Hindi Story : रुचि बड़ी खुशीखुशी मानसी बूआ के साथ पढ़ाई के लिए उन के घर रहने आ गई थी. इधर मानसी भी संतुष्ट थी कि उस की व्यस्तता में रुचि ने पढ़ाई के साथ घर भी संभाल लिया. लेकिन मानसी अनजान थी कि उस की पीठ पीछे रुचि यह गुल खिलाएगी.

भाभी ने आखिर मेरी बात मान ही ली. जब से मैं उन के पास आई थी यही एक रट लगा रखी थी, ‘भाभी, आप रुचि को मेरे साथ भेज दो न. अर्पिता के होस्टल चले जाने के बाद मु झे अकेलापन बुरी तरह सताने लगा है और फिर रुचि का भी मन वहीं से एमबीए करने का है, यहां तो उसे प्रवेश मिला नहीं है.’

‘‘देखो, मानसी,’’ भाभी ने गंभीर हो कर कहा था, ‘‘वैसे रुचि को साथ ले जाने में कोई हर्ज नहीं है पर याद रखना यह अपनी बड़ी बहन शुचि की तरह सीधी, शांत नहीं है. रुचि की अभी चंचल प्रकृति बनी हुई है, महाविद्यालय में लड़कों के साथ पढ़ना...’’

मानसी ने उन की बात बीच में ही काट कर कहा, ‘‘ओफो, भाभी, तुम भी किस जमाने की बातें ले कर बैठ गईं. अरे, लड़कियां पढ़ेंगी, आगे बढ़ेंगी तभी तो सब के साथ मिल कर काम करेंगी. अब मैं नहीं इतने सालों से बैंक में काम कर रही हूं.’’

भाभी निरुत्तर हो गई थीं और रुचि सुनते ही चहक पड़ी थी, ‘‘बूआ, मु झे अपने साथ ले चलो न. वहां मु झे आसानी से कालेज में प्रवेश मिल जाएगा और फिर आप के यहां मेरी पढ़ाई भी ढंग से हो जाएगी.’’

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