सरिता विशेष

1979 में फिल्म ‘‘मोंक’’ में एक बिजनेसमैन, 1982 में ब्रिटिश सीरियल ‘‘ज्वेल इन द क्राउन’’ में हरी कुमार, 1984 में ‘‘पैसेज टू इंडिया’’ में महमूद अली, 1992 में फिल्म ‘‘सिटी आफ ज्वाय’’ में अशोका, हाल ही में ब्रिटेन के चैनल फोर पर प्रसारित सीरियल ‘‘इंडियन समर’’ में भारतीय महाराजा अमृतपुर, फिल्म ‘ट्यू लाइज’ में इस्लामिक आतंकवादी, भारतीय फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ में मिल्खा सिंह के पिता संपूरण सिंह के किरदार लोगों के दिलों दिमाग में बसे हुए हैं. इन किरदारों को निभाने वाले अभिनेता आर्ट मलिक भी लोगों के दिलो दिमाग में छाए हुए हैं. 62 वर्षीय अभिनेता आर्ट मलिक लंदन में रहते हैं. अब वह सात अक्टूबर को प्रदर्शित हो रही राकेश ओमप्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ में राजस्थानी किरदार में नजर आने वाले हैं.

62 वर्षीय ब्रिटिश अभिनेता आर्ट मलिक ने 1979 में ब्रिटिश सीरियल व फिल्म में अभिनय करना शुरू किया था और 1980 में ही उन्हे बतौर अभिनेता अंतरराष्ट्रीय शोहरत मिल गयी थी. आर्ट मलिक के अभिनय करियर पर गौर किया जाए, तो एक बात स्पष्ट रूप से उभरती है कि आर्ट मलिक ने कई ब्रिटिश व अमरीकन फिल्म व सीरियलों में न सिर्फ भारतीय पृष्ठभूमि के किरदार निभाए, बल्कि 1982 से अब तक वह कई बार भारत शूटिंग के लिए आ चुके हैं. आर्ट मलिक ने पहली बार राकेश ओमप्रकाश मेहरा निर्देशित हिंदी फिल्म ‘‘भाग मिल्खा भाग’’ में अभिनय किया था और अब उनकी दूसरी हिंदी फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ है, जिसके निर्देशक भी राकेश ओमप्रकाश मेहरा ही हैं.

आर्ट मलिक ने फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ में अभिनेत्री सैयामी खेर के राजस्थानी लड़की शुचि के पिता का किरदार निभाया है. इस फिल्म के लिए आर्ट मलिक ने सैयामी खेर, हर्षवर्धन कपूर, के के रैना व अनुज कपूर के साथ शूटिंग की. इस फिल्म में वह अतिशुद्ध हिंदी बोलते हुए नजर आएंगे. जबकि आर्ट मलिक ठहरे ब्रिटिश नागरिक. उपर से 37 वर्षों से ब्रिटिश व अमरीकन लहजे वाली अंग्रेजी भाषा ही बोलते आए हैं. ऐसे में वह शुद्ध हिंदी भाषा कैसे बोल पाए?

जब हमने आर्ट मलिक यही सवाल किया, तो आर्ट मलिक ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बात करते हुए कहा-‘‘आपने बहुत अच्छा सवाल किया. मैंने अब तक ब्रिटेन व अमरीका में बने अंग्रेजी भाषा की ही फिल्में व सीरियल किए हैं. मगर यदि मैं हिंदी में कोई फिल्म करने जा रहा हूं, तो मेरी अंग्रेजी फिल्मों की पहचान रखने वाले कह सकें कि मैंने हिंदी में भी अच्छा काम किया है. मैं चाहता था कि सभी हिंदी भाषी और हिंदी भाषा की फिल्में देखने वाले कह सकें कि मैं अच्छी हिंदी बोल सकता हूं. अच्छी हिंदी फिल्म कर सकता हूं. इसलिए मैंने अपनी तरफ से हिंदी भाषा पर काम किया. फिल्म में अच्छी हिंदी बोली है. पर मैने हिंदी में कितना अच्छा काम किया है, यह दर्शक ही तय करेंगे.’’

आर्ट मलिक ने आगे कहा-‘‘हम राजस्थान में शूटिंग कर रहे थे. मैं अपने आस पास के सभी कलाकारों, ड्रायवर, स्पाट ब्वाय व दूसरे अन्य लोगों से हिंदी में ही बात करता था. मेरे लिए हर दिन एक नई चुनौती भरा दिन हुआ करता था. मैं अपने ड्रायवर से कह देता था कि मुझे यह संवाद पढ़कर सुनाए और उस वक्त मैं उसके उच्चारण को बड़े ध्यान से सुनता था. सेट पर अनुज चैधरी या हर्षवर्धन कपूर या सैयामी से भी मैं संवाद पढ़वाता था. मसलन-मैं कहूंगा कि ‘बहोत हो गया’. पर हिंदी में यह होगा ‘बहुत हो गया.’ इस तरह से सभी अल्फाज सही बोलने थे. मेरा किरदार राजस्थान का है. वैसे राकेश ने मेरी हिंदी के उच्चारण को सही बताने के लिए अलका अमीन को मेरे साथ किया था. अलका अमीन अभिनेत्री हैं और मुंबई में ही रहती हैं. वह भी राजस्थान आयी हुई थी. मैंने जो कुछ सही किया है, उसका श्रेय अलका अमीन को  जाता है.’’

उन्होंने आगे कहा-‘‘मैं काम तो सैयामी खेर, अनुज चैधरी व हर्षवर्धन कपूर के साथ कर रहा था. सेट पर मैं अक्सर सैयामी खेर या अनुज से पूछता था कि मैं इस शब्द का सही उच्चारण कर रहा हूं. यदि कहीं समस्या होती, तो वह कह देते थे कि इसे इस तरह से कर सकते हैं. के के रैना भी मेरी मदद करते थे.’’

जब हमने आर्ट मलिक से राजस्थान को लेकर सवाल किया, तो आर्ट मलिक ने कहा-‘‘मैं आज से चौंतीस वर्ष पहले 1982 में टीवी सीरियल ‘ज्वेल इन द क्राउन’ की शूटिंग के लिए पहली बार ब्रिटेन से भारत पहुंचा था. हमने इस सीरियल की शूटिंग राजस्थान में की थी. मुझे राजस्थान बहुत पसंद आया था. अब चौंतीस वर्ष बाद जब फिर से राजस्थान पहुंचा, तो इस बार भी मुझे राजस्थान बहुत पसंद आया. पर अब काफी बदलाव आ गया है. अब तो पूरा भारत बदल चुका है. अब भारत तो वैश्विक शक्ति बन चुका है. अर्थ यानी कि इकानोमी को लेकर भी भारत विश्व पटल पर अपनी हैसियत रखता है. फिल्मों के निर्माण में भारत अब किसी से पीछे नहीं है. हौलीवुड की ही तरह भारत में भी आधुनिक तकनीक के साथ फिल्में बन रही हैं. लोग माने या न माने, मगर भारतीय फिल्में हौलीवुड फिल्मों को जबरदस्त टक्कर दे रही हैं.’’

पिछले 34 वर्षों के अंतराल में भारत में आए बदलाव को आप किस तरह से देखते हैं? इस सवाल पर आर्ट मलिक ने कहा-‘‘बहुत बड़ा बदलाव है. मैंने पहले ही कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर है. जिंदगी बदल चुकी है. हालात यह हो गए हैं कि कल तक भारत के लोग दूसरे देशों की तरफ भाग रहे थे, पर अब लोग भारत की तरफ भाग रहे हैं. सच कहूं तो भारत के लोग खुद अपने देश की क्षमता व ताकत को नही समझ पा रहे हैं.’’

जब हमने आर्ट मलिक से पूछा कि ब्रिटेन में रहते हुए उन्होंने ब्रिटिश व अमरीकन फिल्मों व सीरियलों में जो किरदार निभाए, उससे भारत के प्रति उनका एक पैशन नजर आता है. यह पैशन क्या है? इस सवाल पर आर्ट मलिक पहले तो जोर से हंसे, फिर कहा-‘‘मुझे नही मालूम….पर भारत को लेकर मैं हमेशा पैशनेट रहा हूं. यह एक अति खूबसूरत देश है. सच कह रहा हूं भारत में रहने लोग खुद ब खुद भारत को नहीं समझते. हम हजारों किलोमीटर दूर बैठे देखते हैं कि कैसे इस देश ने तरक्की की है. विविध धर्म व विविध भाषा के लोग कैसे एक साथ रहते हैं. आखिर यह देश किस तरह से चलता है? पहले ब्रिटिश राज्य में पुर्तगाल व ब्रिटेन सहित कई देशों के लोग भारत गए थे. मगर भारत की आजादी के बाद हम देख रहे थे कि भारतीय रोजगार या अन्य वजहों से भारत छोड़कर दूसरे देशों की तरफ भाग रहे हैं. मगर अब हालात ऐसे हो गए हैं कि यूरोप व पश्चिमी देशों के लोग भारत जाना चाहते हैं. भारत जाकर काम करना चाहते हैं. भारत में व्यापार करना चाहते हैं. लोग देखना व समझना चाहते हैं कि भारत की कार्यशैली क्या है, वह किस तरह तरक्की कर रहा है. अब लोग भारतीयों से मिलना चाहते हैं. मेरी राय में भारत के लिए यह खुशनुमा, बहुत प्यारा और अच्छा समय है. मेरे दोस्त अक्सर आकर हमसे कहते हैं कि वह भारत गए थे. वह हमारे पास आकर भारत का गुणगान करते हैं.’’

जब हमने उनसे पूछा कि 37 साल के अभिनय करियर में वह सिनेमा मे आए बदलाव को किस तरह से देखते हैं? तो आर्ट मलिक ने कहा-‘‘परिवर्तन प्रकृति का नियम है. पहले लोग अपनी कहानियों पर फिल्म बनाते थे. उस वक्त ब्रिटिश या हौलीवुड की फिल्मों व सीरियलों में लीड किरदार उनके अपने ही होते थे. पर अब ऐसा नही रहा. अब तो कई फिल्म व सीरियल में लीड किरदार भारतीय कलाकार निभा रहे हैं. यह असाधारण बदलाव है. अब ब्रिटेन या अमरीका का फिल्मकार कहता है कि हम अपने बारे में तो जानते हैं, पर हमें दूसरों के बारे में जानने की जरुरत है. इस वजह से भी अब भारत में हौलीवुड फिल्मकार शूटिंग करने पहुंच रहे हैं. यही वजह है कि भारतीय फिल्मों के दर्शक दूसरे देशों में तेजी से बढ़े हैं. मैं दावे के साथ यह बात कह रहा हूं कि भारतीय फिल्में भारतीय डायसफोरा के बियांड पसंद की जा रही हैं. आपको पता ही होगा कि राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ का यूरोपीय प्रीमियर अगले सप्ताह हमारे यहां लंदन में ‘लंदन फिल्म फेस्टिवल’ में हो रहा है. यह बहुत अच्छी बात है.’’

फुटबाल देखने के शौकीन आर्ट मलिक से जब हमने उनके अन्य शौक को लेकर सवाल किया, तो आर्ट मलिक ने कहा-‘‘अब 62 वर्ष का हो गया हूं. मेरा अपना परिवार है. मेरे घर में बहुत बड़ी लायब्रेरी है. जिसमें हजारों किताबें हैं. गार्डनिंग करने का भी शौक है. जब मैं घर पर रहता हूं तो मुझे बागवानी करना अच्छा लगता है. मेरी लायब्रेरी में हर तरह की किताबें हैं .इनमें फिक्शन , नान फिक्शन व आटो बायोग्राफी का भी समावेश है. मेरी अपनी आदत रही है कि जब किसी ने मुझसे कहा कि यह किताब पढ़ी जानी चाहिए, तो मैंने उस किताब को खरीदा और पढ़ा. फिर वह किताब मेरी लायब्रेरी का हिस्सा बन गई. मैने ‘अनादर डे’, ‘कराची’, ‘राइज किंग्सटन एंड एक्स्प्लेन’ जैसी कुछ लघु कहानियां भी लिखी हैं.’’