सरिता विशेष

मैं 20 वर्षीय युवक हूं. मां का 2 साल पहले देहांत हो गया है. मेरे पिता दूसरा विवाह करना चाहते हैं. मेरी समस्या यह है कि क्या मेरा अपनी नई मां के साथ भावनात्मक जुड़ाव हो पाएगा? क्या मैं उन्हें अपनी मां की जगह दे पाऊंगा? कहीं उन के आने से पिताजी मेरे प्रति अपनी जिम्मेदारियां तो नहीं भूल जाएंगे? सलाह दीजिए.
आप के मन में ऐसे विचार आना लाजिमी है. लेकिन आप शायद कुछ ज्यादा ही सोच रहे हैं. आप ने अपनी होने वाली नई मां के बारे में न जाने क्याक्या सोच लिया है. जहां तक भावनात्मक जुड़ाव की बात है जब नए रिश्ते बनते हैं तो उन में प्यार व अपनापन बढ़ाने के लिए दोनों तरफ से प्रयास की जरूरत होती है. अगर आप की नई मां आप के प्रति प्यार और लगाव का भाव रखेंगी तो आप का उन के साथ भावनात्मक जुड़ाव अपनेआप हो जाएगा और आप उन्हें अपनी मां की जगह अवश्य दे पाएंगे.
अपने पिता पर भी व्यर्थ शक न करें. आप यह सोचें कि आप के पिता आप की नई मां के साथ मिल कर आप के प्रति सभी जिम्मेदारियों को ज्यादा अच्छे ढंग से निभा पाएंगे.

मैं और मेरी पत्नी दोनों कामकाजी हैं. पत्नी देखने में खूबसूरत और आकर्षक है. पता नहीं क्यों मुझे अपनी पत्नी पर शक होता है कि उस का अपने किसी सहकर्मी से संबंध है और वह मुझे धोखा दे रही है. मैं इस बारे में उस से बात करने में भी डरता हूं कि यदि मेरा शक गलत निकला तो हमारा वैवाहिक जीवन कहीं बिखर न जाए. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूं?
आप अपनी पत्नी को ले कर कुछ ज्यादा ही पजेसिव हैं. अगर वह खूबसूरत और आकर्षक है तो उस का किसी के साथ संबंध होगा, यह मात्र आप का वहम है. क्या आप के औफिस में आकर्षक और खूबसूरत महिलाएं नहीं हैं? और क्या उन सब के किसी न किसी के साथ संबंध हैं?
जब तक आप के पास कोई ठोस सुबूत न हो पत्नी से इस बारे में हरगिज बात न करें वरना आप व्यर्थ ही अपने वैवाहिक जीवन में परेशानियां खड़ी कर लेंगे. बेकार के शक को आधार बना कर आपसी संबंध में कड़वाहट न लाएं और इस तरह बेमतलब की बातों को अपने मन से निकाल दें.

मैं 42 वर्षीय शादीशुदा महिला हूं. पति के साथ संबंध सामान्य हैं. लेकिन सैक्स करते समय वैजाइना ड्राई रहती है, सैक्स संबंधों को पूरी तरह एंजौय नहीं कर पाती. बातबात पर मूड बदलता रहता है. कभी गुस्सा, चिड़चिड़ाहट तो कभी रोने का मन करता है. पति बहुत सहयोग करते हैं, किसी बात की शिकायत नहीं करते. कहीं मेरे ये लक्षण प्रीमेनोपोज के तो नहीं हैं? वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए क्या करूं?
यह तो अच्छी बात है कि पति आप के बदले शारीरिक और मानसिक लक्षणों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और जहां तक सैक्स संबंधों को एंजौय न
कर पाने की बात है, आप के लक्षण प्रीमेनोपोज के हैं. आप इस समस्या के समाधान के लिए किसी गाइनोकोलौजिस्ट से मिलें. हार्मोन रिप्लेसमैंट थेरैपी से आप की समस्या सुलझ सकती है.

मैं 35 वर्षीय तलाकशुदा महिला हूं. अपने पड़ोस में रहने वाले एक 30 वर्षीय युवक से प्यार करती हूं. वह अमीर है और अच्छे खानदान से है. मैं उस से विवाह करना चाहती हूं पर डरती हूं कि कहीं वह मेरे तलाकशुदा होने और अपने उच्च आर्थिक स्तर की वजह से मुझ से विवाह के लिए इनकार न कर दे. क्या मुझे इस बारे में उस से बात करनी चाहिए? उचित सलाह दें.
पहले आप ने यह नहीं बताया कि क्या वह पुरुष भी आप से प्यार करता है या यह सिर्फ आप की तरफ से एकतरफा प्यार की कहानी है और आप उस से विवाह के खयाली पुलाव पका रही हैं.
दूसरी सूरत में अगर वह सचमुच आप से प्यार करता है तो वह अपने आर्थिक स्तर और आप के तलाकशुदा होने की बात भी जानता होगा. वैवाहिक संबंध आपसी रजामंदी पर बनते हैं. आप इस बारे में उस से खुल कर बात करें, उस के परिवार वालों की राय जानें और उस के बाद ही कोई निर्णय लें.

मैं 40 वर्षीय विवाहित महिला हूं. मैं अपने 14 वर्षीय बेटे को ले कर बहुत परेशान हूं. मेरा बेटा हर बात के लिए मुझ से सलाह लेता है. वह अपने खानेपीने, पहनने, टैलीविजन देखने, दोस्तों के साथ बाहर जाने जैसी सभी बातों के लिए मुझ से पूछता है. जबकि इस उम्र के अन्य बच्चे ये सभी निर्णय खुद लेते हैं. क्या मेरे बेटे में आत्मविश्वास की कमी है जिस की वजह से वह हर छोटीछोटी बात के लिए मुझ पर निर्भर रहता है? मैं उस के भविष्य के लिए बहुत चिंतित हूं. मुझे क्या करना चाहिए?
लगता है आप ने अपने बेटे को प्रारंभ से ओवर प्रोटैक्शन दिया है और हमेशा टोकाटाकी की है कि ‘ये करो’, ‘ये मत करो’, ‘यहां मत जाओ’, ‘इधर आओ’ आदि. जब बच्चे को छोटीछोटी बात के लिए सलाह दी जाती है या रोका जाता है तो उस का आत्मविश्वास कम हो जाता है और वह कोई निर्णय खुद नहीं ले पाता.
अब आप अपने बच्चे में बदलाव लाने के लिए उसे अपने निर्णय खुद लेने की आजादी दें, ज्यादा टोकाटाकी न करें. जो वह करना चाह रही है उसे करने दें. हां, उस पर नजर जरूर रखें. उसे घर से बाहर ऐक्टिविटी क्लासेज में भेजें. वहां अन्य बच्चों के साथ मिलनेजुलने से उस का आत्मविश्वास बढ़ेगा और धीरेधीरे अपने निर्णय वह खुद लेने लगेगा.