उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के विधायक मोबाइल मैसेज और वाट्सएप कौल से खौफ में हैं. धमकी भरे मैसेज और कौल में विधायकों से रंगदारी मांगी जा रही है. आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे विधायकों की संख्या बढ़ती जा रही है. विधायक इस कदर खौफ में हैं कि वह अब समय बेसमय फोन उठाने से बचने लगे हैं. ऐसे विधायकों की संख्या 22 हो गई है. धमकियों का सिलसिला जारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग और डीएम को विधायकों की सुरक्षा को सख्त करने का संदेश दिया है. उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग ने इसको गंभीरता से लेकर स्पेशल टास्क फोर्स, एटीएस और दूसरी खुफिया एजेंसियों को जांच का काम सौप दिया है. शुरुआती जानकारी में फोन से पाकिस्तान और माफिया दाउद का संबंध सामने आ रहा है.

विधायकों में बढ़ते खौफ को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि ‘प्रदेश में भय का माहौल और भी बढ़ गया है. जहां विधायकों से खुलेआम रंगदारी मांगी जा रही हो, रिटायर डीजीपी के घर डकैती जैसी घटना घट जाये, वहां आम आदमी का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है.’ रंगदारी के लिये आने वाले मैसेजों में विधायकों को 10 लाख देने के लिये कहा जा रहा है. पुलिस अभी तक किसी भी शिकायत की तह तक नहीं पहुंच पाई है.

माफिया दाउद का नाम रंगदारी मांगने की घटना में आने के बाद विधायकों में खौफ है. कुछ लोगों का मानना है कि योगी राज में भाजपा विधायक बहुत परेशान हैं. उनकी बात सुनी नहीं जा रही. अब इस मामले के चर्चा में आने के बाद पुलिस और डीएम विधायक की बात सुनने लगे हैं. दूसरे कुछ विधायक भी इसकी आड़ में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना चाह रहे हैं. इस मामले में राजनीतिक मुद्दे भी हैं. पाकिस्तान और दाउद का नाम लेकर कैराना और नूरपुर के विधानसभा उपचुनावों में इस बहाने तुष्टीकरण करने की जुगत भी दिखाई दे रही है.

सीमापार और पाकिस्तान से लड़ाई के लिये तैयार विधायक केवल फोन संदेश से ही खौफ में आ गये यह समझने वाली बात है. रंगदारी के तौर पर दाउद केवल 10 लाख की डिमांड करेगा यह सोचने वाली बात है. सरकार को पूरे मामले का पर्दाफाश करना चाहिये. जब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होगा विधायकों पर खौफ बढ़ता रहेगा. विधायकों में फैले इस खौफ से प्रदेश सरकार के भरेासे और इकबाल पर असर पडा रहा है.

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