Mystery Story In Hindi : सरिता, बीस साल पहले, दिसंबर (द्वितीय) 2005 - पार्टी में सभी को प्रीति का इंतजार था लेकिन वह नहीं आई. अचानक उस के खून होने की खबर ने पार्टी का सारा माहौल बदल डाला. खूनी पार्टी में मौजूद कोई मेहमान था या घर का कोई सदस्य, यह गुत्थी सुलझाना जरा मुश्किल काम था.
बहुत बड़ी पार्टी थी. अभिजात्य वर्ग के हर क्षेत्र से जुड़े लोग सपरिवार मौजूद थे. बीच-बीच में कोई पूछ लेता था, ‘‘भई, महफिल तो सजा ली लेकिन शमा जलाई ही नहीं. कहां है वह जिस के लिए पार्टी आयोजित की है?’’
पहले तो ऋतिका यह कह कर टालती रही कि प्रीति अभी आ जाएगी लेकिन जब यह सवाल सभी की जबान पर आ गया तो रतन को कहना पड़ा, ‘‘लंबे सफर के बाद प्रीति काफी थकी हुई थी, इसलिए सो रही है.’’
मेहमानों की बेचैनी को शांत कर दोनों मुड़े तो उन की नजर एक अजनबी सुदर्शन युवक पर पड़ी. रतन और ऋतिका दोनों अपने बच्चों के सभी दोस्तों को पहचानते थे और यह उन का हम उम्र भी नहीं था. इस से पहले कि वे उस अजनबी से कुछ पूछते, पुलिस कमिश्नर बत्रा ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘अरे, देव, तुम यहां किस के मेहमान हो?’’
‘‘किसी का नहीं, सर,’’ युवक कमिश्नर बत्रा को सैल्यूट मारते हुए बोला, ‘‘मेरी बहन नीना प्रिया की सहेली है, उसे लेने आया हूं.’’
‘‘नीना के भाई होने के नाते आप भी हमारे मेहमान हैं,’’ रतन जी ने नम्रता से कहा, ‘‘मेरा नाम रतन है और प्रिया मेरी बेटी है.’’
तभी प्रिया नीना और कुछ दूसरी लड़कियों के साथ आ गईं.
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