अनेकता में एकता अब कहां
Indian Diaspora: ‘अनेकता में एकता, भारत की विशेषता’ अब केवल एक स्लोगन बन कर रह गया है. पंडितों और मौलवियों ने हमें बांट दिया है. जाति व धर्म के आधार पर हम एकदूसरे के दुश्मन बन गए हैं. आज के मध्यवर्गीय परिवारों के शिक्षित युवकयुवतियां विदेशों में नौकरियां ढूंढ़ने लगे हैं. आस्ट्रेलिया, लंदन जैसे देशों में तो भारतीयों के लिए नफरत थी परंतु वे कम पैसों पर आ कर सब काम करने को तैयार थे. सो, उन्हें नौकरियां मिलने लगीं. अपने परिश्रमी स्वभाव व कठिन परिश्रम तथा बुद्धि के कारण वे विदेशों में सफल होने लगे.
कनाडा में सिख समुदाय ने अपनी पकड़ बढ़ा ली. अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश में भी ऊंचीऊंची नौकरियों पर भारतीय अपनी जगह बनाने लगे. विदेशों का धन भारतीयों की ?ालियां भरने लगा. देश की राजनीति में भी भारतीय आने और जाने लगे.
धीरेधीरे विदेशियों की आंखों में ये भारतीय खटकने लगे. उन के आने पर रोक लगने लगी. ऐसेऐसे कानून बनाए जा रहे हैं कि भारतीयों का आना व विदेशों में बस जाना मुश्किल होने लगा. भारतीय सैकंड क्लास सिटिजन बन गए हैं.
आज तो हालत यह है कि न अपने देश के रहे, न विदेश के ही बन सके. धर्म के नाम पर वोटों को बटोरने के लिए देश के अंदर घृणा, नफरत के बीज बो दिए गए हैं. अब तो वे बीज पनपने भी लगे हैं. सिर उठाने वाले युवक आतंकवादी बन रहे हैं. लेखक - शशि आनंद
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विभिन्न विषयों को उठाता अंक
‘शराब के धंधे में फिल्मों के धुरंधर’ शीर्षक से प्रकाशित लेख बहुत सही लगा. शाहरुख खान और अजय देवगन जैसे बौलीवुड सितारों का शराब के प्रीमियम ब्रैंडों में निवेश करना और उन्हें बढ़ावा देना भारत में युवा पीढ़ी, बल्कि किशोरों के बीच भी शराब पीने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा है क्योंकि इन सैलिब्रिटीज को वे अपना आदर्श मानते हैं.
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