सरिता विशेष

महाभारत में ‘सर्प यज्ञ’ की एक कथा है. महाभारत में लिखा है, ‘‘सर्प यज्ञ के लिए मंत्र पढे़ जाने लगे तो सांपों के हृदय हिलाने वाली आहुतियां दी गईं. आह्वान करते ही सब सांप विवश हो कर तरहतरह के शब्द करते हुए आआ कर अग्निकुंड में गिरने लगे. ‘‘तक्षक नाम का एक नाग अग्निकुंड से बचने के लिए भाग कर इंद्र के पास जा कर छिप जाता है. इंद्र उसे शरण देता है. तक्षक डर कर इंद्र के पास गया. इंद्र ने कहा, नागराज, तुम को सर्प यज्ञ से कुछ भी डर नहीं है. मैं ने पहले ही तुम्हारी ओर से विधाता को प्रसन्न कर लिया है. तुम कुछ चिंता न करो. इस प्रकार के आश्वासन पा कर नागराज तक्षक इंद्र के लोक में सुख से रहने लगा.’’ कुछ समय बाद एक अद्भुत घटना हुई. डर से व्याकुल तक्षक को इंद्र ने छोड़ दिया था तो वह अग्नि में नहीं गिरा. आकाश में ही ठहरा रहा. आकाश में ही क्यों रुका रहा? सवाल उठे कि वह बच क्यों गया? क्या मंत्रज्ञ ब्राह्मणों के मंत्र शक्तिहीन हो गए थे? पता चला कि उसे आस्तीक नामक ऋषिकुमार, स्वयं राजा और ब्राह्मणों ने मिल कर बचा लिया.  

महाभारत के ‘सर्प यज्ञ’ का किस्सा और ब्रिटेन में शरण लिए बैठे ललित मोदी की मदद में कई नेताओं के नामों के खुलासे में एक तरह की समानता का दिलचस्प मामला दिखाई देता है. 14 जून को ब्रिटेन के संडे टाइम्स में ज्यों ही भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और ब्रिटिश सांसद कीथ वाज के बीच पत्रव्यवहार व फोन का भंडाफोड़ हुआ तो भारतीय राजनीति में खलबली मच गई. अखबार ने खुलासा किया था कि सुषमा स्वराज ने भारत से भागे हुए आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी को वीजा दस्तावेज दिलाने में मदद की थी. इस खबर के  बाद तहलका मच गया. 2 दिन बाद खबर आई कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने भी ललित मोदी की मदद की थी. साथ ही, सिंधिया के सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह से ललित मोदी के अवैध कारोबारी सांठगांठ के राज भी खुलने लगे. इन खुलासों से भारत की राजनीति गरमा गई. पक्षविपक्ष में आरोपप्रत्यारोप का दौर चल पड़ा.  विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस ने एनडीए सरकार को घेर लिया. सुषमा स्वराज और वसुंधरा को अनुचित काम का दोषी बता कर इस्तीफे की मांग की जाने लगी. कांग्रेस ने दिल्ली में सुषमा स्वराज के घर के बाहर प्रदर्शन किया और जयपुर में वसुंधरा के खिलाफ प्रदर्शन किया गया. आरोपी नेताओं के पुतले फूंके गए. इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी पर भी सवाल उठाए गए. विरोधी दलों के साथसाथ सुषमा की स्वयं की पार्टी के लोग भी उन के खिलाफ बोलने लगे. लेकिन सचाई, नैतिकता, ईमानदारी और उच्च आदर्शों की बात करने वाला संघ सुषमा के समर्थन में आ खड़ा हुआ. दरअसल, आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी का कहना था कि उन की पत्नी को कैंसर था और पुर्तगाल में उन का औपरेशन होना था, इसलिए वे पत्नी के पास जाना चाहते थे ताकि सर्जरी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर सकें पर विपक्ष का दावा था कि पुर्तगाल में बालिग की सर्जरी के मामले में हस्ताक्षर की आवश्यकता ही नहीं पड़ती. पर मोदी लिस्बन गए और पत्नी की सर्जरी करा कर तीसरे दिन छुट्टियां मनाने देशाटन पर निकल पड़े. फिर लौट कर लंदन आ गए.

सुषमा का पेंच

इस मामले में सुषमा स्वराज ने ब्रिटिश सांसद कीथ वाज से ललित मोदी की मदद की सिफारिश की थी. कीथ वाज ने 31 जुलाई, 2014 को माइग्रेशन अधिकारी सराह राप्सन से कहा कि भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नेललित मोदी के पुर्तगाल जाने के प्रार्थनापत्र को स्वीकार करने को कहा है. इस से भारत को कोई आपत्ति नहीं है. ‘सर्प यज्ञ’ की तर्ज पर इस ‘ललितायम यज्ञ’ में सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे के अलावा एक के बाद एक और नाम सामने आने लगे. ललितायम यज्ञ के अग्निकुंड की आग में कुछ नेता कम, तो कुछ नेता अधिक झुलसने लगे. आहुतियों के रूप में क्रिकेट से जुड़े नेताओं के नाम सामने आने लगे. मामले में सुषमा स्वराज का पारिवारिक कौशल खूब उजागर हुआ. सुषमा स्वराज के पति एवं मिजोरम के राज्यपाल रहे स्वराज कौशल वर्षों से मोदी के वकील रहे हैं. उन की एडवोकेट बेटी बांसुरी कौशल ने पासपोर्ट मामले में हाई कोर्ट में मोदी की पैरवी की थी. अगस्त 2013 में ललित मोदी ने ब्रिटिश सांसद कीथ वाज से सुषमा स्वराज और उन के पति स्वराज कौशल द्वारा अपने भतीजे के ससेक्स कालेज ब्रिटेन में ऐडमिशन किए जाने की सिफारिश भी की थी. समूची सरकार अग्निकुंड के घेरे में आ खड़ी हुई. ललित मोदी के पासपोर्ट मामले में सरकार की ओर से अदालत में किसी तरह का विरोध नहीं किया गया. वित्त मंत्री कह चुके हैं कि मोदी के पासपोर्ट मामले में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देना विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी थी.  यज्ञ की आंच में झुलसी सुषमा स्वराज ने भी कहा कि उन्होंने ‘मानवीय आधार’ पर मोदी की मदद की थी.

इधर, वसुंधरा राजे और उन के सांसद पुत्र पर यज्ञ की आंच ललित मोदी से ‘टेक ऐंड गिव’ के कारण आई है. कहने को वसुंधरा मात्र एक दस्तावेज देने की दोषी बताई जा रही हैं पर उन के पुत्र दुष्यंत सिंह के नियंता हेरिटेज होटल्स प्रा. लि. में 1,100 करोड़ रुपए गैर कानूनी तरीके से मोदी के आनंद होटल्स के जरिए पहुंचाए जाने का आरोप है. यह पैसा मौरीशस और सिंगापुर की कंपनियों के ठेके से ललित मोदी के पास पहुंचा था. कहा जाता है कि दुष्यंत सिंह की इस कंपनी के 10 रुपए के बदले 96 हजार रुपए में शेयर खरीदे गए थे. इस कंपनी को पहले बिना किसी सिक्योरिटी के 3.80 करोड़ रुपए का लोन और फिर 9.29 करोड़ रुपए का निवेश दिखाया गया था. यह मामला प्रवर्तन निदेशालय के अधीन है. अप्रैल 2011 को वसुंधरा राजे ने गोपनीयता की शर्त पर मोदी को ब्रिटेन में रहने के लिए समर्थन करने की ब्रिटिश अधिकारियों से सिफारिश की थी. पहले तो सिंधिया ने ऐसे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर से इनकार किया पर जब विपक्ष ने दस्तावेज दिखाए तो उन्होंने मान लिया. वसुंधरा के पिछले कार्यकाल में ललित मोदी और उन की निकटता तथा सरकार में मोदी के हस्तक्षेप को ले कर काफी विवाद हुए थे. मोदी को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनाने में तब की राजे सरकार ने विशेष दिलचस्पी ली थी.

इस ललितायम यज्ञ में सुषमा और वसुंधरा पर पड़ने वाली आंच से आईपीएल के काले कारोबारियों, बेईमानों, राजनीतिबाजों में खलबली मच गई. ललितायम अग्निकुंड के इर्दगिर्द कई आरोपी आने लगे. इन में क्रिकेट से जुड़े स्वयं ललित मोदी के समय बीसीसीआई के चेयरमैन रहे शरद पवार, कांग्रेसी राजीव शुक्ला, प्रफुल्ल पटेल, शशि थरूर जैसे नेताओं की ओर भी क्रिकेट के नाम पर काला कारोबार करने और सांठगांठ कर एकदूसरे की मदद के आरोपों की समिधा डाली जाने लगीं. मामले में लोग एकदूसरे के बचाव में भी दिखे. बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे शरद पवार ने ललित मोदी और सुषमा स्वराज का समर्थन किया. शरद पवार मोदी से लंदन में मिले भी थे. मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया भी ललित मोदी से लंदन में मिले थे. चूंकि आईपीएल के आविष्कारक ललित मोदी ही थे, यह भद्र जनों का कहलाने वाला कोई क्रिकेट नहीं था, यह क्रिकेट के नाम पर वैधअवैध तरीके से पैसा कमाने का जरिया मात्र था, जिस में राजनीतिबाज, फिल्मी स्टार, कौर्पोरेट, नौकरशाह, सट्टेबाज, नशे का धंधा करने वाले और माफिया मिल कर चांदी कूटने लगे. इन लोगों का धंधा चमक उठा. ललित मोदी कभी पी चिदंबरम का तो कभी अरुण जेटली का नाम लेते.

क्यों भागे मोदी

दरअसल, आईपीएल के टैलीविजन प्रसारण का अधिकार वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप और मल्टीस्क्रीन मीडिया को मिले थे. बीसीसीआई ने 468 करोड़ रुपए के इस घोटाले में ललित मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. बोर्ड ने एक जांच समिति बनाई जिस में अरुण जेटली, ज्योतिरादित्य सिंधिया थे. समिति ने 134 पेज की जांच रिपोर्ट पेश की थी. इस में आर्थिक अपराध के कई गंभीर आरोप सही बताए गए थे. बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने पाया कि यह धन या इस का बड़ा हिस्सा वास्तव में ललित मोदी को ही मिला है. लिहाजा, उन के खिलाफ मनी लौंडिं्रग का मामला दर्ज किया गया. जांच में ललित मोदी पर कोच्चि टस्कर्स का आरोप भी सही पाया गया जिस में विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी की बात सामने आई थी. मोदी ने ब्रिटेन में कहा था कि मंत्री शशि थरूर को पद से हटना पड़ा था, इसलिए यूपीए सरकार के तब के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और फिर वित्तमंत्री बने पी चिदंबरम ने उन के खिलाफ ईडी की कार्यवाही कराई.

ललित मोदी को बीसीसीआई ने आईपीएल के चेयरमैन पद से हटा दिया था और उन्हें 34 पेज का कारण बताओ नोटिस दिया गया. 4 मई, 2010 को ललित मोदी भारत से ब्रिटेन चले गए. 3 मार्च, 2011 को मुंबई में पासपोर्ट औफिस ने प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द कर दिया. मामला कोर्ट में गया. चिदंबरम ने ब्रिटिश चांसलर औफ ऐक्सचेंज को पत्र लिखा था कि अगर ब्रिटेन आर्थिक अपराधों के आरोपी ललित मोदी को बने रहने की इजाजत देता है तो इस से दोनों देशों के संबंधों पर विपरीत असर पड़ सकता है. इस पत्र ने ब्रिटेन में बैठे ललित मोदी के लिए मुसीबत पैदा कर दी लेकिन उन के मित्र रास्ता साफ करने के लिए तिकड़म लगाते रहे. ब्रिटेन में सांसद और ताकतवर हाउस कमेटी के मुखिया कीथ वाज से ललित मोदी के घनिष्ठ रिश्ते बताए जाते हैं. मोदी प्रमुख राजनीतिक व फिल्मी हस्तियों के साथ संबंध बना कर रखने में माहिर हैं. मोदी के पासपोर्ट मामले में सुषमा स्वराज की बेटी अदालत में उन की पैरवी करने लगी यज्ञ की वेदी की लपटों में कांग्रेस भी आ गई. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी और दामाद रौबर्ट वाड्रा को भी शामिल कर लिया गया. स्वयं ललित मोदी ने ट्वीट कर कहा कि उन्होंने लंदन में गांधी परिवार से मुलाकात की थी. वे प्रियंका गांधी और रौबर्ट वाड्रा से अलगअलग मिले थे. यह मुलाकात तब की बताई जब गांधी परिवार सत्ता में था.

मोदी ने कांग्रेस केकपिल सिब्बल से भी इस्तांबुल में मिलने का दावा किया. एक शादी समारोह के दौरान वे उन के साथ 3 दिन तक रहे. कांग्रेसी नेताओं से संबंधों का नतीजा माना जा रहा है कि 2011 से 2014 तक संप्रग सरकार ने मोदी को ब्रिटेन से भारत लाने के लिए कुछ नहीं किया. मोदी का दावा है कि आम आदमी पार्टी के राहुल मेहरा ने आईपीएल में फूड एवं ब्रेवरेज के राइट्स मांगे थे. राहुल मेहरा दिल्ली सरकार की लीगल टीम का चेहरा हैं. उन्होंने मोदी को ई मेल लिखने की बात मान ली है. मददगारों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एस बी सिन्हा का नाम भी है. उन्होंने मोदी को कानूनी राय दी थी. सिन्हा ने 35 पेज की राय दी, ऐसा बताया गया है. ईडी का मानना है कि मोदी ने इसी आधार पर जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं होने का मन बनाया. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सचिव ओमिता पौल का नाम भी मामले में आया है. ओमिता दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर के के पौल की पत्नी हैं. वास्तव में ललित की लीला अपरंपार है. उन्होंने खुद भी लूटा और अपने लोगों को भी लूटने का ग्राउंड मुहैया कराया. कहा जाता है कि ललित मोदी के मुंबई में फोर सीजंस होटल में उन के दफ्तर में जानीमानी हस्तियों की लाइन लगी रहती थी. इन में नेता, फिल्मी सितारे, कौर्पोरेट जगत के नेता और अन्य प्रभावशाली लोग होते थे.

मोदी ने संबंधों का ऐसा नैटवर्क गूंथ लिया था जो एकदूसरे के हितों की नींव पर खड़ा था, जिस में एकदूसरे को संरक्षण व बढ़ावा देने, रिश्तेदारों का खयाल रखने और चापलूसों को खैरात बांटने की अपेक्षा होती थी.इस तरह ललित  मोदी ने आईपीएल के जरिए पैसा कमाने के लिए राजनीति, नौकरशाही, कौर्पोरेट, फिल्म इंडस्ट्री के लोगों के साथ मिल कर एक गठजोड़ बना लिया. यह गठजोड़ कोईर् नया नहीं है. ललित मोदी ने अपने गठजोड़ में किसी पार्टी के साथ कोई भेद नहीं किया. उन के दरबारियों में क्या कांग्रेस, क्या भाजपा, क्या एनसीपी, सब लोग शामिल थे. इस मामले में कांग्रेस जो इतना शोर कर रही है, ललित मोदी के देश से भाग जाने की वह दोषी है. सांप निकल जाने के बाद ईडी द्वारा नोटिस जारी करने की लकीर पीटी जा रही है. सर्प यज्ञ में सर्प अपनेआप आ कर गिर ही नहीं रहे, उस की ऊष्मा का आनंद लेने लगे हैं. मामले में संदेश यही जा रहा है कि पक्षविपक्ष सब मिल कर केवल गाल बजा रहे हैं. वे ललित मोदी को बचाने में लगे हुए हैं.आर्थिक अपराधियों के साथ यह गठजोड़ का मामला है. दौलत पैदा करने वाले ललित मोदी जैसे लोग हर पार्टी और हर नेता के बैडरूम में हैं. वे उसे पालते हैं, शरण देते हैं, बचाव करते हैं क्योंकि उसी की बदौलत उन की तिजोरियों में दौलत खनखनाती है. राजनीति और काले धनकुबेरों के इस गठजोड़ को खत्म करना क्या किसी के वश में है? ‘टेक ऐंड गिव’ इस गठजोड़ का मूल मंत्र है.

मिलीभगत का खेल

ललितायम यज्ञ से भारतीय राजनीति की वह सड़ांध एक बार फिर सामने आ गई जो सत्ता में बैठे नेताओं और अपराधियों के बीच आपसी स्वार्थों के रूप में दबी रहती है. देश में आर्थिक अपराधों की एक लंबी कड़ी है, जिस में राजनीतिबाज, नौकरशाह, कौर्पोरेट और दलाल मिल कर कानून की आंखों में धूल झोंक कर संसाधन, धन लूटने में लगे हैं. इन लोगों को पता है कि उन का कुछ बिगड़़ना नहीं है. अगर मामला खुला भी तो सब मिल कर एकदूसरे को बचाने में लग जाते हैं. यह हमारे व्यवस्था तंत्र की बुनियादी फितरत है. यही वजह है कि  मामले के सामने आने के बाद खूब बोलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह पर ताला सा पड़ गया है. ब्रिटेन में ललित मोदी ऐशोआराम से रह रहे हैं. मशहूर हस्तियों के साथ घूमफिर रहे हैं. पार्टियों में जा रहे हैं. देश में सत्ता में बैठे लोग ही उन्हें बचाने में लगे हैं. ये बचाने वाले उन के अपने ही हैं.