कठिन मेहनत का कोई पर्याय नहीं होता, जो इंसान इस बात को समझ लेता है, उसे सफलता की सीढ़ियां चढ़ने से कोई रोक नहीं सकता. इसी बात की जीती जागती मिसाल हैं, सहेब दास माणिकपुरी.

छत्तीसगढ़ राज्य के भाटापारा के करीब भैसा सकरी गांव निवासी साहेब दास मानिकपुरी जब कुछ वर्ष पहले मुंबई पहुंचे थे, उस वक्त वह शुद्ध हिंदी नहीं बोल पाते थें. एक मित्र की मदद से उन्हें ‘इस्कॉन’ मंदिर में ‘कंस वध’ नामक नाटक में अभिनय करने का मौका जरुर मिला, पर उनकी हिंदी को लेकर सवाल उठ रहे थे. ऐसे में हिम्मत हारने की बजाय साहेब दास ने उस वक्त के रंगकर्मी व अब सफल भोजपुरी अभिनेता संजय पांडे,  रंगकर्मी व लेखक राजेश दुबे तथा सशक्त रंगकर्मी स्व. पं. सत्यदेव दुबे की छत्रछाया में काम कर अपनी हिंदी पर इतनी मेहनत की आज वह शुद्ध व क्लिश्ट हिंदी बोलते हैं.

साहेब दास माणिकपुरी की मेहनत का नतीजा है कि वह अब तक ‘सीआईडी’, ‘एफआईआर’, ‘तोता वेड्स मैना’ और ‘भाभीजी घर पर हैं’ सहित दर्जन भर से अधिक सीरियलों में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं. वह ‘मर्दानी’, ‘हिस्स’, ‘हल्ला बोल’, ‘फैमिली’, ‘जयंता भाई की लव स्टोरी’, ‘फंस गए रे ओबामा’, ‘रमैया वस्तवैया’ सहित कुछ फिल्में कर चुके हैं. तो वहीं वह प्रदीप सरकार के निर्देशन में कई विज्ञापन फिल्मों में अमिताभ बच्चन, इरफान खान, रानी मुखर्जी, कंगना रानौट, ईशा कोपीकर,सचिन तेंदुलकर के साथ स्क्रीन शेयर किया है.

साहेगदास माणिकपुरी की मेहनत व लगन का ही परिणाम है कि इन दिनों वह ‘‘लाइफ ओ के’’ पर प्रसारित हो रहे हास्य सीरियल ‘‘मे आई कम इन मैडम’’ में वह खिलौनी के चरित्र में काफी पसंद किए जा रहे हैं.

अपनी सफलता की चर्चा करते हुए साहेब दास माणिकपुरी कहते हैं, ‘‘सब कुछ मेरे माता पिता व गुरूजनों का आशीर्वाद है. मैंने मुंबई में रंगमंच से जुड़कर रंगकर्मी पं. सत्यदेव दुबे, राजेश दुबे, संजय पांडे, दिलीप शाह और मनीष मिश्रा जी से अभिनय की बारीकियों सीखता गया. इनके मागदर्शन से मेरे अभिनय कौशल में निखार आता गया. संघर्ष के दौरान मेरे बड़े भाई कुमार मानिकपुरी का बहुत सपोर्ट मिला, जो एक लेखक हैं. अपनी माटी से जुडे़ मुंबई में रहते हुए उन्होंने छतीसगढ़ी में मानिक खंड लिखा है. और अब गीता भागवात लिख रहे हैं. इसके अलावा मशहूर फिल्म निर्देशक प्रदीप सरकार के प्रोत्साहन के चलते आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं. निर्देशक शशांक बाली सर की सभी सीरियल करते आ रहा हूं. वह शांतभाव के बेहद कूल इंसान हैं. वह अपने कलाकार को नर्वस नहीं होने देते. पर अभी मुझे बहुत आगे जाना है.’’

परिश्रम के बिना कोई मुकाम नहीं मिलता में यकीन करने वाले साहेब दास माणिकपुरी ने हाल ही में इरफान खान के साथ फिल्म ‘‘रायता’’ की भी शूटिंग पूरी की है.

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