दूसरे कई कामों और क्रियाओं की तरह नहाना वह भी अपने  खुद के  बाथरूम में निहायत ही व्यक्तिगत बात और मामला है, जिसका कम से कम स्वच्छ भारत अभियान से कोई ताल्लुक अभी तक तो सरकारी या गैर सरकारी स्तर पर नहीं था पर अब हुआ तो देश भर में हंगामा मचा हुआ है. कोई दूसरा बाथरूम में कैसे नहाता है इस पर जिज्ञासा हो सकती है लेकिन कोई सर्वे या शोध अभी तक इस क्षुद्र विषय पर नहीं हुआ है. नहाने का सबका अपना एक अलग स्टाइल होता है, कोई बाथरूम में घुसते ही नल या फव्वारा चलाकर हर हर गंगे जैसे मंत्रोच्चारण शुरू कर देता है तो कोई बहुत देर तक पानी छपाछप कर अपने आप में नहाने की हिम्मत पैदा करता है कई कई लोग बाथरूम सिंगर होते हैं जो शरीर की सफाई फिल्मी गानों के साथ करते हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह रेनकोट पहन कर शावर के नीचे खड़े होकर नहाते हैं, यह गोपनीय रहस्य राज्यसभा में पीएम नरेंद्र मोदी ने खुलासा किया तो कांग्रेसियों ने अपने नेता की प्रायवेसी भंग होने पर बवाल मचा डाला. सियासी हमाम में आमतौर पर सब नंगे ही माने जाते रहे हैं पर मनमोहन सिंह के लिए बक़ौल मोदी यह एक कला है जिसकी उपयोगिता मंशा या मकसद भ्रष्टाचार के दाग धब्बे ढकना या छुपाना है. खुद नरेंद्र मोदी कैसे नहाते हैं यह न उन्होंने बताया न किसी ने उनसे पूछा. मुमकिन है सूचना के अधिकार के तहत कोई होनहार जिज्ञासु आरटीआई एक्टिविस्ट यह जानकारी भी मांग डाले पर तब तक गंगा जी का करोड़ों क्यूसेक पानी बह चुका होगा.

नहाने के पर्यायवाची शब्दों में अब भ्रष्टाचार करना भी शामिल किया जाना चाहिए, जो शावर के नीचे रेनकोट पहन कर नहाये उसके लिए मनमोहन सिंह का उदाहरण शब्दों के वाक्यों के प्रयोग में करना चाहिए, जो छाता लगाकर नहाये उसे अर्ध-भ्रष्टाचारी माना जाना चाहिए, जो तौलिया लपेटकर स्नान करे उसे एक चौथाई और जो चड्डी यानि अंडरवियर धारण कर नहाये उसे एक तिहाई से कुछ कम भ्रष्टाचारी माना जाना चाहिए. पूर्ण प्राकृतिक अवस्था में नहाने वाले को ईमानदार होने का सर्टिफिकेट देने में हर्ज नहीं और इस बाबत जरूरी है कि सभी नेताओं के बाथरूमों में सीसीटीवी कैमरे फिट किए जाएं और कोई सरकारी एजेंसी नहाने के तरीकों की रिकार्डिंग कर तय करे कि कौन नेता किस हद तक भ्रष्ट है.

नरेंद्र मोदी ने कोई गरिमा भंग नहीं की है बल्कि यह जताने की कोशिश की है कि दैनिक क्रियाओं का भी घपले घोटालों से संबंध होता है या हो सकता है, इसलिए न केवल नहाने बल्कि मंजन ब्रश करने,  बालों में तेल या क्रीम कलर लगाने और कान खुजलाने के तरीके भी नेता के भ्रष्ट होने के पैमाने हो सकते हैं. इस स्नान पुराण की एक गंभीर और चिंतनीय बात मोदी की वह मंशा हो सकती है जिसके तहत सिक्ख समुदाय के लोगों का चुटकुलों के जरिये मजाक बनाया जाता है. सुप्रीम कोर्ट भी  अभी तक इस मसले पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दे पाया है, अगर ऐसा है तो वाकई नरेंद्र मोदी ने बेहद घटिया हरकत की है और उनकी मंशा ऐसी नहीं थी तो उन्हें सार्वजनिक रूप से यह कहने बाध्य किया जाना चाहिए कि वे एक स्वस्थ परिहास कर रहे थे.