Married Life Story: किशु का तोलिया सुखाने बाहर आई आन्या ने देखा, पापाजी लिविंगरूम में आ कर अपनी आरामकुरसी पर बैठ गए हैं और हमेशा की तरह उन्होंने अखबार भी उठा लिया है. अब आन्या की नजरें मम्मी जी को ढूंढ़ने लगी. लो आ गईं कहीं से भी निकल कर, अब वे रसोई में जा कर चाय चढ़ा देंगी. चाय की चुस्कियों के बिना अखबार की खबरें पापाजी के हलक से नीचे नहीं उतरतीं. साथ ही, वे पास बैठी मम्मीजी को भी खबरें सुनाते रहेंगे. भले ही मम्मीजी बाद में खुद पूरा अखबार पढ़ती हों.

आन्या ने आज तक कभी किन्ही पतिपत्नी के संबंधों पर इतना गौर नहीं किया था, शादी से पहले अपने पापामम्मी के संबंधों पर भी नहीं. फिर वह स्वयं दांपत्य बंधन में बंध गई. एक वर्ष तो हनीमून की तरह पलक झपकते गुजर गया, फिर गोद में किशुआ गया.

कोविड समाप्त हो चुका था पर आन्या और मनन की कंपनियों में अभी भी स्वैच्छिक वर्क फ्रौम होम चल रहा था. यानी, जब तक बाध्य न किया जाए, घर से काम किया जा सकता था. दोनों इस व्यवस्था से खुश थे. पर इधर कुछ समय से दोनों के बीच छुटपुट/तनातनी आरंभ हो गई थी.

कभी घरेलू जिम्मेदारियों को ले कर, कभी किशु को संभालने की बात पर तो कभी औफिस के काम की अधिकता को ले कर दोनों एकदूसरे पर चिड़चिड़ा जाते. तभी से आन्या अपने सासससुर के परस्पर संबंधों को गौर से देखने लगी थी. कितना तादातम्य है दोनों में, एकदूसरे की लय में समझ जाते हैं किसे क्या चाहिए. सवेरे पापाजी पहले फ्रैश होते हैं, फिर मम्मीजी फ्रैश हो कर आएं, तब तक वे दोनों के लिए बेड टी और बिस्कुट की ट्रे तैयार कर लेते हैं.

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