1996 में प्रदर्शित गुलजार की निर्देशित फिल्म ‘‘माचिस’’ से अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता जिम्मी शेरगिल ‘‘माचिस’’ के बाद कई फिल्मों में अपनी बेहतरीन अभिनय प्रतिभा का जलवा बिखेरते आए हैं. उन्हें जितना संजीदा किरदारों में पसंद किया जाता है, उतना ही हलके फुलके किरदारों में भी पसंद किया जाता है. वह जो अच्छा काम कर रहे हैं, उसके पीछे उन्हे गुलजार से मिली सीख है.

खुद जिम्मी शेरगिल ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए कहा-‘‘जब गुलजार साहब ने मुझे फिल्म ‘‘माचिस’’ में काम दिया था, तब उन्होंने मुझे दो महत्वपूर्ण सीख दी थी. जिन्हें मैं अपने करियर में लागू करने की कोशिश कर रहा हूं. उनकी बातें मेरे करियर पर लागू होती हैं. पहला कि कलाकार के तौर पर घर पर कभी भी खाली मत बैठो. काम करते रहो. कलाकार के लिए सबसे बुरी बात यही है कि वह घर पर खाली बैठा है. कोई भी दिक्कत आएगी, तो काम आपको हमेशा बचाएगा. दूसरी चीज किसी भी फिल्म को अपनी किस्मत मत बनने दो. मतलब कि एक फिल्म के सफल होने पर सफलता के नशे में पागल नहीं होना चाहिए. या फिल्म के असफल होने पर डिप्रेशन में नहीं जाना चाहिए.

जब आप एक फिल्म की शूटिंग खत्म कर दूसरी फिल्म की शूटिंग शुरू करते हैं, तो आपका ध्यान अपने आप दूसरी जगह चला जाता है. तो जिंदगी में आप आगे बढ़ जाते हैं. शूटिंग खत्म करने के साथ आप अपना काम कर चुके होते हैं. बाकी फिल्म की अपनी किस्मत. पर कलाकार के तौर पर आपको निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए.’’

जिम्मी शेरगिल ने आगे कहा-‘‘मुझे उन किरदारों को करने में ज्यादा मजा आता है, जिन्हें निभाने के बाद चेहरे पर भी खुशी आए. यही वजह है कि मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे संजीदा किस्म के किरदार निभाने हैं. जबकि ज्यादातर फिल्मकार मेरे पास संजीदा किरदार लेकर आते हैं. पर जब मेरी पसंद का मसला आता है, तो मैं हल्की फुल्की फिल्में ज्यादा चुनता हूं. ’’