सरिता विशेष

काजल अग्रवाल अपनी अगली फिल्म ‘दो लफ्जो की कहानी’ में ‘ब्लाइंड गर्ल’ की भूमिका निभाकर इतनी प्रभावित हुई हैं कि उन्होंने अपनी आंखे दान करने का संकल्प ले लिया है. वह कहती हैं कि अपनी भूमिका को लेकर मैंने ‘विजुअली इम्पेयर्ड’ छात्रों के बीच काफी समय बिताया है, उनके हाव-भाव को करीब से देखा है. मैं बहुत इमोशनल हो गई हूं कि कैसे वे बिना आँखों के भी आत्मनिर्भर हैं.

इस काम में रणदीप हुड्डा ने भी साथ दिया है, उनका कहना है कि इस फिल्म के ज़रिये मैंने जाना है कि उनकी दुनिया कैसी है. मैं भी अपनी आंखें डोनेट करना चाहता हूँ. ये एक छोटा सा प्रयास मेरी तरफ से उनके लिए रहेगा.