सरिता विशेष

पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के परिणाम बेहतर रहने, थोक मूल्य सूचकांक के लगातार 17वें माह गिरावट पर रहने, विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह में तेजी और विदेशी बाजारों के सकारात्मक रहने के कारण बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के सूचकांक में तेजी का रुझान है. संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन बाजार 26,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया. इस के अलावा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख रहने तथा अमेरिकी फैडरल रिजर्व और बैंक औफ जापान की मौद्रिक नीति को ले कर हुई बैठकों का बीएसई के साथ ही एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक असर देखने को मिला.

बीएसई के लिए मानसून के अच्छे रहने की संभावना सब से ज्यादा अनुकूल रही. इस के कारण बाजार में उत्साह है और सूचकांक तेजी पर बना हुआ है. सूचकांक 26 अप्रैल को इस उत्साह के कारण 4 माह के उच्च स्तर पर पहुंच गया हालांकि तंबाकू क्षेत्र में विदेशी निवेश को अमान्य करने संबंधी खबरों के कारण बाजार में दबाव बना रहा. इस के बावजूद सूचकांक में जबरदस्त उछाल दर्ज की गई. नैशनल स्टौक एक्सचेंज यानी एनएसई में भी इस दौरान तेजी रही और उस का सूचकांक 8,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया.