आम बजट 2016-17 से महज 4 दिन पहले रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट पेश किया. उस में सुधार पर जोर दिया गया था लेकिन शेयर बाजार को यह रास नहीं आया और बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई का सूचकांक 113 अंक लुढ़क गया. इसी तर्ज पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपना आम बजट तैयार किया तो बाजार ने फिर वही रुख अपनाया और सूचकांक 153 अंक तक ढह गया. वित्त मंत्री जब संसद में भाषण दे रहे थे तो सूचकांक कारोबार के दौरान 500 अंक तक लुढ़क गया था.

रेल बजट और आम बजट के 1 दिन बाद शेयर बाजार ने जबरदस्त खुशी जताते हुए 7 सालों का रिकौर्ड तोड़ दिया. सूचकांक 777 अंक बढ़ कर 23,779 अंक पर बंद हुआ. पिछले 7 सालों के दौरान किसी एक दिन में सूचकांक में यह सब से बड़ी छलांग है. माना जा रहा है कि इस की वजह रिजर्व बैंक द्वारा रेट कट की उम्मीद है. हालांकि, ब्रोकर्स का कहना है कि रुपए की मजबूती के साथसाथ एशिया व यूरोपीय बाजारों में सकारात्मक संकेतों का भी इस पर असर हुआ है.

बहरहाल, बजट में वित्त मंत्री ने राजनीति का खेल खेला है. उन्होंने गरीब, किसान, मजदूर तथा गांव में रहने वाले लोगों को रिझाने का पूरा प्रयास किया है. निश्चित रूप से वित्त मंत्री के समक्ष इसी साल होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी थे. भाजपा को इन चुनावों में बिहार जैसी स्थिति से बचाना है. बजट में किसानों से सरकार के खिलाफ उन की नाराजगी को दूर करने का प्रयास है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने बजट में गांव और किसानों को समर्पित आधारभूत ढांचे को तरजीह दी है, हालांकि सेवा कर बढ़ा कर हर वर्ग पर अतिरिक्त बोझ भी डाला है. सरकार ने 19.76 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया है. जिस में बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 2.21 लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था की है. किसानों के कल्याण के लिए 35,984 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.

खर्च के मामले में यह समझ लेना चाहिए कि बजट में प्रावधान रखने के बाद भी वर्षों लगते हैं उन योजनाओं को बनाने और लागू करने में जिन पर बजट स्वीकृत किया गया हो. कितनी सुविधाएं असल में किसानों को कब मिलेंगी, कहा नहीं जा सकता. उस का श्रेय हो सकता है राज्य सरकारें ले जाएं क्योंकि किसान कल्याण तो राज्य सरकार के हिस्से में आता है.