‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है,’ यह कहावत एक भारतीय युवा वैज्ञानिक ने अपाहिजों के लिए दिमाग के इशारे पर चलने वाली कुरसी का आविष्कार कर के चरितार्थ की है. इस वैज्ञानिक ने देखा कि देशविदेश में लाखों लोग मस्तिष्क से तो पूर्णतया स्वस्थ हैं पर शारीरिक अपंगता की वजह से चलनेफिरने में अक्षम हैं. क्यों न इन के लिए एक ऐसी व्हीलचेयर बनाई जाए जो मस्तिष्क के इशारे पर चले और उस जगह पर ले जाए जिस के बारे में उन्होंने सोचा है या जहां उन्हें पहुंचना है. इन दिव्यांगों के लिए एक ऐसे साधन की आवश्यकता थी जिस से ये बिना किसी सहारे के अपनी मरजी से आजा सकें, घूमफिर सकें.

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