सरिता विशेष

मूलतः अमृतसर निवासी अदाकारा रिचा चड्ढा का इन दिनों धार्मिक स्थलों के प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव नजर आ रहा है. सूत्रों की माने तो जब वह अमृतसर रहा करती थी, तब वह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने नहीं गयी. लेकिन ‘‘गैंग आफ वासेपुर’’ व ‘‘मसान’’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर कान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सहित कई फिल्म समारोहों में शिरकत करने के बाद रिचा चड्ढा का धार्मिक स्थलों के प्रति कुछ ज्यादा ही रूझान हो गया है. इन दिनों वह अमृतसर में फिल्म ‘‘सरबजीत’’ की शूटिंग कर रही हैं और शूटिंग बीच में ही छोड़कर एक दिन वह स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंच गयीं तथा वहां पर लंगर का हिस्सा बनकर भोजन भी किया.

सूत्रों की माने तो जब से रिचा चड्ढा को ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ फिल्म ‘‘सरबजीत’’ करने का अवसर मिला है, तब से वह कुछ ज्यादा ही चिंतिंत हैं. रिचा चड्ढा के नजदीकी सूत्रों के सूत्रों के अनुसार रिचा चड्ढा चाहती हैं कि फिल्म ‘सरबजीत’ में ऐश्वर्या राय से ज्यादा उनके अभिनय की तारीफ हो. इसीलिए वह हर धार्मिक स्थाल का चक्कर लगा रही हैं. मगर खुद रिचा चड्ढा कहती हैं-‘‘मैं पहली बार स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंची और मुझे बहुत ही ज्यादा रहस्यमय व सुखद अनुभव हुए.

इस अनुभव को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. इस तरह के अनुभव मुझे पहली बार नही हुए. बल्कि मैं जब भी किसी धार्मिक स्थल पर गयी हॅूं, तो मुझे सुखद व रहस्यमय अनुभव हुए हैं. मैं अपने आपको धन्य मानती हूं कि मुझे स्वर्ण मंदिर में कुछ समय बिना किसी तरह की बंदिश के बिताने का मौका मिला. स्वर्ण मंदिर ही क्यों किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने के पीछे मेरी कोई वजह नहीं होती है. मैं किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करती हूं. मैं तो सिर्फ अपने हिस्से के काम को बेहतर तरीके से अंजाम देने का प्रयास करती हूं. मैं एक धार्मिक इंसान हूं और ईश्वर की आराधना करने से मुझे सकून मिलता है.’