नोटबंदी के बाद देश में लेनदेन के लिए डिजिटल का सहारा लिया गया और इस में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई. लोगों ने पेटीएम जैसे डिजिटल भुगतान के तरीके को अपनाया और दुकानों, यहां तक कि चाय की दुकानों पर डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया अपनाई जाने लगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नकदी की कमी के बीच लोगों को इलैट्रौनिक्स लेनदेन के लिए प्रोत्साहित किया और एक साल से सफेद हाथी बना सरकारी क्षेत्र का लेनदेन का संस्थान नैशनल पेमैंट कौपोर्रेशन औफ इंडिया यानी एनपीसीआई सक्रिय हुआ और वह भीम तथा रुपे कार्ड जैसे डिजिटल उत्पाद ले कर सामने आया. खुद प्रधानमंत्री ने पिछले साल भीम ऐप की शुरुआत की और इसे इतना सरल बनाने का आह्वान किया कि अशिक्षित व गरीब आदमी तक इस का आसानी से इस्तेमाल कर सकें. उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने परिजनों को डिजिटल लेनदेन करने के बारे में सिखाएं. लेकिन बाजार में जब नकदी का प्रवाह बढ़ा तो डिजिटल लेनदेन का काम घटने लगा.

एक आंकड़े के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर में 31 करोड़ से ज्यादा लोगों ने क्रैडिट कार्ड का इस्तेमाल किया, जो फरवरी में महज 21 करोड़ रह गया. मोबाइल बैंकिंग में इस दौरान जबरदस्त गिरावट आई है. सरकार इस आंकड़े से परेशान है, इसलिए उस ने भीम तथा यूपीआई जैसे अपने उत्पादों पर लोगों को आकर्षित करने के लिए निशुल्क बीमा जैसा उपहार देना शुरू कर दिया.

भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट रूप से बैंकों से कह दिया है कि नए वित्तवर्ष पर शिविर लगा कर लोगों को डिजिटल लेनदेन के बारे में बताएं. बैंक दूरदराज के क्षेत्रों में शिविर लगाने की योजना पर काम कर रहे हैं. शिविर में भीम जैसे ऐप को ही महत्त्व दिया जाना है. इस में ऐसे फीचर हैं जिन का इस्तेमाल फ्रौड लोग नहीं कर सकते हैं. इस का फीचर गांव में साक्षरता के स्तर को देखते हुए तैयार किया गया है.