बौलीवुड एक्टर नवाजुद्दीन के साथ इन दिनों जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए एक कवि की कविता की कुछ पंक्तिया याद आ रही हैं-‘‘एक फूल काफी है अर्थी सजाने को, एक भूल काफी है जिंदगी भर रूलाने को. ’’जी हां! लगभग 14 साल के संघर्ष के बाद नवाजुद्दीन का करियर तेजी से सफलता की ओर दौड़ रहा था. 2017 में उनकी एक नहीं बल्कि ‘मौम’,‘रईस’,‘जग्गा जासूस’,‘मुन्ना माइकल’ और ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ सहित पांच फिल्में प्रदर्शित हुई.

लेकिन इन फिल्मों के प्रदर्शन के बाद जब हर कोई उनके अभिनय की तारीफ कर रहा था, तभी पता नहीं किसकी सलाह पर नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने अपनी बायोग्राफी की किताब के कुछ पन्ने एक अंग्रेजी अखबार में छपवा दिए. इसके बाद नवाजुद्दीन सिद्दिकी के खिलाफ ऐसा माहौल बना कि उन्हे न सिर्फ अपनी इस किताब को वापस लेने का ऐलान करना, बल्कि ट्विटर पर माफी मांगनी पड़ी.

इसके बावजूद उनका साथ देने के लिए कोई तैयार नहीं है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि बौलीवुड का हर इंसान उनसे कन्नी काटने लगा है. उनके अपने दोस्त भी अब उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं. मजेदार बात यह है कि विशाल भारद्वाज पहली बार नवाजुद्दीन सिद्दिकी को एक रोमांटिक फिल्म का हिस्सा बना रहे थे, पर अब उन्होने भी अपनी फिल्म को बनाने का इरादा ही त्याग दिया है.

सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि अब कोई भी फिल्मकार नवाजुद्दीन सिद्दिकी के साथ काम नहीं करना चाहता. हालात यह हैं कि उन्हे एक विज्ञापन फिल्म का आफर मिला था. मगर बायोग्राफी की वजह से वह विज्ञापन फिल्म भी उनसे छिन गयी. हालात यह है कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी घर पर खाली बैठे हुए हैं.

2018 में उनकी एक भी फिल्म की शूटिंग नहीं होनी है. उनकी समझ में नही आ रहा है कि क्या किया जाए. यूं तो नवाजुद्दीन सिद्दकी को अब सारी उम्मीदें अपनी नई फिल्म ‘‘मानसून शूट आउट’’ से हैं, मगर इस फिल्म के निर्माता भी अपनी फिल्म के रिलीज को लेकर असमंजस में हैं. उन्हे लग रहा है कि कहीं नवाजुद्दीन सिद्दिकी की धूमिल हुई छवि का खामियाजा उनकी फिल्म को न भुगतना पड़े?

बौलीवुड से जुड़े लोग तो अब खुलकर कहने लगे हैं कि जब करियर ने सही दिशा पकड़ी थी, उस वक्त करियर को मजबूती प्रदान करने की बजाय उन्हे अपनी बायोग्राफी को बाजार में लाने की जल्दी क्यों आन पड़ी थी? यानी कि एक गलती जिसकी सजा?

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