मोदी सरकार सड़कों के निर्माण के साथ ही रेलवे पटरियां बिछाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित कर रही है. इस क्रम में उस ने 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा लागत की 3 रेल परियोजनाओं पर पहल शुरू कर दी है. रेलवे का लक्ष्य इन तीनों परियोजनाओं को समय से पहले पूरा करना है और इस काम में पैसे की तंगी से मुक्ति पाना है. इन 3 में से एक परियोजना के लिए निवेशक की तलाश का काम शुरू कर दिया गया है और शेष 2 परियोजनाओं के लिए निजी निवेशकों की पड़ताल का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. तीनों परियोजनाओं की लंबाई 350 किलोमीटर से ज्यादा है. बताया जा रहा है कि रेलवे की योजना निजी क्षेत्र को महत्त्व देने की है और वह लंबित पड़ी 380 परियोजनाओं को इसी आधार पर पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है.

रेलवे का कहना है कि इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए उसे 5 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है और इतनी ज्यादा राशि अपने बल पर जुटाना रेलवे के लिए संभव नहीं है. इन परियोजनाओं पर काम करने वाली निजी कंपनियों को काम पूरा होने के बाद रेलवे सालाना प्रीमियम अदा करेगा. इस से रेलवे को ढांचागत व्यवस्था के लिए पैसे नहीं लगाने पड़ेंगे और एक बनाबनाया ढांचा रेलवे के पास आ जाएगा. प्रीमियम की राशि की अदायगी में उसे कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि ढांचागत व्यवस्था की मजबूती का लाभ उसी की झोली में जाएगा. रेल मंत्री का यह प्लान सफल होता है तो निश्चित रूप से आने वाले समय में रेलवे को इस का बड़ा फायदा होगा.