कांग्रेस और सपा गठबंधन के बाद दोनो दलों के प्रमुख नेताओं राहुल गांधी और अखिलेश यादव का रोड शो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित किया गया. होटल ताज में 50 मिनट की प्रेस कांफ्रेंस से लेकर 15 किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान दोनो ही नेताओं ने 3 घंटे तक आपसी दोस्ती, समझदारी और करीबी संबंधों का जोश दिखाने में लगे रहे. होटल ताज में जहां राहुल और अखिलेश ने एक साथ लंच किया, वहीं रोड शो के दौरान दोनों ही नेता एक दूसरे को चाकलेट और च्यूइंगम खिलाते नजर आये. दोनों नेताओं की यह कमेस्ट्री खूब पंसद की जा रही है. दोनों ही नेताओं का पहनावा करीब करीब एक जैसा था. अंतर यह था कि अखिलेश ने काले रंग की सदरी और सफेद रंग का पैजामा पहन रखा था. तो राहुल ने पैजामा की जगह डेनिम की जींस और काली सदरी की जगह काले रंग की जैकेट पहन रखी थी.

हजरतगंज में गांधी प्रतिभा के दर्शन से शुरू हुआ यह रोड शो पुराने लखनऊ के ठाकुरगंज तक गया. 15 किलोमीटर लंबे रोड शो को तय करने में 3 घंटे का समय लगा. घंटाघर पर दोनों नेताओं ने जनसभा में एक दूसरे की तारीफ की. अखिलेश यादव ने साफ कहा कि वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं है. इससे एक बात साफ हो गई की केन्द्र सरकार में सपा को प्रधानमंत्री के रूप में राहुल की दावेदारी से कोई एतराज नहीं है. होटल ताज में प्रेस काफ्रेंस से पहले राहुल और अखिलेश एक साथ बंद कमरे में मिले. इसके बाद एक साथ ही सवालों के जवाब भी दिये. दोनों नेताओं को देखने के लिये भीड जुटी थी.

राहुल और अखिलेश के इस गठजोड़ पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव नाराज हैं, तो राहुल की मां सोनिया गांधी इसके पक्ष में हैं. कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि मुलायम की यह नाराजगी बहुत नहीं चलेगी. एक बार सोनिया जी प्रयास करेंगी तो मुलायम सिंह इस विरोध को छोड़ देंगे. रोड शो के दौरान अखिलेश के बच्चे टीना और अर्जुन एसी रथ के अंदर कांग्रेस नेताओं के साथ सेल्फी खीचतें दिखे. वह बाहर खड़े लोगों के फोटो अपने मोबाइल से खींच रहे थे.

अखिलेश यादव बच्चों और परिवार को समय देने के लिये उनको साथ भी रखते हैं. अपने राजनीतिक सफर के समय मुलायम सिंह यादव कभी इस तरह से अखिलेश को साथ नहीं रखते थे. अखिलेश यादव अपने उस दर्द को अपने बच्चों को अनुभव नहीं करने देना चाहते हैं. अपने परिवार के विवाद पर कुछ समय पहले अखिलेश ने कहा था कि मैं सोचता हूं कि ‘क्या मैं अपने बेटे से कभी इतना नाराज हो सकता हूं’

राहुल और अखिलेश के रोड शो में भीड तो काफी थी. कार्यकर्ताओं में भी जोश था. संख्या की बात करे तो सपा के लोग ज्यादा थे. पुराने लखनऊ में मुसलिम वोटर ज्यादा हैं. इस रोड शो का उद्देश्य भी यही था कि मुसलिम समुदाय पूरी तरह से इस गठबंधन के साथ खड़ा हो. इस प्रयास में भी यह रोड शो काफी सफल रहा है. यह साथ वोट के रूप में कितना बदलेगा इस का सही अंदाजा तभी लग सकेगा जब दोनो नेताओं की बाकी प्रदेश में रैलियां होंगी. यह तय है की आगाज अच्छा है.