फिल्मी परिवार में पलीबढ़ी अभिनेत्री काजोल देवगन ने फिल्म ‘बेखुदी’ से अपने कैरियर की शुरुआत की थी, लेकिन उन की सफल फिल्म ‘बाजीगर’ थी. बचपन से ही काजोल को कविताएं  लिखना और डरावने उपन्यास पढ़ना पसंद था. आज भी जब समय मिलता है तो वे किताबें पढ़ती हैं.

काजोल और शाहरुख खान की जोड़ी आज भी दर्शकों में लोकप्रिय है. वे स्पष्टभाषी हैं. इसी बात से अभिनेता अजय देवगन प्रभावित हुए और उन्हें अपना जीवनसाथी बना लिया. फिल्म जगत में बेहतरीन परफौर्मैंस के लिए वे पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित की जा चुकी हैं. काजोल एक सफल अभिनेत्री, पत्नी और मां हैं. मां बनने के बाद उन्होंने अपने अभिनय की दूसरी पारी शुरू की. वे विज्ञापनों में भी देखी जाती हैं. पेश हैं, उन से हुए कुछ सवालजवाब:

दूसरी पारी की शुरुआत का श्रेय किसे देती हैं?

सब से पहले पति अजय देवगन को जिन्होंने मेरे हर काम में हमेशा मेरा साथ दिया. बेटी न्यासा के होने के बाद वे हमेशा कहते रहे कि मुझे काम शुरू कर देना चाहिए. इस के बाद मैं ने ‘फना’, ‘यू मी और हम’, ‘माई नेम इज खान’, ‘वी आर फैमिली’ आदि फिल्में कीं. लेकिन जब बेटा युग हुआ तो मैं ने फिर मदरहुड को अहमियत दी. युग के बाद मेरी बेटी ने मुझे फिर से फिल्मों में जाने की प्रेरणा दी.

क्या कभी लगा कि मां बनने से कैरियर प्रभावित हुआ?

नहीं, बचपन में मैं ने अपनी मां को हमेशा काम करते देखा है. मां ने हमेशा समझाया कि  काम करना जरूरी है. आजकल के बच्चे तो इतने प्रतिभावान हैं कि उन्हें अधिक समझाना नहीं पड़ता. मेरे बच्चे खुश होते हैं कि मैं काम कर रही हूं. जब मैं मां बनी, तो जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई थी, इसलिए मैं ने थोड़े दिनों के लिए काम से बे्रक ले लिया था. मेरे लिए केवल बच्चों को जन्म देना ही काफी नहीं, बल्कि उन की परवरिश भी मेरी जिम्मेदारी है और मैं ने उसे पूरी तरह निभाया.

अपने इस सफर को कैसे देखती हैं?

मैं ने फिल्में भी बहुत की हैं. बच्चों को भी अच्छी तरह संभाला और खुद पर भी ध्यान दिया. अभी और बहुत सारे काम करने बाकी हैं. मेरा कैनवास अभी खत्म नहीं हुआ है.

बच्चों को कितनी आजादी देती हैं?

मैं बहुत स्ट्रौंग मदर हूं. उन्हें आजादी कम ही मिलती है. मैं हमेशा लाइफ की प्रायौरिटी समझाने की कोशिश करती हूं. अगर वे बचपन से इस बात को समझ लेंगे तो बड़ा होने पर उन्हें कोई समस्या नहीं आएगी. अपने बच्चों से हमेशा यही कहती हूं कि चाहे स्कूल की परीक्षा हो या लाइफ की कोई भी चुनौती, तब तक सामना करें जब तक उस में सफल नहीं हो जाते.

व्यस्त दिनचर्या में परिवार के लिए समय कैसे निकालती हैं?

समय हम सभी निकालते हैं. बच्चों की छुट्टियां होने पर समय के अनुसार घूमने निकल जाते हैं यानी उन की छुट्टियों के हिसाब से हौलिडे प्लानिंग करते हैं. हम ने

साफ रेखा खींच ली है कि दीवाली, क्रिसमस की छुट्टियों में हम सब साथ रह कर ऐंजौय करेंगे. यह हमारे और हमारे बच्चों  सब के लिए बहुत जरूरी है.

आज की लड़कियां शादी करने और मां बनने से घबराती हैं. आप ने सब कुछ समय

से कर लिया. ऐसे में उन्हें क्या मैसेज देना चाहती हैं?

आज बहुत सारी चौइसेज हैं. अगर आप को सही इनसान मिले, तो कभी यह न सोचें कि आप उसे मैनेज नहीं कर सकतीं. जहां चाह होती है वहीं राह मिल जाती है. जीवन का जो अगला पड़ाव है उसे किसी के लिए भी सैक्रिफाइस न करें, फिर चाहे वह कैरियर हो या पैसा. सही समय पर सही निर्णय न लेने से बाद में मुश्किलें आती हैं.                         

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