भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है, इस विचार को आगे बढ़ाना होगा और इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक दायरों की सीमा तक लाना होगा. दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले तनाव का सीधा असर आर्थिक संबंधों पर भी पड़ता है.

पिछले कुछ सालों से इस से सब से अधिक नुकसान भारत के चाय निर्यातकों को हो रहा है. दार्जिलिंग चाय इस बार सब से अधिक प्रभावित रही है. इस साल जनवरी से अब तक दोनों देशों के बीच के राजनीतिक संबंध बहुत खराब रहे हैं और इस से दार्जिलिंग चाय के निर्यात पर सब से अधिक बुरा असर पड़ा है. भारतीय चाय संगठन के अध्यक्ष ए एन सिंह की मानें तो दोनों देशों के बीच संबंध खराब होने से इस बार दार्जिलिंग चाय के निर्यात पर 60 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है.

उन का कहना है कि पिछले वर्ष पाकिस्तान ने भारत से लगभग ढाई करोड़ किलो चाय की खरीद की और इस की औसत कीमत प्रति किलो करीब 100 रुपए यानी 1.70 डौलर रही है. संबंध खराब होने की वजह से इस दौरान 2011 की तुलना में 20 लाख किलो कम चाय का निर्यात हुआ है. उस समय यानी 2011 में पाकिस्तान को 1.42 डौलर प्रति किलो की दर से चाय निर्यात की गई.  इस वर्ष निर्यात की दर 2 करोड़ किलो रहने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन दोनों देशों के बीच के राजनीतिक संबंध निरंतर खराब हो रहे हैं और इस का सीधा और तेज असर चाय निर्यात पर पड़ रहा है.

भारत के साथ जब भी राजनीतिक संबंध खराब होते हैं तो पाकिस्तान केन्या आदि देशों से चाय का आयात शुरू कर देता है. इस तरह देश के चाय निर्यातकों के हितों के लिए भी पाकिस्तान के साथ संबंध बेहतर करने जरूरी हैं. इस दिशा में दोनों देशों की सरकारों को ध्यान देना चाहिए.