सरिता विशेष

फिल्म ‘‘जाने तू या जाने ना’’ में शालीन का किरदार निभाकर सुगंधा गर्ग ने बालीवुड में कदम रखा था. उसके बाद उन्होने ‘माई नेम इज खान’,‘तेरे बिन लादेन’,‘मुंबई कालिंग’, ‘पतंग’ जैसी कुछ फिल्मों में अभिनय किया. उनकी नई फिल्म ‘‘जुगनी’’ अब 22 जनवरी 2016 को रिलीज हो रही है, जिसमें सुगंधा गर्ग ने संगीतकार विभावरी का किरदार निभाया है. फिल्म ‘‘जुगनी’’ में विभावरी मुंबई में अपने मित्र व फिल्म निर्माता सिद्धार्थ के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहती है. वह संगीत की खोज में पंजाब के एक गांव पहुंचती है, जहां वह गायक मस्ताना के साथ शराब के नशे में हमबिस्तर हो जाती है. पर इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता. वह वापस मुंबई आती है. सिद्धार्थ से कहा सुनी होती है. सिद्धार्थ का आरोप है कि विभावरी उसके साथ कम और दूसरों के साथ समय ज्यादा बिताती है. उस वक्त विभावरी चुप रहती है, मगर मस्ताना की तारीफ किए बगैर नहीं रहती. विभावरी को एक फिल्म में संगीत देने के लिए मस्ताना की आवाज के ही चलते अवार्ड मिलता है. और अवार्ड मिलते विभावरी, सिद्धार्थ का घर छोड़कर अपने लिए नया किराए का मकान लेकर रहने चली जाती है. पर सिद्धाथे से वह दोस्ती रखने की बात करती है.

फिल्म ‘‘जुगनी’’ देखने वाले अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सुगंधा गर्ग ने जनवरी 2016 में अपनी निजी जिंदगी का जो सबसे बड़ा निर्णय सार्वजनिक किया, वह निर्णय उन्होने फिल्म ‘‘जुगनी’’ से प्रेरित होकर लिया अथवा सुगंधा गर्ग ने अपने निर्णय व अपनी जिंदगी की कहानी फिल्म निर्देशक व लेखक शेफाली भूषण को बताकर फिल्म ‘‘जुगनी’’ का निर्माण करवाया. और वह फिल्म के रिलीज की तारीख तय होने का इंतजार कर रही थीं.? सच हमें नहीं पता..सच तो सुगंधा गर्ग या रघु राम ही बता सकते है, जो कि फिलहाल मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं.

जी हॅा! सुगंधा गर्ग की निजी जिंदगी की दास्तान भी विभावरी से काफी मिलती जुलती है. सुगंधा गर्ग निजी जिंदगी में गायक और अभिनेत्री हैं. फिल्म‘‘जाने तू या जाने ना’’ के रिलीज के बाद 2008 में ही टीवी निर्माता व एमटीवी रियालिटी शो ‘एमटीवी रोडीज’’ के संचालक रघु राम के साथ शसादी रचायी थी. मगर जनवरी 2016 के पहले सप्ताह में दोनो ने पत्रकारों को बुलाकर एक दूसरे से अलग होने की बात स्वीकार की. दोनों का मानना है कि यह दोनो एक साथ समय कम बिता रहे थे, जबकि दोनो बाहर दूसरों के साथ समय ज्यादा बिता रहे थे. इसी के चलते दोनो ने तलाक लेने का निर्णय लिया है. मगर दोनो दोस्त बने रहेंगे.

एक बहुत पुरानी कहावत है कि ‘‘सिनेमा समाज का दर्पण होता है.’’ मगर फिल्म ‘‘जुगनी’’ और सुगंधा गर्ग की निजी जिंदगी की कहानी जानने के बाद अब क्या कहा जाए?