सरिता विशेष

बहुत सारे राजनीतिक दल अब तब महिला नेताओं को केवल शो पीस ही समझते रहे है. हाल के कुछ सालों में जिस तरह से महिला वोटर जागरूक हो रहे है. ऐसे में राजनीतिक दलों ने महिला वोटर को रिझाने के लिये महिला नेताओं को चुनावी मैदान में उतारना शुरू कर दिया है. समाजवादी पार्टी ने जिस तरह से महिला आरक्षण का विरोध किया था, उससे पार्टी पर महिला विरोधी होने का ठप्पा लग गया था. बिहार चुनाव में सबसे अधिक वोट से जो सीटे जीती गई, वह भी महिला बाहुल्य सीटें थी. इससे महिला वोटर की राजनीतिक जागरूकता का अंदाजा लग जाता है. उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार ने विधनसभा चुनाव 2017 के लिये 142 उम्मीदवारों के नाम घोषित किये, तो महिलाओं की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत थी. यह सभी वह सीटे हैं, जिन पर समाजवादी पार्टी पिछला चुनाव हारी थी.

समाजवादी पार्टी को पता है कि लोग सरकार से खफा हैं. ऐसे में संगठन के बडे पदों पर बैठे लोगों को चुनाव मैदान में उतार कर उसने अपनी आक्रामक रणनीति को दिखा दिया है. जिन महिलाओं को पहली सूची में टिकट दिया गया है उनमें अरूणा तोमर, अंवेश कुमार, उमा किरन, चिंता यादव, रीबू श्रीवास्तव, सुनीता चैहान, बिमला राकेश, हेमलता दिवाकर, अनीता यादव, मनीषा दीपक, ज्योति लोधी और रीता बहादुर सिंह प्रमुख है. समाजवादी महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर श्वेता सिंह को राजधनी लखनऊ की पूर्वी विधानसभा सीट से टिकट दिया है. श्वेता सिंह उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य है. उनकी छवि साफसुथरी और युवा नेताओं की है. राजधनी लखनऊ के लिये यह पहला नाम है. श्वेता सिंह पीएचडी और एमबीए की पढाई कर चुकी है.

लखनऊ पूर्वी से प्रत्याशी बनाई गई श्वेता सिंह कहती है ‘समाजवादी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बहुत सारे काम किये है. इससे महिलाओं में सरकार के प्रति अच्छी छवि बनी है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की युवा और विकासवादी छवि से पार्टी को लाभ होगा. आईटी सिटी, मेट्रो, समाजवादी पेंशन जैसी योजनाओं से लोगों लाभ हो रहा है. हम सरकार के अच्छे काम से विरोधी दलों का मुकाबला करेगे.