सरिता विशेष

समाजवादी पार्टी में परिवार के अंदर चल रही रार अब खुलकर बाहर आ गई है. अखिलेश यादव ने प्रदेश के मुख्यमंत्री की हैसियत से जब शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बाहर किया, तो सपा प्रमुख मुलायम सिह यादव ने रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर कर दिया. यही नहीं, शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव को भाजपा के साथ मिला हुआ बता कर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया और तर्क दिया कि वह अपने पुत्र और बहू को सीबीआई जांच से बचाने के लिये भाजपा से मिलकर मुख्यमंत्री अखिलेश को गुमराह कर रहे हैं. रामगोपाल भी ऐसे आरोप शिवपाल पर लगाते अपने पत्र में लिखते हैं कि मुलायम सिंह यादव इस समय ‘आसुरी शक्तियों’ से घिरे हुये हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल और उनके समर्थक मंत्रियों को यह कहते बाहर किया कि यह लोग अमर सिंह के कहने पर काम कर रहे हैं.

सपा परिवार की इस लड़ाई में बारबार बाहरी लोगों को नाम लिया जा रहा है. असल में परिवार में विवाद की वजह घर के अंदर है. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का परिवार 2 खेमे में बंटा हुआ है. एक में अखिलेश और रामगोपाल यादव हैं. दूसरे खेमे में मुलायम की दूसरी पत्नी साधना, बहू अपर्णा बेटा प्रतीक और भाई शिवपाल यादव हैं. दोनो गुटों के बीच असल टकराव उत्तराधिकार का है. अखिलेश यह बात जानते हैं कि अगर असल बात सामने रखी गई तो पिता मुलायम सीधे निशाने पर आ जायेंगे. ऐसे में सपा प्रमुख को चाहने वाले नेता और कार्यकर्ता उनसे कट जायेंगे. ऐसे में अखिलेश अकेले पड़ जायेंगे. इस लिये बारबार वह बाहरी लोगों काम नाम ले रहे हैं.

घर की लड़ाई सडक पर आई, तो कार्यकर्ताओं का टकराव होने लगा. इससे पार्टी सहम गई. मुलायम सिंह यादव को अखिलेश के खिलाफ खुलकर सामने आना पडा. इस लड़ाई में अखिलेश अकेले पड़ गये हैं. सपा प्रमुख मुलायम ने कहा कि वह अमर सिंह और शिवपाल सिंह यादव को छोड़ नहीं सकते. ऐसे में मुलायम और अखिलेश के बीच टकराव टूट की कगार पर आ गया है. मुलायम सिंह परिवार के बीच टूटन को भले ही रोक ले पर जो गांठ परिवार के बीच पड़ गई वह बनी रहेगी. ऐसे में कार्यकर्ता और समर्थक अमंजस में है कि वह किसकी तरफ रहे. नेताओं से ज्यादा उनके बीच टकराव दिख रहा है.