Hindi Kavita : माँ आज खुश थी

बहुत खुश…

खुश होने के कारण बहुतेरे थे

वह पहली बार अपने बेटे को लेकर

उसके ननिहाल जा रही थी।

उम्र का कोई भी पड़ाव हो

मायका हर लड़की को खींचता है।

वह खुश थी बहुत खुश

पर इस बार

उनकी खुशी का कारण

दूसरा था।

जिस घर को नानी ने अपने

खून-पसीने से सींचा

जिसकी दीवारें गवाह थी

उनके त्याग और बलिदान की

जिसकी ईंट-ईंट में बसती थी उनकी आत्मा

वह जीवन भर रहा नाना और मामा का घर

दरवाजे पर लगी नेम प्लेट पर भी

उन्हें जगह नहीं मिली!

माँ आज खुश थी

बहुत खुश…

जिस पहचान के लिए

नानी उम्र भर तरसती रही

मेरे आ जाने से

उन्हें वह पहचान मिल गई थी। Hindi Kavita

डॉ. रंजना जायसवाल

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