बडे लक्ष्य को हासिल करने के लिये एक कदम पीछे हटकर आगे बढने को सबसे बेहतर रणनीति माना जाता है. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के सामने 2017 और 2019 के 2 बडे लक्ष्य हैं. मुलायम अभी खुद को रिटायर नहीं मान रहे. वह खुद को उम्र से 4 साल छोटा मानते हैं. यह दो लक्ष्य उनके जीवन के सबसे बडे लक्ष्य हैं, जिसमें वह अपेक्षित सफलता हासिल करना चाहते हैं.

भाजपा ने अमित शाह के रूप में जिस चतुर चाल के खिलाडी को उत्तर प्रदेश की विधानसभा और बाद में लोकसभा चुनाव के लिये चुना है उसका मुकाबला करने के लिये समाजवादी पार्टी को अमर सिंह की बेहद जरूरत थी. अपनी इसी जरूरत को पूरा करने के लिये मुलायम ने परिवार और पार्टी के लाख विरोध करने के बाद भी अमर सिंह को पार्टी का महासचिव बना दिया है.

अब ‘शिवपाल-अमर‘ की जोडी जहां उत्तर प्रदेश विधानसभा को संभालेगी, वहीं ‘मुलायम-अमर‘ की जोडी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की कुर्सी के राह मजबूत करेगी. राजनीति में अमर सिंह को ‘जोडी ब्रेकर’ के रूप में जाना जाता है. उन पर अमिताभ बच्चन-राजीव गांधी, अंबानी बंधू, जैसी कई जोडियों को तोडने की तोहमत लगती है. मुलायम सिंह यादव के लिये अमर सिंह ‘जोडी ब्रेकर’ नहीं ‘जोडी मेकर‘ हैं. इसलिये वह पूरे भरोसे के साथ उनको पार्टी में लाये और विधानसभा चुनाव का लक्ष्य पूरा करने के लिये अवसर प्रदान किया. मुलायम सिंह का सपना प्रधानमंत्री बनने का भी है जिसको बिना अमर सिंह के पूरा नहीं किया जा सकता.

मुलायम सिंह यादव ने पहले अखिलेश-शिवपाल विवाद और फिर अमर सिंह विवाद को खत्म कर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह संकेत दिया है कि अभी उनकी रिटायर न माना जाये. वह पूरी तरह से सक्रिय हैं. अपनी उम्र और राजनीति में सक्रियता को लेकर मुलायम सिंह साफतौर पर कह चुके हैं कि जो उम्र उनकी लिखी है उससे वह 4 साल कम हैं. मुलायम सिंह का कहना है कि स्कूल में उनकी उम्र 4 साल ज्यादा लिखा दी गई थी. समाजवादी पार्टी में उठे विवाद को हल करने में मुलायम सिंह ही सबसे प्रमुख धुरी थे. हर किसी को खुश कर बीच का रास्ता निकालने में मुलायम सिंह ने कभी प्यार-पुचकार तो कभी डाट-फटकार का सहारा लिया. पूरे मसले को सुलझाने में न वो कमजोर दिखे ओर न चिडचिडे. मुलायम ने वही किया जो उनकी अपनी योजना का अंग था.

समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने राज्यसभा सदस्य अमर सिंह को बाहरी व्यक्ति कह कर अपमान करना शुरू किया. उस समय मुलायम सिंह यादव को यह बात अच्छी नही लगी थी. मुलायम ने इन लोगों को जवाब देने के लिये ही अमर सिंह को सपा में विवाद एपीसोड के बीच में ही पार्टी का महासचिव बना दिया. यही वह समय था जब बहुत सारे लोगों को यह उम्मीद थी कि सपा विवाद को हल करने के लिये यादव परिवार बाहरी व्यक्ति का आरोप लगाकर अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकती है. यह कयास लंबा चले और कहानी से नई कहानी बने इसके पहले ही सपा प्रमुख मुलायम ने अमर सिंह को पार्टी महासचिव बनाकर कहानी खत्म कर दी.

अमर सिंह को लेकर मुलायम क्या सोचते हैं इस बात का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि अमर सिंह को महासचिव बनाने के लिये जारी हुआ पत्र खुद मुलायम सिंह यादव ने अपने हाथ से लिखा. इस पत्र में मुलायम ने यह भी लिखा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अमर सिंह को महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी है. बात केवल अमर सिंह को पद दिये जाने की नहीं है. बात मुलायम के इतना प्यार और सम्मान की है. मुलायम सिंह के लिये 2017 के विधानसभा चुनावों का लक्ष्य बडा है. सपा को अगर भाजपा के अमित शाह जैसी रणनीति बनानी है तो अमर सिंह जैसा चतुर खिलाडी चाहिये. केवल विधानसभा चुनाव ही मैनेज नहीं करना, लक्ष्य यह है कि अगर विधानसभा चुनाव में सपा को पूरा बहुमत नहीं मिलता तो किस तरह का तालमेल हो, जिसका असर 2019 के लोकसभा चुनाव में असरकारी बन सके.