दलाल के चक्कर में जेठमलानी
दूसरों को धोखाधड़ी के मामलों में न्याय दिलाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता राम जेठमलानी को एक दलाल ने 7 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया. मामला बेहद परंपरागत ढंग से संपन्न हुआ. राम जेठमलानी को चेन्नई में एक जमीन पसंद आ गई तो बतौर एडवांस उन्होंने एक दलाल को भारीभरकम राशि दे दी. बारबार कहने पर भी उस दलाल ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई तो झल्लाए जेठमलानी ने चेन्नई में 4 जनवरी को पुलिस कमिश्नर एस जौर्ज से संपर्क कर मामला दर्ज करा दिया.
यह संक्षिप्त कथा देश में रोज कई जगह दोहराई जाती है, फर्क सिर्फ इतना है कि उस में वकील कम होते हैं और राम जेठमलानी जैसे दिग्गज तो कतई नहीं होते. धोखाधड़ी से ताल्लुक रखते इस मसले से नैतिक शिक्षा यही मिलती है कि ज्यादा लालच और दलालों पर ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए.
 
टल गया नीतीश का संकट
धर्मस्थल जाने में बड़े झंझट होते हैं. पहले जूते बाहर उतारने पड़ते हैं और अगर जूते कीमती हों तो उन की चिंता होती है कि कहीं ऐसा न हो कि किसी जूताचोर का दिल उन पर आ जाए और वह धरम का यह प्रिय काम कर डाले. इस चक्कर में भगवान की तरफ ध्यान कम ही जा पाता है.
लेकिन पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मामला सिर का था. दिसंबर के आखिरी हफ्ते में एक गुरुद्वारे में वे गए तो एक सलाह, जिसे आदेश कहना बेहतर होगा, यह मिली कि कृपया सिर ढक लें. नीतीश के सामने जब यह धार्मिक संकट आया तो उन्होंने न में सिर हिला कर मना कर दिया तो सिख गुरुओं ने एतराज जताया. बात बवाल मचने से पहले आईगई हो गई पर यह भी बता गई कि टोपी पहनने या सिर ढकने के मामले में वे नरेंद्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी अभी भी हैं.
 
हवाहवाई इंटरव्यू
सब से बड़े राज्य का मुख्यमंत्री होना या एक बड़े नेता का बेटा होना ही आदर्श नेतागीरी के लक्षण नहीं हैं. नेतागीरी एक अदा भी है जो बीते दिनों अखिलेश यादव ने भी निभाई. पुराने कांग्रेसी नेताओं की तरह उन्होंने भी हवाई जहाज में इंटरव्यू दिया और मान लिया कि देशभर ने देख लिया है कि अब वे एक पूर्ण नेता हो गए हैं.
हवाई जहाज में इंटरव्यू देने की बड़ी परेशानी यह है कि नेता को ज्यादा सजग रहना पड़ता है. चूंकि प्रसारण हो रहा है या होगा इसलिए वह आंख, नाक और कान तक नहीं खुजला पाता और सामने देखता रहता है. पत्रकार और कैमरामैन भी रोमांचित और खुश रहते हैं कि स्टूडियो और जमीन पर तो इंटरव्यू लेते रहते हैं, आज मौका मिला कि मुफ्त में हवा में उड़ भी लिए और ड्यूटी भी निभाई.
 
अंधविश्वासी हैं शिवराज
शिरडी के सांईंबाबा मंदिर में 2014 के शुरू के 3 और 2013 के आखिरी 6 दिनों में नकद 16 करोड़ रुपए भक्तों ने दान किए. इस से ज्यादा दिलचस्प खबर शिरडी से यह आई कि इन्हीं दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को देखने के लिए सांईंभक्त मंदिर छोड़ कर भागे और स्थानीय लोगों ने माना भी कि इस से पहले किसी नेता को देखने में लोगों ने इतनी दिचलस्पी नहीं दिखाई.
सांईंबाबा के साथ अब खुद की ब्रांडिंग करने के लिए भी शिरडी आदर्श जगह हो चली है जहां देश के चारों कोनों से लोग आते हैं और अपनी जेबें खाली करते हैं. शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता देख भाजपा आलाकमान को चिंतित होना चाहिए या खुश, यह तो वही तय करें लेकिन तकनीकी तौर पर अंधविश्वास फैलाने में जरूर शिवराज अव्वल साबित हो रहे हैं.