बिहार की राजधानी पटना का इतिहास देश के सब से प्राचीन गौरवशाली इतिहासों में एक है. यहां एक के बाद एक प्रतापी राजाओं का शासन रहा जिन्होंने अपने राजवंश की ख्याति को बढ़ाते हुए अपनी राजधानी को हर बार एक नया नाम दे कर संबोधित किया. कुसुमपुर, पुष्पापुर, पाटलिपुत्र, अजीमाबाद और अब इस का नाम पटना पड़ा है. मगध नरेश अजातशत्रु ने 600 ईसापूर्व पाटलिग्राम में गंगा नदी के किनारे एक छोटा सा किला बनाया था, जोकि बीते समय तक इस की शानोशौकत का परिचय देता रहा. आज भी वही शानशौकत इस के आसपास के क्षेत्रों जैसे कुमराहर, अगम कुआं, बुलंदी बाग, कंकड़ बाग क्षेत्रों में देखी जा सकती है. गंगा किनारे तक फैला होने के कारण यह शहर उपज की दृष्टि से भी बहुत समृद्ध रहा है. इसीलिए लंबे समय से कृषि क्षेत्र का बड़ा व्यापारिक केंद्र भी रहा है.

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