड़ने के लिए रोहतक में सड़कों पर बैरिकेड्स लगा कर तलाशी अभियान चला, लेकिन वे भागने में कामयाब रहे.

8 अगस्त को लेडी हेडकांस्टेबल सुनीता के बयान पर ममता और सबइंसपेक्टर नरेंद्र की संदिग्ध हत्यारों के विरुद्ध भादंवि की धारा 333, 353, 196, 307, 302, 34 और 120बी के तहत दर्ज कर के तफ्तीश शुरू की गई. इस केस की जांच आर्यनगर की थानाप्रभारी सुनीता को सौंपी गई.

रोहतक के एसपी जशनदीप सिंह ने डीएसपी रमेश कुमार को निर्देश दिया कि इस केस से संबंधित सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें. थानाप्रभारी सुनीता ने हमलावरों की तलाश में ममता के पिता रामकेश के गांव गद्दीखेड़ा में दबिश दी. वहां वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल तो मिल गई पर वहां से कातिल फरार हो चुके थे.

रामकेश और सरिता से पूछताछ करने के बाद दोनों को 10 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया. उसी दिन ममता के दत्तक पिता को भी पुलिस उन के घर से गिरफ्तार कर थाना आर्यनगर ले आई.

चारों से प्रारंभिक पूछताछ के बाद ममता हत्याकांड के पीछे यह बात निकल कर सामने आई कि उस की हत्या कराने में मुख्य हाथ उस के दत्तक पिता रमेश का हाथ था. उस की हत्या 7 लाख की सुपारी दे कर कराई गई थी, जिस में मुख्य भूमिका ममता के मौसेरे भाई मोहित उर्फ मंगलू ने निभाई थी.

मंगलू ने उत्तर प्रदेश के 2 पेशेवर शार्पशूटरों को ममता की हत्या की सुपारी दी थी. दोनों शूटर हत्या के एक दिन पहले गद्दीखेड़ी गांव आ गए थे. मोहित ने अगले दिन उन के लिए एक बाइक मुहैया करवाई और खुद शूटर्स की कार में बैठा रहा.

घटना वाले दिन जब ममता अपनी सास के साथ सड़क पर चल रही थी तो उस से कुछ ही दूरी पर खड़े उस के दत्तक पिता ने हत्यारों को ममता की ओर इशारा कर के उसे गोली मारने का इशारा किया.
उस का इशारा पाते ही मोटरसाइकिल सवार हत्यारों ने पहले तो ममता पर गोली चलाई, लेकिन जैसे ही उन्होंने सबइंसपेक्टर नरेंद्र को रिवौल्वर निकालते देखा तो उन्हें भी गोली मार दी. इस के बाद सभी गद्दीखेड़ा गांव पहुंचे.

वहां खाना खाने के बाद वे अपनी कार से फरार हो गए. पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया कि ममता के मौसेरे भाई मोहित का मोबाइल फोन गद्दीखेड़ा गांव पहुंचने तक औन था. वहां पहुंचते ही उस का मोबाइल औफ हो गया था. घटना वाले दिन उस की आखिरी लोकेशन गद्दीखेड़ा गांव में ही थी.
उधर पोस्टमार्टम के बाद पुलिस की निगरानी में ममता की लाश का अंतिम संस्कार कर दिया गया. उस की लाश को मुखाग्नि उस के ताऊ के लड़के नान्हा ने दी.

सबइंसपेक्टर नरेंद्र की लाश को उन के घर वालों के हवाले कर दिया गया, जिन्होंने उन का अंतिम संस्कार पुलिस सम्मान के साथ किया. उस समय कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वहां मौजूद थे. शहीद सबइंसपेक्टर नरेंद्र के परिवार वालों को सरकार की ओर से 60 लाख रुपए का अनुदान देने की घोषणा की गई है.

चूंकि नरेंद्र अनुसूचित जाति के थे, इसलिए इस दोहरे हत्याकांड में अब एससी/एसटी एक्ट जोड़ कर आगे की जांच रोहतक के डीएसपी रमेश कुमार करेंगे. ममता का पति सोमबीर और ससुर जयराज अभी भी सुनारिया जेल में बंद हैं. उन्हें अपने घर वालों की हत्या किए जाने की आशंका है. इस हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों की जोरशोर से तलाश जारी है.