सरिता विशेष
चुनावी बिसात पर भ्रष्टाचार का दांव नेताओं को पटखनी देने का सबसे कारगर हथियार होता है.कांग्रेस से बाहर आकर नया दल बना कर बोफोर्स कांड के अस्त्र से विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर अपनी सरकार बनाई थी. बिहार में लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक को खत्म करने में चारा घोटाले का बडा हाथ था. कांग्रेस की डाक्टर मनमोहन सरकार के जाने में भी घोटालों का प्रमुख हाथ था. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव को आय से अधिक जायदाद का भूत अभी भी परेशान करता है. बसपा नेता मायावती को ताज घोटाले ने बहुत परेशान किया. भ्रष्टाचार का ही डर था जिसने सपा और बसपा दोनो को कांग्रेस का समर्थन देने का लिये मजबूर किया था.उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचंल प्रदेश, तमिलनाडु सभी प्रदेशों में नेताओं को भष्टाचार ने तगडा डंक मारा है. अब एक पार्टी को दबाव में लाने के लिये दूसरी पार्टी इस हथियार का इस्तेमाल करने लगी है.ऐसे ही हालातों को देखते हुये अदालत तक ने सीबीआई को पिंजरें में बंद तोता कहा था.केवल सीबीआई ही नहीं बहुत सारी जांच संस्थायें है जो नेताओं को शिकजें में कसने का काम करती है.
 
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की बढती ताकत को देखते हुये मायावती कार्यकाल में हुये  घोटालों की फाइल खुलने वाली है. साल 2007 से लेकर 2012 के बीच बसपा सरकार के समय बने स्मारकों में सरकारी पैसे के दुरूपयोग का आरोप लगा था. इन स्मारको में साढे 4 हजार करोड की रकम के खर्च करने का काम हुआ था. इसकी जांच का काम उस समय के लोकआयुक्त एनके मल्होत्रा ने किया. लोकआयुक्त की जांच रिपोर्ट में यह माना गया कि बसपा सरकार के समय स्मारक बनवाने में 1488 करोड का घोटाला किया गया.199 लोगों को इस घोटाले में लिप्त बताया गया. जांच रिपोर्ट फरवरी 2013 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्राी अखिलेश यादव को सौंपी गई. अखिलेश यादव ने इस मुददे पर कोई काम नहीं किया तो अब एक विशेष रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी गई है. इस रिपोर्ट में बसपा के उस समय के कई कददावर नेता, मंत्राी, इंजीनियर और ब्यूरोक्रेट शामिल है.
 
उत्तर प्रदेश विधनसभा चुनावों को देखते हुये यह मुददा फाइलों से बाहर आ सकता है. जिससे बसपा नेता मायावती को परेशानी हो सकती है. मायावती के खिलाफ भ्रष्टाचार एक बडे हथियार के रूप में काम कर सकता है. ऐसे में ताज घोटाले से बची मायावती स्मारक घोटाले की नई मुसीबत में फंस सकती है. वैसे मायावती इन बातों को मनुवदियों की चाल मानती है. जब से अमीरगरीब की खांई चैडी हुई है भ्रष्टाचार के मुददे संवेदनशील होने लगे है. ऐसे में केवल खुद को दलित के बेटी कहने से काम नहीं चलने वाला. ऐसे में भ्रष्टाचार का मुददा मायावती को नुकसान और विरोध्यिों को ताकत दे सकता है. सोशल मीडिया के जमाने में ऐसे आरोपों के वायरल होने में समय नहीं लगता है. कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार को हथियार बना कर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा सरकार नये मुददों से कांग्रेस की तरह मायावती को भी उलझा सकती है.