उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा के चुनाव प्रचार देखकर ऐसा लगता है जैसे यह लोकसभा के चुनाव हों. भाजपा पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तरह से अपने भाषण दे रहे हैं जैसे वह खुद मुख्यमंत्री पद के दावेदार हों. भाजपा के स्टार प्रचारकों के नामों वाली सूची में वैसे तो बहुत सारे नाम हैं पर सबसे अहम नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का है. इनके प्रभाव के सामने उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता फकत तमाशाई नजर आ रहे हैं. विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के बढ़ते महत्व ने प्रदेश स्तर के नेताओं को हाशिये पर ढकेल दिया है.

खुद प्रधानमंत्री मोदी भी अपने बयानों से यही जाहिर कर रहे हैं कि विधानसभा चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश के विकास की जिम्मेदारी उनकी अपनी है. राजधानी लखनऊ से लगे बाराबंकी जिले में चुनाव प्रचार करते प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘मैं उत्तर प्रदेश का गोद लिया बेटा हूं. यह गोद लिया बेटा मां बाप को छोड़ेगा नहीं. जो खुद का बेटा नहीं कर पाया वह गोद लिया बेटा कर दिखायेगा.’ प्रधानमंत्री के बयान से साफ है कि उत्तर प्रदेश में जो भी नेता मुख्यमंत्री बनेगा वह नाम का होगा. असल राज नरेन्द्र मोदी ही करेंगे.

विरोधी नेता प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के बयान को अपने अंदाज में पेश कर रहे हैं. बसपा नेता मायावती कहती हैं ‘गोद लिया बेटा बताना मोदी का नाटक है. लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश ने सबसे अधिक सीटें भाजपा को दी थी. लोकसभा चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश को क्या मिला? मोदी ने लोकसभा चुनाव में किया अपना कौन सा वादा निभाया? यह उत्तर प्रदेश की जनता देख रही है. लोकसभा चुनाव की ही तरह मोदी विधानसभा चुनाव में भी वादा कर रहे हैं. प्रदेश के लोग अब इस झांसे में आने वाले नहीं है.’

सपा नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी के बयानों का जवाब देते कहा कि मोदी जी केवल अचछा बोलते हैं. अच्छे दिन लाने का वादा करके लोकसभा में वोट हासिल किया और फिर अच्छे दिन के नाम पर लोगों को लाइन में लगाने का काम किया. विधानसभा चुनाव में लोकसभा वाला झांसा नहीं चलेगा. यह चालू पार्टी के लोग हैं झूठ बोल कर वोट लेने में महिर हैं. अब इनकी पोल खुल चुकी है.

राजनीतिक समीक्षक योगेश श्रीवास्तव कहते हैं ‘विधानसभा चुनाव में इसके पहले किसी प्रधानमंत्री ने इतना अधिक व्यापक प्रचार नहीं किया है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भाजपा ने विधानसभा चुनावों में किसी नेता को अपना चुनावी चेहरा नहीं बनाया. अब विधानसभा चुनावों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मोदी-शाह की जोड़ी पर है. उत्तर प्रदेश का न होने के बाद भी दोनों ही नेता उत्तर प्रदेश की बोली में भाषण कर जनता का दिल जीतने की कोशिश में रहते हैं. कांग्रेस-सपा गठबंधन पर ही उनका सबसे बड़ा हमला हो रहा है. बसपा पर भाजपा के यह नेता सीधे हमले से बच रहे है. इससे यह लगता है कि चुनाव के बाद के लिये भाजपा बसपा के साथ तालमेल का रास्ता खुला रखना चाहती है. बसपा इस बात से बचना चाहती है इसीलिये प्रधानमंत्री के बयान की पहली आलोचना मायावती की तरफ से आती है. बसपा को यह डर है कि भाजपा के साथ पुराने रिश्तो के चलते मुसलिम मतदाता बसपा से दूरी न बना ले.’