सरकार ने हाल ही में अखबारों में विज्ञापन दे कर नकद लेनदेन पर लगाई गई नई पाबंदियों की जनसाधारण को सूचना दी है. नई व्यवस्था के तहत 2 लाख रुपए या इस से अधिक की राशि एक दिन में किसी व्यक्ति से स्वीकार न करने, इतनी राशि का एक या एक से ज्यादा बार एकसाथ लेनदेन न करने, अचल संपत्ति के हस्तांतरण में 20 हजार रुपए नकद लेने या देने और अपने व्यापार या व्यवसाय के खर्च में 10 हजार रुपए से ज्यादा का नकद भुगतान न करने जैसी हिदायतें दी गई हैं. इस के साथ ही, राजनीतिक दलों को 2 हजार रुपए से अधिक का चंदा नहीं देने को भी कहा गया है.

आयकर विभाग ने नकद लेनदेन को नियंत्रित करने के लिए यह पाबंदी लगाई है. इन पाबंदियों का पालन न करने पर आयकर विभाग जुर्माना लगा सकता है. सरकार की इस नई नियमावली से कारोबारी परेशान हैं, लेकिन कुछ कारोबारियों का कहना है कि जो लोग ईमानदारी से अपना काम करते हैं, उन के लिए यह नई पाबंदी सुकूनभरी है.

कई कारोबारियों का कहना है कि इस से नए उद्यमियों को ईमानदारी से अपना कारोबार करने में आसानी होगी और आयकर विभाग के नाम पर उन के साथ प्रताड़ना बंद हो जाएगी. विश्लेषकों का मानना है कि इन पाबंदियों का मकसद राजनीतिक चंदे के नाम पर होने वाले घोटाले पर रोक लगाना है. कारोबारी राजनीतिक दलों को चंदे के नाम पर जिस तरह से अपने पक्ष में कर के अराजक तरीके से लाभ अर्जित करते हैं, इस व्यवस्था से उस पर लगाम कसी जा सकेगी.

सरकार ने राजनीतिक दलों को चंदा देने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए गत वर्ष चुनावी बौंड जारी करने की अधिसूचना जारी की थी. राजनीतिक दल ये बौंड देश में सरकारी क्षेत्र के सब से बड़े बैंक स्टेट बैंक औफ इंडिया की चुनिंदा शाखाओं पर और निर्धारित समय के भीतर ही खरीद सकते हैं.

उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार की इस सख्ती से बेलगाम चुनावी चंदे पर रोक लगेगी और राजनीतिक दल अपने चहेते कारोबारियों को नियमों का उल्लंघन कर लाभ नहीं पहुंचा सकेंगे. चुनावी चंदे के काले कारोबार को रोके जाने से चुनाव में होने वाले अनापशनाप खर्च की बदौलत मतदाताओं को अपने पक्ष में कर चुनाव जीतने वाले राजनेताओं द्वारा जीत हासिल करने के बाद की जाने वाली वसूली को नियंत्रित भी किया जा सकेगा.

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