वसुंधरा ने ननद रूपाली की शादी में देने के लिए जो पैसा जमा किया था, वह बेटे के बीमार पड़ने पर खर्च हो गया. लेकिन फिर भी वसुंधरा ने रूपाली को ऐसा उपहार दिया जिस की कल्पना तक सुकांत नहीं कर सकता था.  बड़ी जेठानी ने माथे का पसीना पोंछा और धम्म से आंगन में बिछी दरी पर बैठ गईं. तभी 2 नौकरों ने फोम के 2 गद्दे ला कर तख्त पर एक के ऊपर एक कर के रख दिए. दालान में चावल पछोरती ननद काम छोड़ कर गद्दों को देखने लगी. छोटी चाची और अम्माजी भी आंगन की तरफ लपकीं. बड़ी जेठानी ने गर्वीले स्वर में बताया, ‘‘पूरे ढाई हजार रुपए के गद्दे हैं. चादर और तकिए मिला कर पूरे 3 हजार रुपए खर्च किए हैं.’’आसपास जुटी महिलाओं ने सहमति में सिर हिलाया.

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