फरवरी, 2017 के पहले सप्ताह में जयपुर के पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल से कुछ लोगों ने जो बताया, सुन कर वह दंग रह गए. उन से मिलने आए उन लोगों में से एक अधेड़ ने चिंतित स्वर में कहा था, ‘‘सर, रामगंज इलाके का एक टीचर काफी समय से उन बच्चों का यौनशोषण कर रहा है, जो उस के पास ट्यूशन पढ़ने आते थे. उस ने बच्चों की वीडियो क्लिपिंग भी बना रखी थी. वह बच्चों को धमकी देता था कि अगर उन्होंने किसी को यह बात बताई तो वह वीडियो सार्वजनिक कर देगा.’’

संजय अग्रवाल कुछ कहते, उस के पहले ही उस ने आगे कहा, ‘‘सर, उस टीचर ने वाट्सऐप के एक ग्रुप पर एक अश्लील वीडियो डाल दी है, जो वायरल हो रही है.’’

उस अधेड़ ने इतना कहा था कि उस के साथ आए एक अन्य आदमी ने कहा, ‘‘जिस बच्चे की वीडियो वायरल हो रही है, वह हमारे परिवार का है. उस वीडियो को देख कर बच्चे की मानसिक स्थिति काफी खराब हो गई है. बच्चा घर से बाहर नहीं निकल रहा है. साहब, हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रह गए हैं.’’

इस के बाद उस आदमी ने जेब से स्मार्ट फोन निकाल कर कमिश्नर साहब को वह अश्लील वीडियो दिखा दी. वीडियो देख कर संजय अग्रवाल ने पूछा, ‘‘वह टीचर इस तरह की गंदी हरकतें कब से कर रहा है?’’

‘‘सर, हमारे खयाल से यह गंदा खेल करीब 3 सालों से चल रहा है. इस की जानकारी हमें तब हुई, जब इस वीडियो के वायरल होने के बाद बच्चे से पूछा गया.’’ उसी आदमी ने कहा.

संजय अग्रवाल ने उन लोगों से टीचर का नामपता आदि पूछ कर डायरी में नोट करते हुए कहा, ‘‘यह बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मामला है. अगर ऐसा हुआ है तो हम ऐसी हैवान मानसिकता वाले टीचर को कतई नहीं छोड़ेंगे. आप लोग थाना रामगंज जा कर रिपोर्ट दर्ज कराइए. मैं रामगंज थानाप्रभारी को आप की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहे देता हूं.’’

इसी के साथ उन्होंने इंटरकौम पर पीए से कहा, ‘‘रामगंज एसएचओ से बात कराओ.’’

पीए ने पलभर बाद लाइन मिला कर कहा, ‘‘सर, रामगंज थानाप्रभारी लाइन पर हैं.’’

इस के बाद संजय अग्रवाल ने थाना रामगंज के थानाप्रभारी से कहा, ‘‘कुछ लोग आप के पास जा रहे हैं. इन की रिपोर्ट दर्ज कर के तुरंत काररवाई करें और मुझे रिपोर्ट करें.’’

संजय अग्रवाल ने उन लोगों को अपना मोबाइल नंबर दे कर थाना रामगंज भेज दिया और कहा कि अगर कोई परेशानी हो तो वे सीधे उन से बात कर लें. उस पीडि़त बच्चे के चाचा ने थाना रामगंज में बच्चों का यौनशोषण करने वाले टीचर रमीज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने यह मामला पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज कर लिया. यह 7 फरवरी, 2017 की बात है.

रिपोर्ट दर्ज कर के थाना रामगंज के थानाप्रभारी अशोक चौहान ने इस बात की जानकारी पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल को दी तो मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त उत्तर (प्रथम) समीर कुमार दुबे, सहायक पुलिस आयुक्त रामगंज बाघ सिंह राठौड़ तथा थानाप्रभारी अशोक चौहान के नेतृत्व में 6 पुलिस टीमें बना कर आरोपी टीचर को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

पुलिस ने आरोपी टीचर रमीज के घर दबिश दी तो वही नहीं, उस का पूरा परिवार घर से फरार मिला. घर पर ताला लगा था. पड़ोसी भी रमीज तथा उस के घर वालों के बारे में कुछ नहीं बता सके. इस से पुलिस ने यही अनुमान लगाया कि वाट्सऐप पर वीडियो के वायरल होने के बाद रमीज और उस के घर वाले फरार हो गए हैं.

रमीज की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस के साथी टीचरों तथा अन्य लोगों से पूछताछ की. इस के अलावा पीडि़त बच्चे से भी मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई. शुरुआती जांच में पता चला कि टीचर रमीज ने कई अन्य बच्चों को भी उसी बच्चे की तरह शिकार बनाया था. उन बच्चों की भी रमीज ने वीडियो क्लिपिंग बना रखी थी. इसी के साथ यह भी पता चला कि उन्हीं वीडियो क्लिपिंग्स की बदौलत रमीज बच्चों से पैसे भी ऐंठता था.

मामला बेहद गंभीर था. इस तरह का शर्मनाक और हैवानियत भरा काम मानसिक रूप से विकृत आदमी ही कर सकता है. रमीज ने गुरु और शिष्य के रिश्ते को तारतार किया था, इसलिए पुलिस ऐसे टीचर को पकड़ने के लिए जीजान से जुट गई.

आखिर 9 फरवरी की शाम पुलिस ने उसे जयपुर से ही दिल्ली बाइपास रोड से पकड़ लिया. रमीज को थाना रामगंज ला कर सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्कूली बच्चों के यौनशोषण का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस पूछताछ में बच्चों के यौनशोषण की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

26 साल के रमीज का पूरा नाम रमीज राजा था. एमए, बीएड रमीज सन 2011 में जयपुर के रामगंज के 12वीं कक्षा तक के एक नामचीन प्राइवेट स्कूल में टीचर के रूप में नियुक्त हुआ तो उसे जल्दी ही स्कूल का वाइस प्रिंसिपल बना दिया गया था. कोएजुकेशन वाले इस स्कूल में वह अंगरेजी पढ़ाता था.

स्कूल में पढ़ाते हुए रमीज बच्चों को फेल करने की धमकी दे कर ट्यूशन पढ़ने का दबाव डालता था. फेल होने के डर से बच्चे उस के घर ट्यूशन पढ़ने आते थे. रामगंज में रहने वाला रमीज बच्चों को अपने घर के एक कमरे में अंदर से दरवाजा बंद कर के ट्यूशन पढ़ाता था. कुछ देर पढ़ाने के बाद वह उन्हें अश्लील वीडियो दिखाता था. इस के बाद वह बच्चों से कुकर्म करता था. खासतौर से वह 5 से 15 साल तक के बच्चों को अपना शिकार बनाता था.

पिछले 4-5 सालों से रमीज यह घृणित काम कर रहा था. वह बच्चे का यौनशोषण करते हुए मोबाइल फोन से वीडियो बना लेता था. इस के बाद वह वीडियो दिखा कर उसे सार्वजनिक करने की धमकी दे कर बच्चों का यौनशोषण तो करता ही था, साथ ही पैसे भी मंगवाता था. यही नहीं, वह उस बच्चे से दूसरे बच्चे के साथ यौनशोषण की वीडियो भी बनवाता था. बदनामी के डर से कई बच्चों ने घर से पैसे चोरी कर के उसे दिए तो कुछ ने सामान बेच कर दिए.

जनवरी, 2017 में कुछ पीडि़त बच्चों ने रमीज के कंप्यूटर की वह हार्डडिस्क निकाल ली, जिस में उन के कारनामे कैद थे. उस हार्डडिस्क को बच्चों ने स्कूल प्रशासन को सौंप दिया. स्कूल प्रशासन ने हार्डडिस्क में कैद उस के कारनामे को देख कर उसे 23 जनवरी को स्कूल से निकाल दिया. उन्होंने इस मामले की पुलिस को सूचना देने के बजाए दबा दिया.

रमीज की हरकतों से परेशान छात्र कई दिनों तक स्कूल प्रशासन से उस की शिकायतें करते रहे, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उस के खिलाफ कोई काररवाई नहीं की. तब कुछ बच्चे अपने घर वालों के साथ घोड़ा निकास रोड स्थित रमीज के घर पहुंचे, जहां इस बात को ले कर रमीज के घर वालों से उन लोगों का झगड़ा हो गया.

पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई तो थाना रामगंज पुलिस मौके पर पहुंची. इस बीच रमीज भाग गया. पुलिस मामला शांत करा कर सभी को थाने ले आई. बच्चों और उन के घर वालों ने मामला दर्ज कराना चाहा, पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. जांच की बात कह कर सभी को घर भेज दिया गया. इस के बाद लोग पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल से मिले थे.

जांच में पता चला है कि इस से पहले रमीज को 2 स्कूलों से निकाला जा चुका था. उस के पिता प्रौपर्टी डीलिंग और नगीनों का काम करते थे. रमीज की गिरफ्तारी के बाद कई बच्चों ने हिम्मत कर के अपने घर वालों से अपने साथ हुए कुकर्म के बारे में बताया तो वे पुलिस थाने पहुंचे और रमीज के कुकृत्य की शिकायत की. 10 फरवरी की रात उस के खिलाफ दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया था.

पुलिस ने रमीज से एक मोबाइल फोन और 2 पैन ड्राइव बरामद किए. उस के मोबाइल फोन से 76 क्लिपिंग्स बरामद हुई थीं. इस से पता चला है कि उस ने 5 से 15 साल के करीब 25 बच्चों का यौनशोषण किया था. उन में से कई बच्चे अब वयस्क होने वाले हैं. वैसे उस ने 11 बच्चों के यौनशोषण की बात स्वीकार की थी.

रमीज के मोबाइल में मिली क्लिपिंग्स देखने से साफ लग रहा था कि वे किसी अन्य व्यक्ति की मदद से बनाई गई थीं. ऐसे में पुलिस को इस बात की भी आशंका है कि रमीज का संबंध किसी पोर्नसाइट से हो सकता है. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि वह अश्लील क्लिपिंग्स बेचता तो नहीं था.

इस मामले में पुलिस की ओर से कोताही बरतने और स्कूल प्रशासन की ओर से मामला दबाए जाने के विरोध में 11 फरवरी को स्कूली बच्चों के घर वालों ने अन्य लोगों के साथ मिल कर थाना रामगंज पर प्रदर्शन किया. इन लोगों का आरोप था कि बच्चों के यौनशोषण का खुलासा होने के बाद भी पुलिस ने समय पर काररवाई नहीं की थी, इसलिए आरोपी टीचर ने तमाम सबूत नष्ट कर दिए हैं.

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि अब इस मामले की जांच एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन. से कराई जाए. उन का कहना था कि बच्चों ने जनवरी में ही रमीज के कंप्यूटर से हार्डडिस्क निकाल कर स्कूल प्रशासन को सौंप दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने मामले की सूचना पुलिस या बच्चों के घर वालों को देने के बजाए मामले को दबा दिया था. स्कूल से निकाले जाने के बाद 20 दिनों में आरोपी रमीज ने सबूतों को नष्ट कर दिया.

लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने बच्चों का यौनशोषण करने वाले टीचर रमीज की करतूतों को छिपाने के मामले में 11 फरवरी को स्कूल के डायरेक्टर सरवर आलम को गिरफ्तार कर लिया था. इसी के साथ रमीज के कंप्यूटर से बच्चों ने जो हार्डडिस्क निकाल कर स्कूल प्रशासन को सौंपी थी, उसे बरामद करने के साथ स्कूल से कंप्यूटर, सीपीयू और डीवीडी बरामद की गई थी.

पुलिस ने रमीज से बरामद मोबाइल, पैन ड्राइव तथा स्कूल से बरामद हार्डडिस्क और स्कूल से जब्त कंप्यूटर, सीपीयू और डीवीडी को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि रमीज की करतूतों की जानकारी उस के घर वालों को थी या नहीं? इस बारे में पीडि़त बच्चों का कहना था कि रमीज के घर वालों को उस की इस करतूत की जानकारी थी.

पुलिस ने रमीज को कई बार रिमांड पर ले कर पूछताछ की. अंत में 20 फरवरी, 2017 को अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था. डायरेक्टर सरवर आलम को भी पुलिस ने 14 फरवरी तक रिमांड पर रखा था. फिर उसी दिन उसे जमानत मिल गई थी.

इस मामले में आरोपी रमीज और सरवर आलम को कानून क्या सजा देगा, यह तो समय बताएगा. लेकिन चिंता की बात यह है कि जिस टीचर पर भरोसा कर के लोग अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उसे सौंप देते हैं, अगर वही इस तरह की हरकत करे तो लोग बच्चों को कहां ले जाएं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित